Tuesday, August 11, 2026
BREAKING
राष्ट्रगीत को राष्ट्रगान के समकक्ष कानूनी संरक्षण: एक ऐतिहासिक कदम प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रमंडल खेलों के चैंपियनों के साथ बातचीत की भारत सरकार ने ई-वीजा धारक विदेशी नागरिकों के भारत प्रवेश को सुगम बनाने के लिए 11 और इंटरनेशनल पोर्ट्स को अधिसूचित किया केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने लॉन्च किया नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल आर्थिक तंगी से इसरो वैज्ञानिक बनने के सपने तक: छात्रवृत्ति से गणेश कुमार को अपनी पढ़ाई जारी रखने में मदद मिली पीएम पोषण योजना के तहत खाद्यान्नों का आवंटन Horoscope Today: दैनिक राशिफल 12 अगस्त, 2026 असम में बाढ़ का तांडव: 100 मौतें, सवा लाख जिंदगियां तबाह, फिर भी नहीं थम रहा पानी का कहर ! Horoscope Today: दैनिक राशिफल 11 अगस्त, 2026 J&K LATEST NEWS AUGUST 2026

संपादकीय

राष्ट्रगीत को राष्ट्रगान के समकक्ष कानूनी संरक्षण: एक ऐतिहासिक कदम

August 11, 2026 07:12 PM

 भुपिंद्र शर्मा. चंडीगढ़ः राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हाल ही में उस विधेयक को अपनी स्वीकृति प्रदान की है, जो राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के गायन में जानबूझकर बाधा डालने या उसे रोकने के कृत्य को दंडनीय अपराध की श्रेणी में लाता है। राष्ट्रपति की मुहर लगते ही राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 अब विधिवत कानून का रूप ले चुका है। इस संशोधन के साथ ही वंदे मातरम् को वही कानूनी सुरक्षा प्राप्त हो गई है, जो अब तक केवल राष्ट्रगान 'जन गण मन' को हासिल थी। यह घटनाक्रम केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता भर नहीं है, बल्कि भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा और उनके संरक्षण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण विधायी पहल है, जिसका ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व गहराई से समझा जाना आवश्यक है।
यह विधेयक संसद के मानसून सत्र के दौरान पारित हुआ। गृह मंत्रालय की ओर से इसे राज्यसभा में पेश किया गया था और दोनों सदनों ने इसे बिना किसी बड़े विरोध के पारित कर दिया। लोकसभा ने इसे 30 जुलाई को मंजूरी दी थी, जबकि राज्यसभा एक दिन पहले ही, यानी 29 जुलाई को इसे पारित कर चुकी थी। संसद से पारित होने के बाद यह विधेयक राष्ट्रपति के पास स्वीकृति के लिए भेजा गया, जहां उन्होंने अपनी सहमति देकर इसे कानूनी रूप प्रदान किया। इस संशोधन से पूर्व राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 3 के तहत केवल राष्ट्रगान के गायन में जानबूझकर बाधा डालने या उससे जुड़ी किसी सभा को बाधित करने को ही अपराध माना जाता था। अब इस धारा का दायरा बढ़ाकर उसमें राष्ट्रगीत को भी सम्मिलित कर लिया गया है। नए प्रावधान के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगान अथवा राष्ट्रगीत के गायन को रोकता है या उससे जुड़ी किसी सभा में विघ्न डालता है, तो उसे तीन वर्ष तक के कारावास, अर्थदंड, अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है।
इस कानून की पृष्ठभूमि को समझने के लिए हमें इतिहास की ओर लौटना होगा। वंदे मातरम् की रचना उन्नीसवीं सदी में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह गीत संन्यासी विद्रोह की पृष्ठभूमि में लिखा गया था और आगे चलकर 1905 के स्वदेशी आंदोलन के दौरान अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जनमानस को प्रेरित करने वाला एक सशक्त माध्यम बना। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस गीत ने लाखों देशवासियों में देशभक्ति की भावना का संचार किया और यह भारतीय जनमानस की सामूहिक चेतना का प्रतीक बन गया। संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 24 जनवरी, 1950 को यह घोषणा की थी कि वंदे मातरम् को राष्ट्रगान जन गण मन के समान ही सम्मान और समान दर्जा दिया जाएगा। इस प्रकार, स्वतंत्रता के आरंभिक वर्षों में ही दोनों गीतों को समान गरिमा प्रदान करने की भावना व्यक्त की जा चुकी थी, किंतु व्यावहारिक और विधिक स्तर पर यह समानता अब तक अधूरी थी। ताज़ा संशोधन ने उस अधूरेपन को दूर करते हुए इस ऐतिहासिक प्रतिबद्धता को ठोस कानूनी आधार प्रदान किया है।
इस विधेयक के पारित होने का समय भी उल्लेखनीय है। पिछले वर्ष, यानी 2025 में, वंदे मातरम् की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर वर्षभर चलने वाले समारोहों का शुभारंभ किया गया था, जिसका उद्घाटन स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। राष्ट्रपति मुर्मू ने भी इस अवसर पर अपने संदेश में इस गीत को मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और राष्ट्रीय एकता की भावना का प्रतीक बताया था। ऐसे में यह विधायी कदम उन समारोहों की स्वाभाविक परिणति के रूप में देखा जा सकता है। गृह मंत्रालय के अनुसार, इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पहली बार लाल किले की प्राचीर से वंदे मातरम् का गायन भी किया जाएगा, जो इस राष्ट्रगीत को राजकीय समारोहों में और अधिक केंद्रीय स्थान दिए जाने का संकेत है।
फिर भी, किसी भी कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ उसके व्यापक सामाजिक निहितार्थों पर विचार करना भी उतना ही आवश्यक है। राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान निस्संदेह हर नागरिक का नैतिक दायित्व है, परंतु किसी कानून के माध्यम से इस सम्मान को अनिवार्य बनाने और उसकी अवहेलना को दंडनीय अपराध घोषित करने के बीच एक सूक्ष्म रेखा होती है। विधि विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यह नया प्रावधान केवल जानबूझकर की गई बाधा या विघ्न को ही दंडनीय मानता है, न कि किसी व्यक्ति के मौन रहने या गायन में सहभागिता न करने को। इस प्रकार, यह कानून सैद्धांतिक रूप से व्यक्तिगत स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सम्मान के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है। बावजूद इसके, भारत की अदालतों ने अतीत में राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े मामलों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक अथवा व्यक्तिगत मान्यताओं के अधिकार को लेकर संवेदनशील निर्णय दिए हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि व्यवहार में इस कानून का प्रयोग किस प्रकार किया जाता है और क्या यह वास्तव में केवल जानबूझकर की गई बाधाओं तक ही सीमित रहता है, या फिर इसका दायरा कहीं अधिक व्यापक रूप ले लेता है।
कुल मिलाकर, राष्ट्रपति मुर्मू की यह स्वीकृति भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह वंदे मातरम् के ऐतिहासिक योगदान और उसकी भावनात्मक गहराई को स्वीकार करते हुए उसे विधिक दृष्टि से भी सुरक्षा प्रदान करता है। साथ ही, यह आवश्यक है कि इस कानून का क्रियान्वयन संतुलित और संवेदनशील ढंग से हो, ताकि राष्ट्रीय गौरव की रक्षा और नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता, दोनों के बीच एक स्वस्थ सामंजस्य बना रहे। अंततः, कोई भी राष्ट्रगीत अथवा राष्ट्रगान अपनी सच्ची शक्ति कानून के भय से नहीं, बल्कि नागरिकों के हृदय में बसी स्वाभाविक श्रद्धा और राष्ट्रप्रेम से ही प्राप्त करता है।

