मुख्यमंत्री ने सीएमजीजीए के साथ सफाई, कचरा प्रबंधन एवं प्रशासनिक सुधारों पर की समीक्षा बैठक
मुख्यमंत्री ने कचरा प्रबंधन, ड्रेन सफाई और शिकायत निवारण पर तुरंत कार्रवाई करने के दिये निर्देश
मुख्यमंत्री ने सुशासन सहयोगियों से कहा, शिक्षा, स्वास्थ्य और सफाई को बेहतर बनाने के लिए उपायुक्तों के साथ मिलकर करें काम
चंडीगढ़, 19 फरवरी हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने संत कबीर कुटीर निवास स्थान पर मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में जिलों में सफाई, कचरा प्रबंधन, सफाई व्यवस्था, शिकायत निवारण सिस्टम को मजबूत करने और प्रशासनिक क्षमता में सुधार करनरे पर फोकस किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी कार्यक्रम के परियोजना निदेशक डॉ. यशपाल भी मौजूद रहे।
सुशासन सहयोगियों ने मुख्यमंत्री जिलों में जमीनी स्तर पर आने वाली मुख्य चुनौतियां और अपने-अपने जिलों में किए जा रहे नए तरीकों के बारे में अवगत करवाया। उन्होंने कचरा अलग-अलग करने, नालों की सफाई, सीवरेज दुरूस्त करने, मैनपावर की कमी और लोगों में जागरूकता की कमी से जुड़े मुद्दों पर बात की।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मीटिंग में शामिल हुए निगम आयुक्तों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने अपने-अपने इलाकों में साफ सफाई के साथ कचरा प्रबंधन को मज़बूत बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने नालों और सीवर लाइनों की नियमित रूप से सफाई करने और सीवरेज में आने वाली रुकावटों को तुरंत दूर करने तथा सफाई से जुड़े सभी लम्बित कामों को तेज़ी से पूरा करने की आवश्यकताओं पर बल दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि निगम आयुक्त संबंधित ज़िलों में सीवरेज से जुड़ी सभी शिकायतों के लिए नोडल ऑफ़िसर के रूप में काम करेंगे और उन्हें जनस्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर काम करना चाहिए ताकि उनका जल्दी समाधान किया जा सके। जनता या शिकायत पोर्टल से मिली किसी भी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए और समयबद्व ढंग से शिकायतों का निवारण किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने सफ़ाई और स्वच्छता पैरामीटर में औसत आधार पर कार्य कर रहे ज़िलों के निगम आयुक्तों के साथ वन-टू-वन बातचीत की और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सुधार के उपाय करने और स्वच्छता पैमाने के साथ अपनी रैंकिंग में सुधार करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि ज़मीनी स्तर पर दिखने वाले ऐसे सुधारों के परिणाम भी दिखने चाहिए जिनका आंकलन किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक क्षमता के महत्व को दोहराते हुए अधिकारियों को कार्य के समय आने वाली रुकावटों से बचाव के लिए ज़िला स्तर पर पर्याप्त स्टाफ को सही ढंग से तैनात करने के निर्देश दिये। उन्होंने निर्देश दिये कि कोई भी फ़ाइल बिना वजह पेंडिंग नहीं रहनी चाहिए और सभी मामलों का आसान प्रक्रिया से तुरंत निपटाया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों की भागीदारी और व्यवहार में बदलाव को मज़बूत बनाने के लिए सूचना एवं जागरूकता गतिविधियों को तेज़ किया जाए। उन्होंने सुशासन सहयोगियों को कचरा हॉटस्पॉट स्थानों की पहचान करने और ऐसे इलाकों में स्वच्छता के स्लोगन और जागरूकता संदेश लिखने के साथ-साथ विशेष सफ़ाई अभियान चलाने के निर्देश दिये।
