पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के बीच भारत ने एक बार फिर संतुलित और सिद्धांत आधारित कूटनीतिक रुख का प्रदर्शन किया है। इज़राइल की यात्रा के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने गाज़ा में स्थायी शांति की दिशा में प्रस्तुत प्रस्तावों का समर्थन करते हुए स्पष्ट कहा कि आतंकवाद चाहे कहीं भी हो, वह हर जगह शांति और मानवता के लिए खतरा है। भारत का यह वक्तव्य न केवल मौजूदा हालात पर उसकी गंभीर चिंता को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर उसकी जिम्मेदार भूमिका को भी रेखांकित करता है। गाज़ा में जारी संघर्ष ने हजारों लोगों को प्रभावित किया है और क्षेत्रीय स्थिरता को गहरी चुनौती दी है। इज़राइल और हमास के बीच टकराव ने मानवीय संकट को जन्म दिया है। ऐसे समय में भारत ने दोहराया कि वह किसी भी प्रकार के आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करता है और नागरिकों को निशाना बनाए जाने को अस्वीकार्य मानता है। भारत ने पहले भी हमास द्वारा इज़राइल पर किए गए हमलों की आलोचना की थी और इसे आतंकवादी कार्रवाई बताया था। साथ ही, भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि दीर्घकालिक समाधान केवल संवाद और कूटनीति से ही संभव है। इस संतुलन के जरिए भारत ने यह संदेश दिया कि आतंकवाद के खिलाफ सख्ती और मानवीय सरोकार—दोनों उसके लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। भारत और इज़राइल के बीच संबंध पिछले एक दशक में नई ऊंचाइयों पर पहुंचे हैं। रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है। प्रधानमंत्री स्तर पर यात्राओं और उच्च स्तरीय वार्ताओं ने इन संबंधों को और मजबूत किया है। भारत की विदेश नीति का मूल सिद्धांत ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ रहा है। यही कारण है कि भारत इज़राइल के साथ मजबूत संबंध बनाए रखते हुए फिलिस्तीन के मुद्दे पर भी अपने पारंपरिक समर्थन को पूरी तरह समाप्त नहीं करता। भारत लंबे समय से दो-राष्ट्र समाधान का समर्थक रहा है, जिसमें सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर इज़राइल और स्वतंत्र फिलिस्तीन—दोनों का अस्तित्व शामिल है। भारतीय पक्ष द्वारा दिया गया यह वक्तव्य कि “कहीं भी आतंकवाद, हर जगह शांति के लिए खतरा है” दरअसल भारत के अपने अनुभवों से उपजा है। दशकों से सीमा पार आतंकवाद का सामना कर रहे भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार यह मुद्दा उठाया है कि आतंकवाद को किसी भी राजनीतिक या वैचारिक आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सहित कई मंचों पर व्यापक आतंकवाद निरोधक ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया है। गाज़ा के संदर्भ में भी भारत का संदेश यही है कि हिंसा से केवल विनाश होता है, समाधान नहीं। नागरिकों की सुरक्षा और मानवीय सहायता सुनिश्चित करना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है। गाज़ा संकट के दौरान भारत ने मानवीय सहायता भेजकर यह स्पष्ट किया कि वह केवल राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित नहीं है। दवाइयों, खाद्य सामग्री और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के माध्यम से भारत ने संकटग्रस्त नागरिकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। भारत का यह रुख अंतरराष्ट्रीय समुदाय में उसकी विश्वसनीयता को मजबूत करता है। एक ओर वह आतंकवाद के खिलाफ कठोर संदेश देता है, वहीं दूसरी ओर मानवीय सहायता के जरिए पीड़ितों के प्रति सहानुभूति भी व्यक्त करता है। यही संतुलन उसे वैश्विक दक्षिण की आवाज़ के रूप में स्थापित करता है। पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। इज़राइल और कई अरब देशों के बीच संबंधों में सुधार हुआ है, जबकि ईरान जैसे देशों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। ऐसे समय में भारत का संतुलित दृष्टिकोण उसे एक विश्वसनीय साझेदार बनाता है। ऊर्जा सुरक्षा, भारतीय प्रवासी समुदाय और व्यापारिक हित—ये सभी कारक भारत की पश्चिम एशिया नीति को प्रभावित करते हैं। इसलिए भारत किसी एक पक्ष का अंध समर्थन करने के बजाय स्थायी शांति और क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर देता है। आज जब दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, भारत की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। जी-20 की अध्यक्षता के दौरान भी भारत ने वैश्विक दक्षिण के मुद्दों को प्रमुखता दी थी। गाज़ा जैसे संवेदनशील विषय पर संतुलित और सिद्धांत आधारित रुख अपनाकर भारत ने संकेत दिया है कि वह केवल क्षेत्रीय शक्ति ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार वैश्विक खिलाड़ी भी है। भारत का स्पष्ट संदेश है कि आतंकवाद के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए—चाहे वह एशिया में हो, यूरोप में या पश्चिम एशिया में। साथ ही, दीर्घकालिक समाधान के लिए संवाद, कूटनीति और पारस्परिक सम्मान अनिवार्य हैं। इज़राइल में भारत द्वारा गाज़ा शांति योजना का समर्थन और आतंकवाद के खिलाफ सख्त बयान यह दर्शाता है कि भारत अपनी विदेश नीति में सिद्धांत और व्यवहार—दोनों का संतुलन साध रहा है। एक ओर वह आतंकवाद की स्पष्ट निंदा करता है, दूसरी ओर मानवीय सहायता और दो-राष्ट्र समाधान की वकालत कर शांति का मार्ग भी सुझाता है। पश्चिम एशिया में स्थिरता केवल क्षेत्रीय देशों के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक शांति और आर्थिक संतुलन के लिए भी आवश्यक है। भारत का संदेश साफ है—आतंकवाद का कोई औचित्य नहीं, और स्थायी शांति का मार्ग केवल संवाद और सहयोग से ही प्रशस्त हो सकता है।