Tuesday, November 03, 2026
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हरियाणा

Latest News from Haryana November 2026

November 03, 2026 06:52 AM

*संविधान केवल कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत के लोगों और राज्य के बीच एक जीवंत संवैधानिक समझौता: राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष*

*राज्यपाल ने जनप्रतिनिधि सम्मेलन के समापन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में किया संबोधित*

 *वरिष्ठतम पूर्व विधायक श्री गणपत राय और श्री ओ.पी. भारद्वाज को किया सम्मानित*

*संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने में जनप्रतिनिधियों की अहम भूमिका: प्रो. असीम कुमार घोष*


चंडीगढ़, 2 नवंबर:  हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि भारत का संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत के लोगों और राज्य के बीच एक जीवंत संवैधानिक समझौता है, जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित है।

राज्यपाल सोमवार को पंचकूला के सेक्टर-5 स्थित इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में आयोजित 'जनप्रतिनिधि सम्मेलन' के समापन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।

इस अवसर पर राज्यपाल ने आयु में वरिष्ठतम पूर्व विधायक श्री गणपत राय और श्री ओपी भारद्वाज को उनकी सीटों पर पहुंच कर सम्मानित किया। श्री गणपत राय का जन्म जून, 1935 में तथा श्री ओपी भारद्वाज का जुलाई 1935 में हुआ था।

विधायकों को संवैधानिक मूल्यों का सबसे महत्वपूर्ण संरक्षक बताते हुए प्रो. घोष ने कहा कि शपथ ग्रहण के माध्यम से निर्वाचित प्रतिनिधि संविधान की रक्षा और उसके सिद्धांतों को बनाए रखने का संकल्प लेते हैं। वहीं, सदन में बहस, प्रश्नों और कानून निर्माण के माध्यम से वे इस संकल्प को धरातल पर उतारते हैं। उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र की मजबूती विधायी संस्थाओं में होने वाले सार्थक संवाद, गरिमापूर्ण असहमति और व्यापक जनहित को ध्यान में रखकर लिए जाने वाले निर्णयों पर निर्भर करती है।

राज्यपाल ने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस सम्मेलन में हरियाणा विधानसभा के वर्तमान एवं पूर्व सदस्य एक मंच पर एकत्रित हुए हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व विधायक अपने अनुभव और संस्थागत ज्ञान के माध्यम से लोकतांत्रिक परंपराओं को समृद्ध करते हैं, जबकि वर्तमान विधायक अपनी ऊर्जा और वर्तमान दायित्वों के प्रति प्रतिबद्धता के साथ योगदान देते हैं। दोनों पीढ़ियों के बीच इस प्रकार का संवाद लोकतांत्रिक परंपराओं को सुदृढ़ करने के साथ-साथ उत्कृष्ट संसदीय कार्यप्रणालियों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल देते हुए प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि नागरिकों को अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी समान रूप से बोध होना चाहिए। लोकतंत्र की वास्तविक मजबूती उसके नागरिकों की संवैधानिक समझ, जागरूकता और प्रतिबद्धता में निहित है।

उन्होंने जनप्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे इस सम्मेलन के संदेश को अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों तक पहुंचाएं और विशेष रूप से युवाओं के साथ संवाद स्थापित करें। वे स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों को संविधान के महत्व से अवगत कराएं तथा नागरिकों को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करें। साथ ही, मौलिक अधिकारों के साथ संवैधानिक कर्तव्यों के प्रति भी जागरूकता बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में जनप्रतिनिधियों का आचरण ईमानदारी, शालीनता और जनसेवा की भावना का आदर्श उदाहरण होना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि समावेशी विकसित हरियाणा और समावेशी विकसित भारत के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते हुए संविधान को सदैव अपना मार्गदर्शक बनाए रखना होगा।

प्रो. असीम कुमार घोष ने जनप्रतिनिधि सम्मेलन के उत्कृष्ट आयोजन के लिए हरियाणा विधानसभा और विधानसभा अध्यक्ष को बधाई दी। उन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी सदस्यों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष श्री  हरविंद्र कल्याण, विधानसभा के उपाध्यक्ष डॉ. कृष्ण मिड्ढा, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री ज्ञान चंद गुप्ता एवं श्री कुलदीप शर्मा तथा इनेलो विधायक श्री अर्जुन चौटाला ने समापन सत्र में मंच साझा किया। इस अवसर पर विधायकगण, पूर्व विधायक, मंत्रीगण एवं पूर्व मंत्री भी उपस्थित रहे।

 

क्रमांक-2026

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*हरियाणा के 60 वर्षों की विकास यात्रा, उपलब्धियों और भावी चुनौतियों पर जनप्रतिनिधि सम्मेलन में हुआ मंथन*

*हरियाणा को आत्मनिर्भर एवं विकसित राज्य बनाने में जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण: विधानसभा अध्यक्ष श्री हरविंद्र कल्याण*

*राजनीतिक विचारधाराएं भिन्न हो सकती हैं, लेकिन लक्ष्य समाज, प्रदेश और राष्ट्र का हित होना चाहिए: श्री हरविंद्र कल्याण*