मुख्यमंत्री ने नशे की आदत से बचाव के लिए अहम कदम उठाते हुए हर ज़िला अस्पताल में 10 बेड का नशा मुक्ति (डी-एडिक्शन) वार्ड बनाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि सुशासन सहयोगि इस पहल की प्रगति पर बारीकी से नज़र रखें और ज़मीनी स्तर पर आने वाली चुनौतियों की पहचान कर उनका समय पर क्रियान्वयन करने में मदद के लिए तथ्यों और सबूतों पर आधारित रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
उन्होंने कहा कि सुशासन सहयोगी विशेषकर शिक्षा, स्वास्थ्य और सफ़ाई जैसे आवश्यक क्षेत्रों में उपायुक्तों के साथ मिलकर काम करें ताकि पॉलिसी को बेहतर ढंग से लागू कर सेवाओं को बेहतर बनाया जा सके।
मीटिंग के दौरान सुुशासन सहयोगियों ने ज़िले के हिसाब से प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश की और चार हफ़्ते का लक्ष्य निर्धारित कर विस्तृत एक्शन प्लान बारे अवगत करवाया। इसके अलावा उन्होंने सफ़ाई सेवाओं और नागरिक मुद्दों की स्थानीय स्तर पर मॉनिटरिंग के लिए वार्ड कमेटियों का गठन करने और उनके प्रशिक्षण में तेज़ी लाने का प्रस्ताव रखा। यह कमेटियाँ जन भागीदारी से शिकायतों की समय पर रिपोर्टिंग करने और ज़मीनी स्तर पर सफ़ाई करने वाले प्रयासों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
बैठक में आयुक्त एवं सचिव, जनस्वास्थ्य मोहम्मद शाईन, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव डॉ. साकेत कुमार, महानिदेशक शहरी स्थानीय निकाय अशोक कुमार मीणा, महानिदेशक सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के मकरंद पांडुरंग सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
पशुओं के पॉलिक्लिनिक एवं अस्पतालों के लिए आधुनिक मशीनें खरीदी जाएंगी : श्याम सिंह राणा
- गैस एनेस्थीसिया मशीन , अल्ट्रासाउंड मशीन, ब्लड टेस्ट उपकरण तथा "बायो सेफ्टी लैब्स लेवल - 2" स्थापित करने को दी मंजूरी
चंडीगढ़ , 19 फरवरी - हरियाणा के पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में पशुओं के पॉलिक्लिनिक एवं अस्पतालों के लिए आधुनिक मशीनें खरीदी जाएंगी ताकि पशुपालकों के पशुधन का सस्ते में ईलाज हो सके। उन्होंने बताया कि आज हाई पावर्ड परचेज कमेटी में गैस एनेस्थीसिया मशीन , अल्ट्रासाउंड मशीन, ब्लड टेस्ट उपकरण तथा "बायो सेफ्टी लैब्स लेवल - 2" स्थापित करने को मंजूरी दी गई है।
श्री राणा की अध्यक्षता में हुई बैठक में कमेटी के सदस्य हरियाणा के शिक्षा मंत्री श्री महीपाल ढांडा भी उपस्थित थे।
इनके अलावा , पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रधान सचिव श्री विजय सिंह दहिया , महानिदेशक डॉ प्रेम सिंह , संयुक्त निदेशक डॉ सुखदेव राठी , आपूर्ति एवं निपटान विभाग के महानिदेशक श्री पंकज , वित्त विभाग के विशेष सचिव डॉ जय इंद्र सिंह समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि हाई पावर्ड परचेज कमेटी में प्रदेश में पशुओं के ईलाज के लिए स्थापित पॉलीक्लिनिकों हेतु गैस एनेस्थीसिया मशीन खरीदने की मंजूरी दी गई है। इससे डॉक्टरों को पशुओं की सर्जरी करने में सुविधा होगी। उन्होंने बताया कि पशुओं के इलाज (सर्जरी) में गैस एनेस्थीसिया मशीन इंजेक्टेबल की तुलना में अधिक सुरक्षित है, जो सटीक खुराक, तेज़ रिकवरी और बेहतर नियंत्रण प्रदान करती है। यह ऑक्सीजन के साथ मिलकर काम करती है, जिससे पशुओं के हृदय और अन्य अंगों पर दबाव कम पड़ता है। यह प्रणाली दर्द प्रबंधन और छोटे-बड़े जानवरों के लिए अत्यंत विश्वसनीय है।
