प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 फरवरी, 2026 को संत गुरु रविदास की 649वीं जयंती के पावन अवसर पर उन्हें “मानवता के महान भक्त” के रूप में भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर नव-भारत की सामाजिक सामंजस्य, न्याय और करुणा की विचारधारा पर जोर देते हुए उन्होंने संत रविदास के विचारों को आज के भारत के कल्याणकारी कार्यक्रमों का आधार बताया।
देशभर में संत रविदास जयंती का आयोजन व्यापक रूप से किया गया, जिसमें धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम शामिल रहे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी संत रविदास के शिक्षाओं को याद करते हुए राष्ट्र के लोगों को शुभकामनाएँ दीं और उनके संदेश को “समता और सद्भावना” का स्थायी स्रोत बताया।
📍 पंजाब दौरा और कार्यक्रम
प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से पंजाब का दौरा किया और जालंधर के डेरा सचखंड बल्लान में श्रद्धांजलि अर्पित की। डेरा सचखंड बल्लान राविदासिया समुदाय का एक प्रमुख केंद्र है और इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और समुदाय के सदस्य मौजूद रहे। मोदी ने संत की शिक्षाओं के अनुरूप समाज में समानता और सम्मान की भावना को मजबूत करने पर अपना ध्यान केंद्रित किया।
इस मौके पर उन्होंने आदमपुर हवाई अड्डे का भी नाम बदलकर ‘श्री गुरु रविदास महाराज जी हवाई अड्डा, आदमपुर’ रखने का ऐलान किया, जिससे संत रविदास की याद और उनके सामाजिक योगदान को स्थायी रूप से सम्मान मिले। इसके अलावा, लुधियाना-हलवारा हवाई अड्डे के नए टर्मिनल का उद्घाटन भी किया गया, जो राज्य के लिए एक नई पहचान और कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।
👥 सामाजिक संदेश और महत्व
प्रधानमंत्री ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में संत रविदास को “मानवता का अद्वितीय सेवक” कहा और उनके संदेश को न्याय, करुणा और सामाजिक सौहार्द का आधार बताया। उन्होंने कहा कि संत रविदास की शिक्षाएँ समय-समय पर देश को एकजुटता और समृद्धि की दिशा में प्रेरित करती हैं।
संत रविदास उत्तर भारत के भक्ति आंदोलन के एक प्रमुख स्तंभ रहे हैं। उनके विचार आज भी सामाजिक समरसता, जाति-भेद मिटाने और सर्वहित लक्ष्यों को साधने के लिए प्रेरित करते हैं। जयंती के दिन कई स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें उनके जीवन, दर्शन और योगदान को याद किया गया।