भुपिंद्र शर्मा, चंंडीगढ़ः अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के परिदृश्य में इस समय भारत-चीन संबंधों और ईरान के सत्ता समीकरण से जुड़े दो घटनाक्रम खासे महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। एक ओर सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की संभावना चर्चा में है, वहीं दूसरी ओर ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई लंबे समय तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आने के बाद एक दुर्लभ वीडियो फुटेज में दिखाई दिए हैं। दोनों घटनाएं एशिया और पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के महत्वपूर्ण संकेत देती हैं।
रॉयटर्स समेत कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शी जिनपिंग के 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में प्रस्तावित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने की संभावना है। यदि यह यात्रा होती है, तो 2019 के बाद भारत की उनकी पहली यात्रा होगी। 2019 में उन्होंने तमिलनाडु के ममल्लापुरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अनौपचारिक शिखर वार्ता में हिस्सा लिया था। रिपोर्टों के मुताबिक, इस बार चीन का प्रतिनिधिमंडल करीब 400 सदस्यों का हो सकता है। भारतीय और चीनी अधिकारी यात्रा से जुड़े होटल, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं पर काम कर रहे हैं। हालांकि, चीन ने अभी तक राष्ट्रपति की यात्रा की औपचारिक पुष्टि नहीं की है।
शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हुआ था। इस संघर्ष में दोनों पक्षों के सैनिक मारे गए और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर लंबे समय तक सैन्य गतिरोध बना रहा। इसके बाद सीमा पर भारी सैन्य तैनाती हुई और द्विपक्षीय संबंधों पर इसका व्यापक असर पड़ा। अक्टूबर 2024 में सीमा पर तनाव कम करने को लेकर हुए समझौते के बाद दोनों देशों ने संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने के प्रयास तेज किए हैं। इसके बाद उच्चस्तरीय संपर्क बढ़ा है, सीधी वाणिज्यिक उड़ानों को फिर से शुरू करने की दिशा में कदम उठाए गए और वीजा नियमों में भी कुछ राहत दी गई।
ब्रिक्स सम्मेलन से पहले भारत और चीन के बीच कूटनीतिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने बीजिंग में चीनी विदेश मंत्री वांग यी और उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात कर सीमा विवाद सहित द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। हालांकि, सीमा से जुड़ी हालिया घटनाओं ने दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की प्रक्रिया को चुनौती भी दी है। चीन ने ब्रिक्स सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, लेकिन शी जिनपिंग की भारत यात्रा के संबंध में विस्तृत जानकारी देने से फिलहाल परहेज किया है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी कई मौकों पर कह चुके हैं कि भारत और चीन दोनों के हित स्थिर और शांतिपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों में हैं। ऐसे समय में जब वैश्विक व्यापार तनाव बढ़ रहा है और पश्चिम एशिया में संघर्ष जारी है, ब्रिक्स उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए सहयोग का महत्वपूर्ण मंच बनता जा रहा है। सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान समेत कई प्रमुख नेताओं के शामिल होने की संभावना है। ऐसे में शी जिनपिंग की संभावित यात्रा भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक बदलाव का महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत हो सकती है, हालांकि सीमा विवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मतभेद अभी समाप्त नहीं हुए हैं।
इसी बीच ईरान से जुड़ा घटनाक्रम भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींच रहा है। ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन से लगभग गायब रहे। उनके पिता और पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद सत्ता परिवर्तन के दौरान उनकी भूमिका को लेकर लगातार चर्चा होती रही। उनकी सार्वजनिक अनुपस्थिति के कारण उनके स्वास्थ्य और शासन में सक्रिय भूमिका को लेकर कई तरह के सवाल उठे।
अब ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने एक दुर्लभ वीडियो जारी किया है, जिसमें मोजतबा खामेनेई एक धार्मिक अध्ययन सत्र की अध्यक्षता करते दिखाई दे रहे हैं। फुटेज में वे एक विद्यार्थी की शोध प्रस्तुति सुनते और उसका मूल्यांकन करते नजर आते हैं। बताया गया कि उन्होंने ‘इस्लामी सुरक्षा मॉडल’ विषय पर प्रस्तुत शोध को 20 में से 19.5 अंक दिए। यह वीडियो इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सर्वोच्च नेता बनने के बाद पहली बार उनकी आवाज सार्वजनिक रूप से सुनाई दी है। हालांकि, फुटेज कब रिकॉर्ड की गई थी, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ईरान में सर्वोच्च नेता की सार्वजनिक उपस्थिति हमेशा सत्ता संचालन का एकमात्र आधार नहीं रही है। धार्मिक और राजनीतिक संस्थानों, प्रतिनिधियों, टेलीविजन संबोधनों तथा लिखित निर्देशों के माध्यम से भी सर्वोच्च नेतृत्व की भूमिका निभाई जाती रही है। इसके बावजूद मोजतबा की लंबी अनुपस्थिति असामान्य मानी गई, क्योंकि उनके पूर्ववर्ती अयातुल्ला अली खामेनेई सार्वजनिक रूप से अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय और प्रभावशाली नजर आते थे। ईरानी अधिकारियों ने पहले संकेत दिया था कि मोजतबा को चोटें आई थीं, लेकिन वे शासन संभालने में सक्षम हैं।
भारत-चीन संबंधों में संभावित नरमी और ईरान में नए नेतृत्व की सार्वजनिक मौजूदगी, दोनों घटनाक्रम एक व्यापक भू-राजनीतिक बदलाव की ओर संकेत करते हैं। एशिया में बड़ी शक्तियां सीमा विवाद, व्यापार और सुरक्षा चुनौतियों के बीच अपने संबंधों को नए सिरे से संतुलित करने की कोशिश कर रही हैं। आने वाले समय में नई दिल्ली में होने वाला ब्रिक्स सम्मेलन और ईरान में मोजतबा खामेनेई की भूमिका, दोनों ही वैश्विक शक्ति-संतुलन को समझने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।