उन्होंने आगे बताया कि हिसार , रायपुररानी तथा सोनीपत में "बायो सेफ्टी लैब्स लेवल - 2" स्थापित की जाएंगी। पशुओं में मध्यम जोखिम वाली बीमारियों की जांच के लिए उक्त लैब का उपयोग किया जाता है। यह लैब मानव/पशु स्वास्थ्य के लिए मध्यम-जोखिम वाले संक्रामक एजेंटों के परीक्षण के लिए होती है, इसमें विशेष पीपीई , बायोसेफ्टी कैबिनेट (BSC), और कीटाणुशोधन (Autoclave) की सुविधा होती है, जो श्वसन या त्वचा के संपर्क से संक्रमण रोकती है। उन्होंने बताया कि "बायो सेफ्टी लैब्स लेवल - 2" में पशुओं से इंसानों में फैलने वाली संक्रामक बीमारियों की जांच की जाती है ताकि इंसान बीमार पशुओं के सम्पर्क में आकर संक्रमित न हों और वे सुरक्षित रह सकें।
श्री श्याम सिंह राणा ने यह भी बताया कि पशुओं के ईलाज के लिए अल्ट्रासाउंड मशीने भी खरीदी जाएंगी। पशु चिकित्सा में प्रयुक्त होने वाली ये अल्ट्रासाउंड मशीन जानवरों के आंतरिक अंगों, ऊतकों और गर्भावस्था का गैर-आक्रामक (non-invasive) और विकिरण-मुक्त निदान करने के लिए एक अच्छी तकनीक है। यह तकनीक पालतू जानवरों (कुत्ते, बिल्ली) से लेकर पशुधन (गाय, भैंस, भेड़) में ट्यूमर, पेट की बीमारियों और प्रजनन संबंधी समस्याओं का सही पता लगाने में सहायक है।
उन्होंने यह भी बताया कि कई बार डॉक्टर को बीमार पशु के खून की जांच करवाने की जरुरत पड़ती है। अभी तक यह टेस्ट सुविधा लुवास यूनिवर्सिटी हिसार में ही उपलब्ध थी। आज की मीटिंग में पशुओं के खून टेस्ट के लिए उपकरण खरीदने की भी स्वीकृति दे दी गई है। अब सरकारी अस्पतालों में आने वाले बीमार पशुओं के ब्लड टेस्ट फ्री में किये जाएंगे और पशुओं का जल्द ईलाज करने में आसानी होगी।
पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि किसी भी पशुपालक या किसान का आर्थिक आधार पशु होते हैं जिनसे वे अपना परिवार चलाने के अलावा अतिरिक्त आमदनी कमाने का जरिया भी मानते हैं। राज्य सरकार अपने प्रदेश के पशु पालकों को समृद्ध बनाने के लिए हर आवश्यक कदम उठा रही है।
एनसीएलटी और कोर्ट आदेशों का अवश्य करें रजिस्ट्रेशन
एफसीआर डॉ. सुमिता मिश्रा ने जारी किए सख्त निर्देश
पालना न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ होगी अनुशासनात्मक कार्यवाई
चंडीगढ़, 19 फरवरी - हरियाणा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वितायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने राज्य के मण्डलायुक्त और उपायुक्तों को निर्देश दिये है कि वे नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल और न्यायालय के आदेशों का तय कानूनी नियमों के अनुसार रजिस्ट्रेशन अवश्य सुनिश्चित करें।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि मुख्य राजस्व अधिकारी, सब-रजिस्ट्रार और संयुक्त सब-रजिस्ट्रार को नेशनल कम्पनी ट्रिब्यूनल और कोर्ट के आदेशों के रजिस्ट्रेशन के संबंध में 13 नवंबर, 2013 को पहले के जारी निर्देशों और 22 नवंबर 2017 की अधिसूचना का पालन करना हैं।
उन्हों बताया कि नेशनल कम्पनी ट्रिब्यूनल के आदेशों से जुड़े मामलों में इंडियन स्टैम्प एक्ट, 1899 के शेड्यूल 1-ए के आर्टिकल 23-ए के तहत 1.5 प्रतिशत की दर से स्टैम्प ड्यूटी लगती है, जिसकी ज्यादा से ज्यादा लिमिट 7.5 करोड़ रुपये है। इसी तरह नॉन-बोनाफाइड कोर्ट के आदेश भी इसी नियम के तहत आते हैं। इन कानूनी नियमों का पालन करके राज्य के खजाने पर स्टैम्प ड्यूटी राजस्व बढाया जाना है।