 

Have something to say? Post your comment

और संपादकीय समाचार

असम में बाढ़ का तांडव: 100 मौतें, सवा लाख जिंदगियां तबाह, फिर भी नहीं थम रहा पानी का कहर !

असम में बाढ़ का तांडव: 100 मौतें, सवा लाख जिंदगियां तबाह, फिर भी नहीं थम रहा पानी का कहर !

जब एल्गोरिद्म बने संपादक: मेटा की मुश्किल बढ़ी

जब एल्गोरिद्म बने संपादक: मेटा की मुश्किल बढ़ी

मोदी की नसीहत: सवाल उठाओ, समाधान भी लाओ

मोदी की नसीहत: सवाल उठाओ, समाधान भी लाओ

एफसीआरए विधेयक 'धर्म-निरपेक्ष', शाह ने ईसाई संगठनों को दिलाया भरोसा

एफसीआरए विधेयक 'धर्म-निरपेक्ष', शाह ने ईसाई संगठनों को दिलाया भरोसा

हरित ऊर्जा और संपर्क-सुविधा की दोहरी सौगात

हरित ऊर्जा और संपर्क-सुविधा की दोहरी सौगात

असम में बाढ़ का कहर: स्थायी समाधान की दरकार

असम में बाढ़ का कहर: स्थायी समाधान की दरकार

मेटा की सफाई नाकाफी, सरकार ने फिर भेजा समन , एक हफ्ते में दूसरी बार तलब हुआ मेटा

मेटा की सफाई नाकाफी, सरकार ने फिर भेजा समन , एक हफ्ते में दूसरी बार तलब हुआ मेटा

फ्लैश फ्लड ने केरल के व्यापार जगत की कमर तोड़ी: व्यापारी संगठन की चिंता

फ्लैश फ्लड ने केरल के व्यापार जगत की कमर तोड़ी: व्यापारी संगठन की चिंता

नशामुक्त युवा, सशक्त भारत:प्रधानमंत्री मोदी ने छेड़ा नया राष्ट्रीय अभियान

नशामुक्त युवा, सशक्त भारत:प्रधानमंत्री मोदी ने छेड़ा नया राष्ट्रीय अभियान

17,900 करोड़ की सौगात: मोदी ने आंध्र प्रदेश को दी विकास की नई रफ्तार

17,900 करोड़ की सौगात: मोदी ने आंध्र प्रदेश को दी विकास की नई रफ्तार

By using our site, you agree to our Terms & Conditions and Disclaimer     Dismiss