चंडीगढ़, 2 नवंबर:   हरियाणा राज्य की स्थापना के 60 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में प्रदेश की गौरवमयी विकास यात्रा, वर्तमान एवं भावी चुनौतियों तथा पूर्ण रूप से विकसित हरियाणा के निर्माण पर विचार-विमर्श के लिए विशेष पखवाड़े की शुरुआत की गई है। इसी कड़ी में सोमवार को पंचकूला के सेक्टर-5 स्थित इंद्रधनुष सभागार में हरियाणा विधानसभा के संविधान पखवाड़े के तहत ‘जनप्रतिनिधि सम्मेलन’ आयोजित किया गया।

सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष श्री हरविंद्र कल्याण ने कहा कि इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य जनभागीदारी को बढ़ावा देना, जागरूक समाज के निर्माण में जनप्रतिनिधियों की भूमिका को रेखांकित करना तथा हरियाणा को आत्मनिर्भर एवं विकसित राज्य बनाने की रूपरेखा तैयार करना रहा।

उन्होंने बताया कि सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के ध्वजवाहक लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और जनप्रतिनिधियों का मार्गदर्शन किया। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी सहित लगभग 21 जनप्रतिनिधियों ने अपने विचार साझा किए।

विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि सम्मेलन में हरियाणा की पिछले 60 वर्षों की विकास यात्रा, पूर्व मुख्यमंत्रियों एवं जनप्रतिनिधियों के कुशल नेतृत्व तथा वर्तमान समय की प्राथमिकताओं पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विचारधाराएं भिन्न हो सकती हैं, लेकिन सभी का अंतिम लक्ष्य समाज हित, प्रदेश हित और राष्ट्र हित होना चाहिए।

उन्होंने हरियाणा विधानसभा द्वारा पिछले दो वर्षों में किए गए डिजिटल एवं विधायी सुधारों का उल्लेख करते हुए बताया कि विधानसभा के सदस्यों एवं अधिकारियों की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र और कार्यशालाएं आयोजित की गई हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की ‘वन नेशन, वन लेजिस्लेचर’ की अवधारणा को साकार करने के लिए सभी विधानमंडलों को एक मंच पर आकर एक-दूसरे की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों (बेस्ट प्रैक्टिसेज) का आदान-प्रदान करना होगा।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि केवल भौतिक संरचनाओं का निर्माण ही वास्तविक विकास नहीं है। सच्चा विकास तभी संभव है, जब समाज का प्रत्येक वर्ग अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी सजग एवं जागरूक हो।

धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए हरियाणा विधानसभा के उपाध्यक्ष डॉ. कृष्ण लाल मिड्ढा ने कहा कि वर्ष 1966 से 2026 तक हरियाणा की 60 वर्षों की यात्रा केवल समय की गणना नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, परिश्रम, आत्मविश्वास और सामूहिक संकल्प की एक लंबी गाथा है। इस यात्रा में किसानों का पसीना, जवानों का साहस, श्रमिकों का परिश्रम, माताओं और बहनों का योगदान तथा युवाओं की आकांक्षाएं समाहित हैं।

उन्होंने कहा कि हरियाणा ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर देश के विकास में विशिष्ट स्थान बनाया है। इस गौरवशाली यात्रा को आगे बढ़ाने में जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।

 

क्रमांक-2026

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*मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से पंजाब के उद्योगपतियों ने की मुलाकात*

 

*हरियाणा में निवेश करने वाले उद्योगपतियों को सरकार की ओर से हर संभव सहयोग और सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी – मुख्यमंत्री*

 

*उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से दी जा रही हैं सभी आवश्यक स्वीकृतियां और सुविधाएं*

 

चंडीगढ़, 2 नवंबर-  हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी से सोमवार को हरियाणा निवास में पंजाब से आए उद्योगपतियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों का स्वागत करते हुए उन्हें हरियाणा में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया और आश्वासन दिया कि प्रदेश में उद्योग स्थापित करने के लिए उन्हें सरकार की ओर से हर संभव सहयोग एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने और निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। राज्य में उद्योगपतियों की सुविधा के लिए सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से विभिन्न विभागों की आवश्यक स्वीकृतियां एवं सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इसके अलावा, सरकार द्वारा उद्योगों की जरूरत के अनुसार औद्योगिक भूमि भी उपलब्ध करवाई जा रही है, ताकि निवेशकों को अपना कारोबार स्थापित करने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

 

उन्होंने कहा कि हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (HSIIDC) लगातार उद्योगपतियों के संपर्क में रहकर उन्हें प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित कर रहा है। हरियाणा में निवेश की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं और विभिन्न क्षेत्रों के निवेशक प्रदेश में उद्योग स्थापित करने में रुचि दिखा रहे हैं।

 

मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री से जुड़े उद्योगपति शामिल थे। उन्होंने हरियाणा में उपलब्ध औद्योगिक सुविधाओं और निवेश की संभावनाओं को लेकर मुख्यमंत्री के साथ चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि फूड प्रोसेसिंग के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों के उद्योगपति भी हरियाणा में निवेश करने के इच्छुक हैं, ऐसे सभी निवेशकों का स्वागत करती है और उन्हें उद्योग स्थापित करने के लिए अनुकूल माहौल एवं हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों से हरियाणा में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने और प्रदेश के औद्योगिक विकास में भागीदार बनने का आह्वान किया।