डॉ. मिश्रा ने इस बात पर बल दिया कि इंडियन स्टैम्प एक्ट के नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए और ऐसे मामलों में बिना किसी छूट के सही स्टैम्प ड्यूटी का आंकलन और रजिस्ट्रेशन किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अचल संपत्ति के ट्रांसफर से जुड़े कई मामलों में न्यायालय द्वारा जारी स्टे ऑर्डर सब-रजिस्ट्रार के ऑफिस में पहंुचने पर जमाबंदी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह चूक न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन है। इसलिए, सर्कल राजस्व अधिकारी को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये है कि किसी भी न्यायालय से मिला कोई भी स्टे ऑर्डर तुरंत रेवेन्यू रिकॉर्ड में दिखाई दे।
वित्तायुक्त राजस्व ने सभी उपमण्डलायुक्तों और उपायुक्तों से कहा है कि वे अपने अधीन सभी संबंधित राजस्व अधिकारियों को निर्देश दें कि वे इन आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि इन मामलों में कोई भी चूक होने पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाई अमल में लाई जाएगी।
हरियाणा में 12 लाख से ज्यादा लोगों का एचआईवी टेस्ट किया, पूरे राज्य में इलाज का नेटवर्क बढ़ाया गया
चण्डीगढ़, 19 फरवरी - हरियाणा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि हरियाणा ने एचआईवी/एड्स के खिलाफ अपनी लड़ाई को तेज़ी से बढ़ाते हुए चालू वित्तीय वर्ष में 12.40 लाख से अधिक लोगों का टेस्ट किया और राज्य के हर कोने में मरीज़ों तक पहुँचने के लिए उपचार के बुनियादी ढ़ाचें का विस्तार किया है।
उन्होंने बताया कि अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच 12,40,205 लोगों की एचआईवी जांच की गई, जिनमें से 5,877 व्यक्ति एचआईवी पॉजिटिव पाए गए। राज्य में वर्तमान में 104 एकीकृत परामर्श एवं जांच केंद्र (ICTC) संचालित हैं, जिनमें फरीदाबाद में एक मोबाइल इकाई भी शामिल है। इन सभी केंद्रों पर निःशुल्क एवं गोपनीय सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। डॉ. मिश्रा ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक बिना किसी भेदभाव के जांच एवं उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
इस वित्त वर्ष में राज्य ने मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। 5,65,830 गर्भवती महिलाओं की एचआईवी जांच की गई, जिनमें से 613 महिलाएं एचआईवी पॉजिटिव पाई गईं और उन्हें समय पर उपचार से जोड़ा गया, जो एचआईवी/एड्स के ऊर्ध्वाधर संचरण के उन्मूलन में मदद करता है।
उपचार सुविधाओं के विस्तार के तहत राज्य में 24 एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (ART) केंद्र रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, करनाल, हिसार, अंबाला और मेवात सहित प्रमुख जिलों में संचालित हैं । इनमें से 13 नए केंद्र मेडिकल कॉलेजों में स्थापित किए गए हैं, जिससे मरीजों को उन्नत उपचार सुविधाएं अपने निकट ही उपलब्ध हो रही हैं और उन्हें लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ रही। इसके अतिरिक्त 5 फैसलिटी इंटीग्रेटेड एआरटी केंद्र तथा 4 लिंक एआरटी केंद्र भी कार्यरत हैं। वर्तमान में राज्यभर में कुल 40,851 मरीज जीवन रक्षक उपचार प्राप्त कर रहे हैं।
