जापान इस सर्दी में मौसम की अभूतपूर्व विपरीत परिस्थितियों का सामना कर रहा है, जहाँ अत्यधिक बर्फबारी ने 81 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया है और कई इलाकों में जीवन लगभग ठप हो गया है। जनवरी के अंतिम दिनों में देश के उत्तरी क्षेत्र विशेष रूप से आओमोरी जैसे हिस्सों में बर्फ की मोटाई 167 सेमी (लगभग 5.5 फीट) तक पहुँच गई, जो 1945 के बाद का सबसे उच्च स्तर है।
आओमोरी और आस-पास के क्षेत्र आम तौर पर भारी बर्फबारी के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस बार की बर्फ की सतह इतनी गहरी बन गई कि कई शहर और गाँव बर्फ की गहराई में डूबते दिखाई दिए। स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग ने इसे “पोस्ट-वार रिकॉर्ड” बताया, यानी द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे भारी बर्फबारी का मामला।
📉 सड़कें, ट्रेन और हवाई मार्ग प्रभावित
भारी बर्फबारी का प्रभाव सबसे पहले यातायात पर पड़ा। उत्तरी होक्काइडो और पश्चिमी तट के कई हिस्सों में रेल और सड़क मार्ग पर बर्फ ने जमी रफ्तार को रोक दिया। साप्पोरो के न्यू चितोसे एयरपोर्ट पर दर्जनों उड़ानें रद्द हो गईं और लगभग 7,000 यात्री रात भर एयरपोर्ट पर फंसे रहे, जहाँ अधिकारियों ने उन्हें आश्रय और आवश्यक सहायता प्रदान की।
रेल सेवाओं में भी भारी रुकावट आई और कई ट्रेनों को या तो रद्द कर दिया गया या देर से चलाया गया। खासकर होक्काइडो रेलवे ने बर्फ हटाने के प्रयासों के बावजूद सेवा बहाल करने में कठिनाइयों का सामना किया।
⚠️ आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
भारी बर्फ का असर न सिर्फ यातायात पर पड़ा, बल्कि स्थानीय लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी भी प्रभावित हुई। रेलवे और सड़क अवरोध, पैदल चलने में कठिनाइयाँ, और बर्फ हटाने की लगातार मेहनत ने नागरिकों के जीवन को चुनौतीपूर्ण बना दिया। बर्फ हटाने के दौरान दुर्घटनाओं में दर्जनों लोग घायल भी हुए हैं, और कई स्थानों पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के प्रयास जारी हैं।
मौसम विशेषज्ञ बताते हैं कि ऐसा भारी बर्फबारी पैटर्न जापान के “सी ऑफ़ जापान इफेक्ट” और मौजूदा मौसम प्रणाली का परिणाम है, जिसमें सी सर्फ़ से उठी नमी ठंडी हवा से टकरा कर भारी बर्फ में बदल जाती है। यह प्रक्रिया विशेष रूप से उत्तर भाग में सर्दियों के दौरान और अधिक गहन होती है।
📊 जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम
वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन भी इस तरह की चरम बर्फबारी घटनाओं को बढ़ा रहा है। समुद्र के तापमान में वृद्धि से हवा में नमी की मात्रा अधिक होती है, जो ठंडी स्थितियों में बर्फ के रूप में गिरती है और इतिहास-बोन रिकॉर्ड बनाती है।