 

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सहमति-असहमति लोकतंत्र की ताकत, असहमति का भी होना चाहिए सम्मान : लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

 

संविधान पखवाड़ा के तहत आयोजित किया गया जनप्रतिनिधि सम्मेलन

 

कहा: 60 साल की यात्रा में अनेक चुनौतियों और कठिनाइयों के बावजूद हरियाणा विकास की अग्रिम पंक्ति में खड़ा प्रदेश

 

अंतिम व्यक्ति की जिंदगी में परिवर्तन लाना और उसके सामाजिक-आर्थिक जीवन में बदलाव लाना सभी की नैतिक जिम्मेदारी है: ओम बिरला

 

चंडीगढ़, 2 नवंबर-लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने कहा कि लोकतंत्र में विचारों और दृष्टिकोण में भिन्नता हो सकती है तथा सहमति और असहमति भी होती है, लेकिन असहमति का भी सम्मान होना चाहिए। असहमति दिशा देती है, दर्शन देती है और काम करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि सहमति-असहमति के बावजूद देश और प्रदेश को आगे बढ़ाने के लिए सभी के साझे प्रयास होने चाहिए। उन्होंने कहा कि शासन चलाना एक जिम्मेदारी है, लेकिन उससे बड़ी जिम्मेदारी जनसेवा की है।

 

श्री ओम बिरला सोमवार को पंचकूला के इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में हरियाणा विधानसभा संविधान पखवाड़ा के तहत आयोजित जनप्रतिनिधि सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, विधानसभा स्पीकर श्री हरविंद्र कल्याण, नेता प्रतिपक्ष श्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, विधानसभा के उपाध्यक्ष डॉ कृष्ण मिड्ढा, संसदीय कार्य मंत्री श्री महिपाल ढांडा सहित मंत्रीगण, विधायक गण उपस्थित थे। लोकसभा अध्यक्ष ने दीप प्रज्जवलित कर जनप्रतिनिधि सम्मेलन का उद्घाटन किया।

 

लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि हरियाणा की धरती कर्म की धरती रही है। भगवान श्रीकृष्ण की धरती ने भगवद्गीता के माध्यम से कर्म का संदेश दिया है। इसी कर्म की धरती के किसान, मजदूर, नौजवान, उद्यमी और खिलाड़ी हर क्षेत्र में आगे रहे हैं। उन्होंने कहा कि 60 साल की यात्रा में अनेक चुनौतियों और कठिनाइयों के बावजूद हरियाणा विकास की अग्रिम पंक्ति में खड़ा प्रदेश है और यह सब संविधान के कारण संभव हुआ है।

 

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत का संविधान केवल हमारा ही नहीं, बल्कि दुनिया के सभी लोकतांत्रिक देशों के लिए मार्गदर्शक है। संविधान ने हमारी लोकतांत्रिक परंपराओं को आगे बढ़ाया। उन्होंने संविधान निर्माताओं, प्रारूप समिति के अध्यक्ष बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, संविधान सभा के सभी सदस्यों तथा हरियाणा-पंजाब क्षेत्र के उन महानुभावों को याद किया, जिन्होंने संविधान सभा में योगदान दिया।

 

उन्होंने कहा कि संविधान आज भी जीवंत रूप से हम सभी का मार्गदर्शन करता है। संविधान केवल शासन चलाने की व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मा है। इसमें भारत की राष्ट्रीय चेतना के साथ देश के करोड़ों लोगों की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं का प्रतिबिंब है। संविधान हमारे हर दृष्टिकोण और हर विचार में मार्गदर्शन करता है।

 

श्री ओम बिरला ने कहा कि संविधान बनने के समय संविधान सभा में अपने-अपने मत और विचार रखे गए तथा असहमति और लंबी चर्चा के बाद संविधान बना। आजादी के बाद देश के सामने अनेक कठिनाइयां और चुनौतियां थीं। अलग-अलग राज्यों का विलय करना, राजनीतिक व्यवस्था देना और उसके साथ संसदीय लोकतंत्र को अपनाना बड़ी चुनौती थी। भाषा, संस्कृति, भौगोलिक परिस्थितियों और धर्म की विविधताओं के बावजूद भारत ने संसदीय लोकतंत्र को अपनाया और सभी को मत का अधिकार दिया।

 

उन्होंने कहा कि संसद के साथ विधानसभाओं की व्यवस्था और उसके बाद पंचायत राज तथा नगरीय क्षेत्रों में लोकतांत्रिक व्यवस्था विकसित हुई। पंचायत से लेकर दिल्ली तक लोकतंत्र की व्यवस्था भारत में है, जहां जनता की भागीदारी, जनता की सहभागिता और जनता का शासन है। उन्होंने कहा कि संविधान में सबको मौलिक अधिकार, समता, बंधुता, समान अधिकार, समान न्याय और व्यक्तिगत अधिकार दिए गए हैं। संविधान का एक-एक शब्द और एक-एक विचार हमारे जीवन का मार्गदर्शन करता है तथा कार्य पद्धति को दिशा देता है।

 