एचआईवी/एड्स के साथ जीवन यापन कर रहे व्यक्तियों (PLHIV) पर आर्थिक बोझ कम करने और उपचार अनुपालन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने दिसंबर 2021 में मासिक वित्तीय सहायता योजना शुरू की थी, जिसके तहत पात्र लाभार्थियों को 2,250 रुपये प्रतिमाह प्रदान किए जाते हैं। अब तक इस योजना के अंतर्गत 54.3 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं। पंजीकृत मरीजों को निःशुल्क फॉलो-अप देखभाल तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से अल्ट्रासाउंड, एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी उन्नत जांच सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
एचआईवी के अतिरिक्त राज्य यौन संचारित संक्रमणों (STI) की रोकथाम पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। इसके लिए 31 नामित क्लीनिकों में निःशुल्क परामर्श, सिफिलिस जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध है। साथ ही, रेड क्रॉस सोसाइटी और गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से 42 लक्षित हस्तक्षेप परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं, जो उच्च जोखिम समूहों—जैसे महिला यौन कर्मी, पुरुष-पुरुष यौन संबंध रखने वाले व्यक्ति, अंतःशिरा नशीली दवाओं का सेवन करने वाले, ट्रक चालक एवं प्रवासी मज़दूरों के साथ कार्य कर रही हैं। इन परियोजनाओं के तहत नियमित स्वास्थ्य जांच, प्रत्येक छह माह में एचआईवी जांच तथा कंडोम वितरण सुनिश्चित किया जाता है। ओपिओइड पर निर्भर व्यक्तियों के लिए राज्य में 12 ओपिओइड प्रतिस्थापन चिकित्सा (OST) केंद्र और 3 उपग्रह इकाइयां संचालित हैं। वर्तमान में 9,014 मरीज पंजीकृत हैं, जिनमें से 4,569 नियमित उपचार प्राप्त कर रहे हैं।
जन जागरूकता के क्षेत्र में भी राज्य ने व्यापक अभियान चलाया है। रेडियो जिंगल, रेलवे स्टेशनों पर डिजिटल डिस्प्ले, सिनेमा विज्ञापन, एसएमएस अभियान और सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं। स्कूलों और कॉलेजों में रेड रिबन क्लबों के माध्यम से 3,397 स्कूलों और 429 कॉलेजों में रैलियां, मैराथन और जागरूकता प्रश्नोत्तरी आयोजित कर संदेश पहुंचाया गया है।
इसके अतिरिक्त परिवहन विभाग, कृषि विभाग, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), उत्तरी रेलवे तथा महिला एवं बाल विकास विभाग सहित विभिन्न सरकारी विभागों को भी इस मुहिम से जोड़ा गया है। मुख्यधारा में लाने की पहल (Mainstreaming Initiative) के तहत अब तक 49,120 व्यक्तियों को जागरूक किया जा चुका है।
डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि कार्यक्रम का व्यापक दायरा और समन्वय राज्य की इस दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि एचआईवी संक्रमण की दर को कम किया जाए, संक्रमित व्यक्तियों को सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण देखभाल सुनिश्चित की जाए तथा एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करने के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में निरंतर प्रगति की जाए।
पहली डिजिटल जनगणना के लिए हरियाणा तैयार
प्रदेश में जनगणना-2027 की बड़े पैमाने पर तैयारियां
मुख्य सचिव ने की एक दिवसीय सम्मेलन की अध्यक्षता
