मध्य पूर्व में संघर्ष का अब तक का सबसे संवेदनशील मोड़ आ गया जब संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर संयुक्त सैन्य हमलें में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की पुष्टि हुई। इस निर्णायक हमले ने विश्व राजनीति में भू-राजनीतिक तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है और वैश्विक समुदाय के मध्य तीखी प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया है। घटना के उद्घाटित होने के बाद विभिन्न देशों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और शक्तियों ने अपनी‐अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई है। ये प्रतिक्रियाएँ न केवल खामेनेई की मौत पर भावनात्मक स्तर पर हैं, बल्कि इससे उत्पन्न क्षितिज पर संभावित युद्ध, कूटनीति और विश्व सुरक्षा के मुद्दों पर भी केंद्रित हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने खामेनेई की हत्या की पुष्टि करते हुए इसे एक “ऐतिहासिक क्षण” बताया और खामेनेई को “इतिहास के सबसे दुष्ट व्यक्तियों में से एक” करार दिया। ट्रम्प का बयान था कि यह अमेरिका तथा उसके सहयोगियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम था और उन्होंने ईरान को चेताया कि अगर वह और प्रतिशोध करने की कोशिश करेगा तो उसे “इतिहास की सबसे भयंकर प्रतिक्रिया” का सामना करना पड़ेगा। इज़रायली रक्षा मंत्रियों ने इस हमले को समर्थन देते हुए कहा कि खामेनेई “उन लोगों में से था जिसने इज़राइल के विनाश के लिए सभी प्रयास किए” और इस हमले को एक “न्यायपूर्ण कार्रवाई” बताया। इज़राइल ने यह भी संकेत दिया है कि वह क्षेत्र में अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसी प्रकार का अभियान जारी रख सकता है। रूस और चीन ने अमेरिका-इज़राइल के हमले की कड़ी आलोचना की है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसे “न्याय के बिना हत्या” और “अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन” बताया। पुतिन ने खामेनेई को एक रणनीतिक भागीदार और दो-तरफ़ा मित्रता के इतिहास का व्यक्ति बताया और ईरान के प्रति अपनी संवेदना जताई। चीन ने भी इस कार्रवाई की “गंभीर निंदा” की और इसे ईरान की संप्रभुता तथा सुरक्षा का उल्लंघन कहा। चीन ने युद्ध को तत्काल रोकने तथा कूटनीति की वापसी का आग्रह किया। यूरोपीय संघ की उच्च विदेश नीति प्रमुख काजा कलेस ने खामेनेई की मौत को ईरान के इतिहास में निर्णायक पल बताया, लेकिन उन्होंने तनाव कम करने और कूटनीति पर जोर देने का आह्वान किया। यूरोपीय देशों में मिश्रित प्रतिक्रियाएँ देखने को मिली हैं। ब्रिटेन और जर्मनी ने ईरान की कुछ जवाबी कार्रवाई की निंदा की, पर मुख्य रूप से उन्होंने प्रतिशोध से बचने और वार्ता की पुनः शुरुआत की सलाह दी। फ्रांस समेत कई यूरोपीय नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने का समर्थन भी किया है। ब्रिटिश रक्षा सेक्रेटरी ने अपने बयान में कहा कि ब्रिटेन ईरान द्वारा संभावित “असंयमित हमलों” से अपने नागरिकों और सैनिकों को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन उन्होंने सीधे अमेरिका-इज़राइल के हमले का समर्थन नहीं किया। कनाडा और ऑस्ट्रेलिया सहित कुछ पश्चिमी देशों ने अमेरिका के कदम को मध्य पूर्व की सुरक्षा के लिहाज़ से समर्थन योग्य बताया, जबकि कई अन्य ने विवाद को कूटनीति द्वारा सुलझाने की वकालत की। ईरान-समर्थक संगठनों जैसे हमास ने खामेनेई की हत्या पर “विशाल क्षति” बताया और अमेरिका तथा इज़राइल को “भयावह अपराध” कहा। उन्होंने अरब और मुस्लिम देशों से प्रतिशोध के लिए आह्वान किया। देशों जैसे यमन के हूती समूह ने भी ईरानी जनता के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए इस वार को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। विश्व के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन और समर्थन रैलियाँ शुरू हो गई हैं। दक्षिण एशियाई देशों जैसे पाकिस्तान में अमेरिकी कांसुलेट पर विरोधी भीड़ की हिंसक झड़पें हुईं, जिसमें कई लोगों की मौत हुई। इराक़, लेबनान, बांग्लादेश, और कुछ अफ़्रीकी देशों में भी खामेनेई की मौत के बाद विरोध प्रदर्शन बड़े पैमाने पर हुए, जहाँ लोगों ने अमेरिका तथा इज़राइल के खिलाफ आवाज़ उठाई। विश्लेषकों के अनुसार, खामेनेई जैसे अहम् राजनीतिक और धार्मिक नेता की हत्या से न केवल ईरान की नेतृत्व संरचना में अस्थिरता आएगी, बल्कि इससे मध्य पूर्व में विद्यमान तनाव और उभर सकता है। इज़राइल और अमेरिका के खिलाफ ईरान ने मिसाइलों तथा ड्रोन द्वारा जवाबी कार्रवाई की है, जिससे क्षेत्र में सैन्य गतिरोध और जोरों पर है। विश्व समुदाय के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती युद्ध को रोकना, कूटनीति को पुनः स्थापित करना और वैश्विक तेल बाजार तथा आर्थिक स्थिरता के लिए खतरे को न्यूनतम करना है। प्रारंभिक रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आपात बैठकें बुलाकर सभी पक्षों को संयम और बातचीत का आग्रह किया है। अयातुल्ला खामेनेई की हत्या पर विश्व प्रतिक्रियाएँ विभाजित हैं: अमेरिका और इज़राइल इसे सुरक्षा और रणनीतिक जीत के रूप में पेश कर रहे हैं, जबकि रूस, चीन और कई अन्य देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। यूरोपीय और मध्य पूर्वी देशों ने संघर्ष के विस्तार को रोकने और कूटनीति को प्राथमिकता देने की वकालत की है। इसने वैश्विक राजनीति में नई जटिलताओं को जन्म दिया है और आगामी दिनों में इसका असर विश्व सुरक्षा, तेल बाजार और क्षेत्रीय संतुलन पर गहरा पड़ेगा।