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि हरियाणा विधानसभा ने भी संविधान के मार्गदर्शन में 60 वर्षों के दौरान अपने सदस्यों के मत, विचार और दृष्टिकोण के साथ प्रदेश के विकास में योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा में भी हरियाणा का जवान आगे रहता है। किसानों ने नई तकनीक को अपनाने में भी अग्रणी भूमिका निभाई है और हर क्षेत्र में हरियाणा ने गौरव बढ़ाया है।

 

उन्होंने कहा कि हरियाणा विधानसभा के सदस्यों के विचारों और दृष्टिकोण में भिन्नता हो सकती है, लेकिन साझे प्रयासों से प्रदेश और देश को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता हमेशा रही है। उन्होंने कहा कि हरियाणा का देश की अर्थव्यवस्था तथा सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान में बड़ा योगदान है। राज्य विधानसभा ने समय-समय पर स्वस्थ परंपरा, उच्च कोटि की बहस, संवाद और तर्क के माध्यम से अपनी गरिमा बढ़ाई है।

 

श्री ओम बिरला ने कहा कि लोकतंत्र में सभी के दृष्टिकोण, विचार और मत आते हैं तथा साझे प्रयासों से ही प्रदेश और देश आगे बढ़ता है। इसलिए लोकतांत्रिक संस्थाओं में अच्छी परंपराओं को अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विधायिका की जिम्मेदारी कानून और नीतियां बनाने तथा लोगों की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को पहुंचाने की है। कार्यपालिका का काम बनाए गए कानूनों को निष्पक्ष रूप से लागू करना है, जबकि न्यायपालिका का काम सभी को सरलता से न्याय दिलाना है।

 

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संविधान की एक-एक धारा और अनुच्छेद दिशा प्रदान करते हैं। संसदीय लोकतंत्र में सहमति, असहमति तथा विचारों की भिन्नता हो सकती है, लेकिन साझे प्रयासों से देश और प्रदेश को आगे बढ़ाना विधानसभा के सदस्य के रूप में सभी की जिम्मेदारी है।

 

उन्होंने सभी वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों का उनके योगदान के लिए धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि चाहे कोई आज विधानसभा का सदस्य नहीं है, लेकिन वह आज भी सेवा का पुण्य कार्य कर रहा है। अंतिम व्यक्ति की जिंदगी में परिवर्तन लाना और उसके सामाजिक-आर्थिक जीवन में बदलाव लाना सभी की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सामाजिक और राजनीतिक जीवन में थकान या निराशा के बजाय समाज के अंतिम व्यक्ति के चेहरे पर खुशी लाने का प्रयास निरंतर जारी रहना चाहिए। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों का अभिवादन करते हुए कहा कि उनके योगदान को हरियाणा की जनता हमेशा याद रखेगी।

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*विकसित हरियाणा के निर्माण में जनभागीदारी और जागरूक समाज की भूमिका अहम : हरविंद्र कल्याण*

 

*संविधान पखवाड़े के माध्यम से नागरिकों को संवैधानिक मूल्यों और विधायिका की कार्यप्रणाली के प्रति किया जाएगा जागरूक*

 

*लोकसभा के सहयोग और अध्यक्ष ओम बिरला के मार्गदर्शन से हरियाणा विधानसभा में शुरू हुईं विधायिका को सशक्त बनाने की अनेक गतिविधियां*

 

चंडीगढ़,2 नवंबर-हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष श्री हरविंद्र कल्याण ने कहा कि पूर्ण रूप से विकसित हरियाणा का निर्माण तभी संभव है, जब इसमें समाज की सक्रिय भागीदारी हो और एक जागरूक समाज तैयार किया जाए। जनप्रतिनिधि समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लोग उनकी बात सुनते हैं और उनके आचरण का अनुसरण करते हैं। इसलिए प्रत्येक जनप्रतिनिधि को समाज के लिए रोल मॉडल बनकर संवैधानिक मूल्यों और जनभागीदारी को मजबूत करने का संकल्प लेना चाहिए।

 

श्री हरविंद्र कल्याण सोमवार को पंचकूला के इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में हरियाणा विधानसभा द्वारा संविधान पखवाड़े के तहत आयोजित जनप्रतिनिधि सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज का दिन हरियाणा के इतिहास में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि प्रदेश के वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधि एक स्थान पर एकत्र हुए हैं। यह सम्मेलन हरियाणा के 60 वर्षों के सफर को याद करने के साथ-साथ भविष्य के विकसित हरियाणा के निर्माण में अपनी भूमिका तय करने का अवसर है। इस मौके पर लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला, हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, नेता प्रतिपक्ष श्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, विधानसभा के उपाध्यक्ष डॉ कृष्ण मिड्ढा, संसदीय कार्य मंत्री श्री महिपाल ढांडा सहित मंत्रीगण, विधायक गण उपस्थित थे। लोकसभा अध्यक्ष ने दीप प्रज्जवलित कर जनप्रतिनिधि सम्मेलन का उद्घाटन किया।

 

