डिजिटल युग की राजनीति में सोशल मीडिया अब केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि जनसमर्थन, प्रभाव और वैश्विक पहचान का पैमाना बन चुका है। इसी बदलते परिदृश्य में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। वे इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन यानी 10 करोड़ फॉलोअर्स का आंकड़ा पार करने वाले दुनिया के पहले शीर्ष राजनीतिक नेता बन गए हैं। यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति में भारत की डिजिटल उपस्थिति और नेतृत्व शैली का भी प्रतीक है। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने राजनीति के पारंपरिक स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। पहले जहां जनसभाएं, प्रेस वार्ताएं और टीवी इंटरव्यू संवाद के मुख्य माध्यम होते थे, वहीं अब इंस्टाग्राम, एक्स (पूर्व में ट्विटर), यूट्यूब और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म सीधे जनता से जुड़ने का सशक्त जरिया बन गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस परिवर्तन को समय रहते समझा और उसे अपनी राजनीतिक रणनीति का अभिन्न हिस्सा बनाया। उनकी पोस्ट केवल सरकारी घोषणाओं तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों, युवाओं से संवाद, अंतरराष्ट्रीय यात्राओं, योग, पर्यावरण अभियानों और व्यक्तिगत क्षणों तक फैली होती हैं। इससे उनकी छवि एक सख्त प्रशासक के साथ-साथ जनसरोकारों से जुड़े नेता के रूप में उभरती है। यदि वैश्विक संदर्भ में तुलना करें तो यह उपलब्धि और भी उल्लेखनीय बन जाती है। अमेरिका के राष्ट्रपति Joe Biden सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं, लेकिन इंस्टाग्राम फॉलोअर्स के मामले में वे मोदी से पीछे हैं। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का डिजिटल प्रभाव अपने समर्थकों के बीच मजबूत रहा है, फिर भी इंस्टाग्राम पर उनकी पहुंच इस स्तर तक नहीं पहुंच सकी। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भी सोशल मीडिया का रणनीतिक उपयोग करते हैं, लेकिन फॉलोअर्स की संख्या में वे काफी पीछे हैं। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को युवा और उदार छवि वाला नेता माना जाता है, परंतु डिजिटल लोकप्रियता के इस रिकॉर्ड में वे भी मोदी से काफी दूर हैं। यह अंतर केवल संख्या का नहीं, बल्कि डिजिटल रणनीति और निरंतरता का भी है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 के आम चुनाव से पहले ही सोशल मीडिया की शक्ति को पहचाना और उसे जनसंपर्क का प्रमुख माध्यम बनाया। 2014 और 2019 के चुनावों में डिजिटल अभियान ने निर्णायक भूमिका निभाई थी। 2024 के बाद भी यह प्रभाव बरकरार है। उनके सोशल मीडिया पोस्ट में भावनात्मक अपील, राष्ट्रीय गौरव, विकास परियोजनाओं की झलक और सांस्कृतिक विरासत का समावेश रहता है। यही कारण है कि उनका डिजिटल संवाद केवल राजनीतिक समर्थकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक दर्शकों तक पहुंचता है। डिजिटल लोकप्रियता का एक कूटनीतिक आयाम भी है। जब किसी नेता के करोड़ों फॉलोअर्स होते हैं, तो उसके संदेश सीमाओं से परे प्रभाव डालते हैं। जी20 शिखर सम्मेलन, ब्रिक्स बैठक या विदेशी दौरों की तस्वीरें और वीडियो वैश्विक दर्शकों तक तुरंत पहुंचते हैं। इससे भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूती मिलती है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने भी युद्ध के दौरान सोशल मीडिया का प्रभावी उपयोग कर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाया था। लेकिन इंस्टाग्राम पर फॉलोअर्स की संख्या के लिहाज से मोदी का रिकॉर्ड उन्हें एक अलग स्थान पर स्थापित करता है। हालांकि, आलोचकों का तर्क है कि सोशल मीडिया फॉलोअर्स को जनसमर्थन का अंतिम पैमाना नहीं माना जा सकता। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एल्गोरिदम, ट्रेंड और प्रचार रणनीतियां भी प्रभाव डालती हैं। इसके बावजूद 100 मिलियन फॉलोअर्स का आंकड़ा निरंतर सक्रियता और दीर्घकालिक रणनीति का परिणाम होता है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि मोदी का डिजिटल प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं है; उनके फॉलोअर्स में बड़ी संख्या विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक नागरिकों की भी है। भारत दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट उपयोगकर्ता देशों में शामिल है। सस्ते डेटा और स्मार्टफोन क्रांति ने डिजिटल पहुंच को व्यापक बनाया है। ऐसे में प्रधानमंत्री का सोशल मीडिया पर प्रभावी होना राजनीतिक संवाद की नई परिभाषा गढ़ता है। यह लोकतंत्र के डिजिटल रूपांतरण का संकेत भी है, जहां नेता और नागरिक के बीच की दूरी कम हो रही है। इस उपलब्धि का राजनीतिक संदेश भी स्पष्ट है। डिजिटल युग में नेतृत्व केवल नीतियों से नहीं, बल्कि प्रस्तुति और संवाद शैली से भी परिभाषित होता है। मोदी की इंस्टाग्राम सफलता बताती है कि वे बदलती तकनीकी और सामाजिक प्रवृत्तियों के अनुरूप स्वयं को ढालने में सक्षम रहे हैं। विश्व नेताओं के बीच यह रिकॉर्ड उन्हें डिजिटल कूटनीति के अग्रणी चेहरे के रूप में स्थापित करता है। अंततः, इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन फॉलोअर्स का आंकड़ा केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक डिजिटल पहचान का प्रतीक है। यह रिकॉर्ड दर्शाता है कि राजनीतिक नेतृत्व अब केवल संसद और मंचों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्क्रीन पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अन्य वैश्विक नेता इस स्तर तक पहुंच पाते हैं या प्रधानमंत्री मोदी की यह डिजिटल बढ़त लंबे समय तक कायम रहती है। फिलहाल, यह उपलब्धि भारतीय राजनीति के डिजिटल अध्याय में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बन चुकी है।