भारत में आयोजित वैश्विक AI Impact Summit के दूसरे दिन भी बड़े ऐलानों और नीतिगत चर्चाओं की उम्मीदों ने तकनीकी जगत का ध्यान खींच रखा है। नई दिल्ली में चल रहे इस सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सामाजिक प्रभाव से लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों पर चर्चा जारी है।
सम्मेलन का यह चरण खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि आज के सत्रों में चाइल्ड सेफ्टी, हेल्थकेयर और समाज में AI के व्यावहारिक उपयोग जैसे विषयों पर प्रमुख विशेषज्ञ विचार रखेंगे। कई अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ता और प्रतिष्ठित वक्ता मंच साझा कर रहे हैं, जो AI के व्यापक सामाजिक प्रभावों पर चर्चा करेंगे।
आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम का दूसरा दिन नीतिगत घोषणाओं और क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिहाज से अहम है। विभिन्न सत्रों में बच्चों की सुरक्षा, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भरोसेमंद AI, और स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक के इस्तेमाल जैसे विषयों को प्राथमिकता दी जा रही है।
इसके साथ ही एप्लाइड AI और सामाजिक समानता जैसे मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में हैं, जिनका उद्देश्य तकनीक को आम लोगों तक लाभकारी तरीके से पहुँचाना है।
यह शिखर सम्मेलन 16 से 20 फरवरी तक आयोजित हो रहा है, जिसमें 500 से अधिक कार्यक्रम और सैकड़ों प्रदर्शक भाग ले रहे हैं। विभिन्न देशों के नीति-निर्माता, टेक कंपनियाँ और शोध संस्थान इसमें शामिल हैं, ताकि AI के जरिए विकास, सार्वजनिक सेवाओं और आर्थिक अवसरों को मजबूत किया जा सके।
सम्मेलन के प्रमुख विषयों में स्वास्थ्य, कृषि, समावेशन और भरोसेमंद AI जैसे क्षेत्र शामिल हैं, जिन्हें “थीमैटिक ज़ोन्स” में प्रस्तुत किया जा रहा है।
हालांकि, आयोजन की शुरुआत कुछ अव्यवस्थाओं की खबरों से भी चर्चा में रही, जहाँ प्रतिभागियों ने लंबी कतारों और प्रवेश संबंधी भ्रम की शिकायतें कीं।
इसके बावजूद मंच पर तकनीकी नवाचारों की प्रस्तुति जारी है और उद्योग जगत के प्रतिनिधि अपने AI समाधान प्रदर्शित कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, सम्मेलन का दूसरा दिन इस बात का संकेत दे रहा है कि AI को केवल तकनीकी नवाचार नहीं बल्कि सामाजिक विकास के उपकरण के रूप में स्थापित करने की कोशिश तेज हो रही है। स्वास्थ्य सेवाओं की दक्षता, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और डिजिटल समानता जैसे मुद्दों पर संभावित घोषणाएँ इस आयोजन को वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण बना रही हैं।