विधानसभा अध्यक्ष श्री हरविंद्र कल्याण ने मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला का स्वागत करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में देश के सभी राज्यों के विधानमंडलों और विधायिकाओं को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। विभिन्न विधानसभाओं के बीच अच्छी कार्यप्रणालियों और नवाचारों को साझा करने से सभी को प्रेरणा और मार्गदर्शन मिलता है। उन्होंने कहा कि श्री ओम बिरला के मार्गदर्शन और लोकसभा के सहयोग से हरियाणा विधानसभा में भी विधायिका को सशक्त बनाने के लिए अनेक गतिविधियां शुरू की गई हैं।

 

श्री हरविंद्र कल्याण ने मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी का भी आभार व्यक्त किया और कहा कि हरियाणा विधानसभा की गतिविधियों तथा कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री का निरंतर सहयोग मिलता है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष श्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, संसदीय कार्य मंत्री श्री महिपाल ढांडा, विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ. कृष्ण लाल मिड्डा, मंत्रियों, वर्तमान एवं पूर्व विधायकों तथा सभी अतिथियों का स्वागत किया।

 

उन्होंने कहा कि वर्ष 1966 में जब हरियाणा अलग राज्य बना, तब प्रदेश के सामने सीमित संसाधनों की चुनौती थी। उस समय लोगों के मन में यह सवाल था कि प्रदेश किस तरह आगे बढ़ेगा। लेकिन बुजुर्गों के परिश्रम, किसानों, मजदूरों, उद्यमियों की मेहनत और समय-समय पर मिले कुशल नेतृत्व के कारण आज हरियाणा ने देश के मानचित्र पर अपनी विशेष पहचान बनाई है। प्रदेश के खिलाड़ियों और वीर जवानों ने भी अपने पुरुषार्थ और साहस से हरियाणा का गौरव बढ़ाया है।

 

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों ने अपने अनुभव, संघर्ष और परिश्रम से प्रदेश की तरक्की में योगदान दिया है। उन्होंने विधानसभा में चर्चा के माध्यम से लोगों की समस्याएं उठाईं, नीतियां बनाने और कानून निर्माण में भूमिका निभाई तथा कठिन परिस्थितियों में समाज को दिशा देने का काम किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि सम्मेलन के आगामी सत्रों में वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों के अनुभव से नए और युवा विधायकों को मार्गदर्शन मिलेगा।

 

श्री कल्याण ने कहा कि लोकसभा के सहयोग से हरियाणा विधानसभा में संसदीय प्रणाली, विधायिका और संवैधानिक मूल्यों के प्रति आमजन की रुचि और जागरूकता बढ़ाने के लिए सम्मेलन आयोजित किए गए हैं। जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रशिक्षण कार्यशालाएं भी आयोजित की गई हैं। इन प्रयासों में लोकसभा का महत्वपूर्ण सहयोग मिला है। उन्होंने इसके लिए लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला का विशेष आभार व्यक्त किया।

 

उन्होंने बताया कि संविधान पखवाड़े के दौरान विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से आमजन को जागरूक करने के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों की भूमिका और जनभागीदारी बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा की जाएगी। इसके तहत युवा संसद का आयोजन होगा और संविधान दिवस पर हरियाणा विधानसभा का विशेष सत्र भी आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा महिलाओं तथा पंचायतों और स्थानीय निकायों के जनप्रतिनिधियों के लिए भी सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।

 

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि आज का जनप्रतिनिधि सम्मेलन सभी के लिए सामूहिक संकल्प लेने का अवसर है। अतीत से सीख लेकर और अपने अनुभव के आधार पर सभी को विकसित हरियाणा के निर्माण के लिए मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज की भागीदारी और जागरूकता के बिना पूर्ण विकास की कल्पना संभव नहीं है। प्रत्येक जनप्रतिनिधि को अपने क्षेत्र में लोगों को जागरूक करने और उन्हें विकास की प्रक्रिया से जोड़ने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

 

*सभी को वोट का अधिकार संविधान की महत्वपूर्ण देन: भूपेंद्र सिंह हुड्डा*

 

इस अवसर पर हरियाणा विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सम्मेलन के आयोजन के लिए विधानसभा अध्यक्ष श्री हरविन्द्र कल्याण का आभार व्यक्त किया और लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला का स्वागत करते हुए कहा कि इस आयोजन ने सभी जनप्रतिनिधियों को अपने विचार रखने और एक-दूसरे की बात सुनने का अवसर दिया है।

 

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि संविधान बनने से पहले देश में प्रत्येक व्यक्ति को वोट देने का अधिकार नहीं था। उस समय मतदान का अधिकार आय, जमीन की मिल्कियत और शिक्षा जैसी निर्धारित योग्यताओं पर आधारित था। आजादी के बाद संविधान ने सभी नागरिकों को समान मताधिकार दिया। आज हर व्यक्ति को, चाहे वह गरीब हो या अमीर, एक समान वोट देने का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि यह संविधान की महत्वपूर्ण देन है।

 

उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि केवल विधायक या सांसद ही नहीं होते, बल्कि पंच और सरपंच से लेकर संसद तक सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। जनप्रतिनिधि के काम की तीन कसौटियां हैं—जनता की बात सुनना, उसकी बात का जवाब देना और जवाबदेही निभाना। जनता की अपेक्षाओं को समझकर ऐसे कानून और नीतियां बनाने चाहिए, जिनसे लोग संतुष्ट हों और उनकी समस्याओं का समाधान हो।