चंडीगढ़, 19 फरवरी-हरियाणा में जनगणना-2027 को लेकर बड़े पैमाने पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। जनगणना के सफल और समयबद्ध संचालन के लिए मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने आज यहां मंडलायुक्तों, उपायुक्तों, नगर निगम आयुक्तों के एक दिवसीय सम्मेलन को वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा कि यह जनगणना केवल एक सांख्यिकीय कवायद भर नहीं, बल्कि आने वाले दशक की नीतियों, कल्याणकारी योजनाओं और आधारभूत संरचना के विकास की नींव है। साथ ही, यह राज्य की प्रशासनिक और तकनीकी दक्षता तथा समन्वय कौशल की भी परीक्षा है।
उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य वरिष्ठ अधिकारियों और प्रधान जनगणना अधिकारियों को जनगणना की कार्यप्रणाली और प्रक्रियाओं तथा उनकी भूमिका एवं उत्तरदायित्वों के प्रति संवेदनशील बनाना है।
मुख्य सचिव ने कहा कि जनगणना से प्राप्त आंकड़े नीति निर्माण एवं विकास योजनाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों ने राज्य में कम बाल लिंगानुपात वाले जिलों की पहचान करने में मदद की और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम के माध्यम से लक्षित हस्तक्षेप संभव हुआ।
मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने कहा कि जनगणना में उपायुक्तों और नगर निगम आयुक्तों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। केन्द्र सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन, प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों की नियुक्ति, प्रशिक्षण, जिले का पूर्ण कवरेज तथा निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूरा करना उनकी जिम्मेदारी है। मंडलायुक्त अपने अधीन जिलों की नियमित समीक्षा करें और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त तथा अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि जनगणना से जुड़ी पूरी प्रक्रिया में त्रुटि या लापरवाही की कोई गुंजाइश न रहे। उन्होंने कहा कि इस कार्य में अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रशिक्षण और संवेदनशीलता का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि जनगणना कार्य के लिए जारी की गई धनराशि का समुचित उपयोग किया जाए।
उन्होंने बताया कि देश में पहली बार पूरी तरह से डिजिटल जनगणना होगी। इसके पहले चरण में ‘मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना’ 1 मई से 30 मई, 2026 तक की जाएगी। वर्ष 1966 में राज्य गठन के बाद से, हरियाणा के लिए यह छठी जनगणना होगी। परंपरागत प्रक्रिया से हटकर इस बार नागरिकों को स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) का विकल्प भी दिया जाएगा, जिसके लिए 16 अप्रैल, 2026 से एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जाएगा।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि नागरिक अपने विवरण पहले ही ऑनलाइन भर सकेंगे। जानकारी सबमिट करने के बाद उन्हें एसएमएस और ई-मेल के माध्यम से एक विशिष्ट सेल्फ-एन्यूमरेशन आईडी प्राप्त होगी। इसके बाद जब गणनाकर्मी मौके पर आएंगे, तो वे केवल पहले से भरी गई जानकारी का सत्यापन करेंगे, जिससे समय की बचत होगी और आंकड़ों की गुणवत्ता में सुधार होगा।
हरियाणा के जनगणना संचालन निदेशक श्री ललित जैन ने बताया कि आगामी जनगणना के अंतर्गत लगभग 50,000 हाउस लिस्टिंग ब्लॉकों को 203 ग्रामीण और शहरी चार्जों में कवर किया जाएगा। इस विशाल कार्य के लिए 50,000 से अधिक गणना कर्मी और 8,000 से अधिक पर्यवेक्षक तैनात किए जाएंगे। इनके प्रशिक्षण के लिए मास्टर ट्रेनर और फील्ड ट्रेनर की चरणबद्ध प्रशिक्षण व्यवस्था अपनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि गणना कर्मियों और पर्यवेक्षकों की प्रतिबद्धता सुनिश्चित करने तथा कार्य में निरंतरता बनाए रखने के लिए सरकार ने दोनों चरणों को सफलतापूर्वक पूरा करने पर 25,000 का मानदेय देने का निर्णय लिया है।