 

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में पक्ष और विपक्ष की विचारधारा अलग हो सकती है, लेकिन दोनों का लक्ष्य एक ही होना चाहिए कि जनता का हित और प्रदेश की प्रगति।

 

इसके बाद कार्यक्रम को पूर्व मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा, पूर्व मंत्री अशोक कुमार अरोड़ा, पूर्व मंत्री श्री ओमप्रकाश धनखड़, पूर्व विस अध्यक्ष कुलदीप शर्मा, पूर्व विस अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री कंवर पाल, पूर्व मंत्री गीता भुक्कल, पूर्व उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, विधायक सावित्री जिंदल, पूर्व मंत्री प्रो. संपत सिंह, पूर्व विस उपाध्यक्ष संतोष यादव, पूर्व मंत्री किरण चौधरी, पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल, पूर्व विधायक लहरी सिंह, पूर्व विधायक कैलाश चंद्र शर्मा, मुख्य सचेतक रामकुमार कश्यप, पूर्व मंत्री प्रो. छत्तर पाल, पूर्व विस अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता, डॉ. शिवशंकर भारद्वाज, पूर्व मंत्री सुभाष कत्याल आदि ने भी संबोधित किया।

 

क्रमांक-2026

 

 

 

 

 

 

 

*शहीद स्मारक के 5 नवंबर को उद्घाटन को लेकर ऊर्जा मंत्री अनिल विज की अध्यक्षता में अधिकारियों की बैठक हुई*

 

*बैठक में सूचना, जनसंपर्क विभाग के आयुक्त एवं सचिव के मकरंद पांडुरंग सहित अन्य अधिकारी भी शामिल हुए*

 

*केंद्रीय मंत्री अमित शाह की रैली की तैयारियों को लेकर ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने गांधी ग्राउंड का दौरा किया*

 

 

चण्डीगढ, 2 नवंबर - अंबाला छावनी में 1857 में आजादी की पहली लड़ाई को समर्पित शहीद स्मारक के 5 नवम्बर को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह द्वारा उद्घाटन को लेकर अम्बाला जिला प्रशासन द्वारा तैयारियां की जा रही हैं।

 

इसी कड़ी में आज हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री श्री अनिल विज की अध्यक्षता में शहीद स्मारक में बैठक हुई जिसमें सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग, हरियाणा के आयुक्त एवं सचिव  के. मकरंद पांडुरंग के अलावा विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान अधिकारियों ने शहीदी स्मारक का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

 

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बैठक के दौरान कार्यक्रम की तैयारियों की जानकारी व अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कार्यक्रम को लेकर अधिकारियों से चर्चा की। इससे पहले आयुक्त एवं सचिव के मकरंद पांडुरंग ने शहीदी स्मारक के उद्घाटन से संबंधित कार्यक्रम की तैयारियों एवं विभिन्न व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

 

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि 5 नवंबर को होने वाले कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते पूरी की जाएं, ताकि कार्यक्रम के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को आपसी तालमेल के साथ कार्य करने तथा उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारियों को गंभीरता एवं समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश भी दिए।

 

*केंद्रीय मंत्री अमित शाह की रैली की तैयारियों को लेकर ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने गांधी ग्राउंड का दौरा किया*

 

हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री श्री अनिल विज ने आज प्रातः अम्बाला छावनी के गांधी ग्राउंड का दौरा कर आगामी 5 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर की जा रही तैयारियों का जायजा लिया। इस अवसर पर उपायुक्त सचिन गुप्ता भी मौजूद रहे।

 

निरीक्षण के दौरान ऊर्जा मंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर बनाए जा रहे मुख्य मंच, बैठने की व्यवस्था, कलाकारों के लिए मंच, मीडिया गैलरी तथा पार्किंग व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण किया। इसके साथ ही उन्होंने कार्यक्रम में आने वाले लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बिजली, पेयजल तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की जानकारी ली और संबंधित अधिकारियों को सभी तैयारियां समय रहते पूरी करने के निर्देश दिए।

 

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि 5 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह अम्बाला छावनी में निर्मित आजादी की पहली लड़ाई के शहीद स्मारक-1857 का लोकार्पण करेंगे और गांधी ग्राउंड में एक विशाल जनसभा को सम्बोंधित करेगें। उन्होंने कहा कि यह शहीद स्मारक 1857 की क्रांति के वीर शहीदों और गुमनाम क्रांतिकारियों के बलिदान को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने बताया कि लगभग 22 एकड़ में फैले इस स्मारक में 1857 की क्रांति से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रमों को 22 गैलरियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। स्मारक में लगभग 700 शहीदों के नाम सुनहरे अक्षरों में अंकित किए जा रहे हैं, ताकि आने वाली पीढिय़ां देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले वीरों के योगदान और बलिदान से परिचित हो सकें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनसभा में आने वाले लोगों की सुविधा, सुरक्षा और सुचारू आवागमन को प्राथमिकता देते हुए सभी व्यवस्थाएं बेहतर ढंग से सुनिश्चित की जाएं।

 

इस मौके पर उपायुक्त सचिन गुप्ता, सीईओ जिला परिषद् गगनदीप सिंह, एडीपीआर मनीष लौहान, शहीद स्मारक के निदेशक डॉ कुलदीप सैनी, एसडीएम नारायणगढ़ शिवजीत भारती, संयुक्त निदेशक नीरज कुमार, अधीक्षक अभियन्ता भूपेन्द्र, कार्यकारी अभियन्ता रितेश अग्रवाल, कार्यकारी अभियन्ता नवीन राठी के साथ-साथ सम्बधिंत विभागों के अधिकारीगण व एजेन्सी के प्रतिनिधि मौजूद रहें।

क्रमांक-2026

 

 

 

 

 

 

 

*संविधान की भावना सदन से गांव और समाज के हर वर्ग तक पहुंचे : संसदीय कार्य मंत्री महिपाल ढांडा*

 

चंडीगढ़,2 नवंबर- हरियाणा के संसदीय कार्य मंत्री श्री महिपाल ढांडा ने कहा कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि हमारे लोकतंत्र की आत्मा और देश की एकता का आधार है। यह नागरिकों को अधिकारों के साथ-साथ उनके कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक करता है। संविधान की भावना केवल सदन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे गांवों, विद्यालयों, महाविद्यालयों और समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

 

वे सोमवार को पंचकूला के इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में हरियाणा विधानसभा द्वारा आयोजित संविधान पखवाड़े के तहत जनप्रतिनिधि सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला, मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, नेता प्रतिपक्ष चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा, विधानसभा अध्यक्ष श्री हरविंद्र कल्याण, उपाध्यक्ष श्री कृष्ण मिड्ढा, मंत्रियों, विधायकों, पूर्व विधायकों और अधिकारियों का अभिनंदन किया।

 

संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने भारतीय संविधान को अंगीकृत किया और 26 जनवरी 1950 को यह लागू हुआ। संविधान निर्माताओं और संविधान सभा के सदस्यों ने ऐसे भारत की कल्पना की थी, जहां प्रत्येक नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व का अधिकार मिले तथा सभी को सम्मान और समान अवसर प्राप्त हों।

 

उन्होंने कहा कि हरियाणा विधानसभा लोकतांत्रिक मूल्यों और जन आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण मंच है। संसदीय कार्य मंत्री के रूप में उनका मानना है कि सदन की गरिमा बनाए रखना, संसदीय मर्यादाओं का पालन करना और जनहित के विषयों पर स्वस्थ चर्चा व सार्थक संवाद करना ही लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति है।

 

उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की अपनी-अपनी महत्वपूर्ण भूमिका है। सदस्यों के विचार और मत अलग हो सकते हैं, लेकिन जनहित और प्रदेश का विकास सभी का साझा उद्देश्य होना चाहिए। सदन में सहमति-असहमति हो सकती है, लेकिन आपसी मतभेद नहीं होने चाहिए।

 

संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि संविधान पखवाड़े के अवसर पर सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि संविधान के आदर्शों, लोकतांत्रिक परंपराओं और संसदीय गरिमा को सर्वोपरि रखेंगे। जनसेवा, पारदर्शिता और जवाबदेही के माध्यम से हरियाणा को विकास और सुशासन की नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सभी मिलकर योगदान देंगे।

 

उन्होंने अपने संबोधन के अंत में कहा कि संविधान हमारा गौरव है, लोकतंत्र हमारी शक्ति है और जनसेवा हमारा सर्वोच्च कर्तव्य है। इसी भावना के साथ उन्होंने सभी को संविधान पखवाड़े की शुभकामनाएं दीं।

 

क्रमांक-2026

 

 

 

 

 

 

 

*राज्य स्तरीय नगाड़ा (बनचारी) प्रतियोगिता में जितेंद्र ने प्राप्त किया प्रथम पुरस्कार*

 

चण्डीगढ़, 2 नवंबर - हरियाणा कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा 16 अक्तूबर, 2026 को मल्टी आर्ट सेंटर, कुरुक्षेत्र में राज्य स्तरीय नगाड़ा (बनचारी) प्रतियोगिता में प्रदेश के विभिन्न कलाकारों एवं दलों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

 

विभाग के प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल द्वारा कलाकारों की प्रस्तुतियों का मूल्यांकन करने उपरांत चयनित विजेताओं में जितेंद्र एवं दल ने प्रथम पुरस्कार, जबकि सुनील एवं दल ने द्वितीय तथा चंदर सिंह एवं दल ने तृतीय पुरस्कार हासिल किया। इसके अतिरिक्त, लेखराम एवं दल, नानक चंद एव दल, धर्मवीर एवं दल, वेद प्रकाश एवं दल तथा विरेन्द्र एवं दल को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।

 

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य हरियाणा की समृद्ध लोक-संगीत परंपरा, विशेषकर नगाड़ा (बनचारी) लोकवाद्य कला को संरक्षण एवं प्रोत्साहन देना तथा लोक कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए मंच उपलब्ध करवाना है।

इस प्रकार के आयोजनों से पारंपरिक लोककलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करने में सहायता मिलती है।

 

क्रमांक - 2026

 

 

 

 

 

 

 