उन्होंने बताया कि गणनाकर्मी एक विशेष हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करेंगे, जिसे उनके पंजीकृत निजी मोबाइल उपकरणों पर इंस्टॉल किया जाएगा। यह एप्लिकेशन ऑफलाइन मोड में भी कार्य करेगा, ताकि दूर-दराज़ और नेटवर्क-विहीन क्षेत्रों में भी जनगणना का कार्य बाधित न हो। नेटवर्क उपलब्ध होते ही डाटा स्वतः सिंक्रोनाइज़ हो जाएगा। यह मोबाइल एप्लिकेशन एंड्रॉयड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा, जिसके लिए न्यूनतम ऑपरेटिंग सिस्टम, रैम और स्टोरेज की शर्तें निर्धारित की गई हैं। रियल-टाइम मॉनिटरिंग और तकनीक-आधारित डैशबोर्ड के माध्यम से प्रत्येक स्तर पर प्रगति की सतत निगरानी की जाएगी।
इस दौरान बताया गया कि जनगणना कार्य में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए प्रत्येक जिले में जिला जनगणना समन्वय समिति गठित की जाएगी। राजस्व, शिक्षा, पुलिस, स्वास्थ्य, पंचायती राज, सूचना प्रौद्योगिकी और जन संपर्क जैसे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा। आमजन में विश्वास और सहयोग बढ़ाने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जनगणना में एकत्रित व्यक्तिगत जानकारी पूर्णतः गोपनीय रहेगी और किसी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं की जाएगी।
सम्मेलन के दौरान खास तौर से जनगणना के लिए तैयार की गई रागनी ‘जनगणना बुनियाद देश की, लोकतंत्र की है पहचान’ भी सुनाई गई।
क्रमांक-2026
9 से 23 फरवरी तक मनाया जा रहा है स्मार्ट मीटर पखवाड़ा
चंडीगढ़, 19 फरवरी — स्मार्ट मीटरिंग को बढ़ावा देने और इसके प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय द्वारा 9 फरवरी से 23 फरवरी 2026 तक सभी राज्यों में ‘स्मार्ट मीटर पखवाड़ा’ मनाया जा रहा है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (यूएचबीवीएनएल) के प्रवक्ता ने बताया कि अब तक यूएचबीवीएन के तीन शहरों करनाल, पानीपत और पंचकूला में लगभग पांच लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। इन शहरों के उपभोक्ता अपने कनेक्शन को पोस्टपेड से प्रीपेड बिलिंग मोड में परिवर्तित कर बिजली शुल्क पर 5 प्रतिशत की छूट का लाभ उठा सकते हैं।
‘स्मार्ट मीटर यूएचबीवीएन’ मोबाइल एप्लिकेशन गूगल प्ले स्टोर और एप्पल आईओएस स्टोर, दोनों पर उपलब्ध है। इस ऐप के माध्यम से उपभोक्ता अपनी दैनिक बिजली खपत पर निगरानी रख सकते हैं, प्रीपेड बिलिंग की स्थिति में क्रेडिट बैलेंस से संबंधित दैनिक अलर्ट प्राप्त कर सकते हैं तथा स्मार्ट मीटर से संबंधित शिकायतें दर्ज कर सकते हैं। वर्तमान में यूएचबीवीएन में लगभग 31,600 उपभोक्ता मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग कर रहे हैं।
प्रवक्ता ने बताया कि किसी भी सहायता के लिए उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1912 या 1800-180-1550 पर संपर्क कर सकते हैं, । यूएचबीवीएनएल ने उपभोक्ताओं से प्रीपेड बिलिंग अपनाने और अपने बिजली उपयोग के बेहतर नियंत्रण तथा प्रभावी प्रबंधन के लिए मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड करने की अपील की है।