हरियाणा में कक्षा VI से XII तक के छात्रों के लिए स्कूल-आधारित मानसिक स्वास्थ्य सहायता की योजना

 

परीक्षा के तनाव, बुलिंग, अवसाद और डिजिटल लत से निपटने के लिए साथ (SAATH) प्रोजेक्ट बनाया

 

200 सरकारी स्कूलों के 400 प्रशिक्षित शिक्षकों के साथ समन्वय करेंगे स्वास्थ्य विभाग के 122 परामर्शदाता (काउंसलर्स)

 

माता-पिता को भी किया जाएगा जागरूक

 

चंडीगढ़, 2 नवंबर - हरियाणा सरकार अपने प्रस्तावित "साथ" (SAATH) प्रोजेक्ट के तहत कक्षा VI से XII तक के विद्यार्थियों के लिए एक व्यवस्थित स्कूल-आधारित मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली शुरू करने की योजना बना रही है। इसका मुख्य उद्देश्य परीक्षा के तनाव, चिंता (एंजाइटी), अवसाद (डिप्रेशन), बुलिंग, सामाजिक अलगाव और अत्यधिक स्क्रीन उपयोग सहित विभिन्न मनोवैज्ञानिक समस्याओं की समय रहते पहचान करना है।

 

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि इसमें स्वास्थ्य और स्कूल शिक्षा विभाग, शिक्षकों, अभिभावकों, छात्र स्वयंसेवकों, परामर्शदाताओं, नैदानिक मनोवैज्ञानिकों (क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट) और मनोचिकित्सकों (साइकियाट्रिस्ट) को शामिल करते हुए एक समन्वित तंत्र की परिकल्पना की गई है।

 

प्रस्तावित रूपरेखा के तहत पेशेवर सहायता प्रणाली के हिस्से के रूप में स्वास्थ्य विभाग के 122 परामर्शदाताओं को चिह्नित किया गया है। इसमें मनोविज्ञान की योग्यता वाले शिक्षकों और विशिष्ट मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की भागीदारी भी शामिल है, ताकि पेशेवर मदद की आवश्यकता वाले छात्रों को समय पर सहायता मिल सके। विद्यार्थियों की अलग-अलग विकासात्मक और मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, कक्षा VI से VIII और कक्षा IX से XII के छात्रों के लिए अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाए जाएंगे।

 

उन्होंने बताया कि कक्षा VI से VIII के छात्रों के लिए ध्यान मुख्य रूप से भावनात्मक जागरूकता, आत्मविश्वास, किशोरावस्था से जुड़े बदलावों, परीक्षा की चिंता, बुलिंग, साथियों द्वारा उपेक्षा और माता-पिता के साथ बातचीत में आने वाली कठिनाइयों पर केंद्रित होगा। शिक्षकों को शुरुआती लक्षणों—जैसे लगातार उदासी, चिड़चिड़ापन, लोगों से दूरी बनाना, दिनचर्या के कार्यों में रुचि कम होना, एकाग्रता की कमी, शैक्षणिक प्रदर्शन में गिरावट और स्कूल जाने में आनाकानी—की पहचान करने के लिए संवेदनशील बनाया जाएगा। यह कार्यक्रम अत्यधिक गेमिंग, सोशल मीडिया पर निर्भरता, अनुचित ऑनलाइन सामग्री, नींद की कमी और लंबे समय तक स्क्रीन के इस्तेमाल से उत्पन्न होने वाली चिंताओं का भी समाधान करेगा। इसके अतिरिक्त पारिवारिक विवाद, माता-पिता का दबाव, भाई-बहनों के बीच तुलना, किसी प्रियजन का खोना और हिंसा या उपेक्षा का सामना करने जैसे कारकों पर भी ध्यान दिया जाएगा जो बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।

 

डॉ मिश्रा ने बताया कि कक्षा IX से XII के छात्रों के लिए कार्यक्रम में बोर्ड परीक्षा के दबाव, प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं, करियर की अनिश्चितता, विफलता के डर, साथियों के दबाव और मानसिक थकान पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही चिंता, अवसाद से जुड़े लक्षणों, शरीर की बनावट (बॉडी-इमेज) को लेकर चिंता, अस्वास्थ्यकर खान-पान की आदतों, संबंधों में कठिनाइयों और नशीले पदार्थों के सेवन के जोखिमों के बारे में जागरूकता बढ़ाई जाएगी। खुद को नुकसान पहुंचाने और आत्महत्या के विचारों के चेतावनी संकेतों को पहचानने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शिक्षकों और नामित कर्मियों को ऐसी स्थितियों की पहचान करने और उपयुक्त मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के पास तुरंत भेजने (रेफर करने) के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।

 

*माता-पिता और छात्र स्वयंसेवक होंगे शामिल*

 

डॉ सुमिता मिश्रा ने आगे जानकारी दी कि अभिभावक-शिक्षक बैठकें (PTM) मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करेंगी। माता-पिता को बच्चों के व्यवहार, मनःस्थिति (मूड), नींद के पैटर्न, शैक्षणिक प्रदर्शन और सामाजिक व्यवहार में आने वाले बदलावों को पहचानने के बारे में मार्गदर्शन दिया जाएगा। उन्हें बिना कोई डर या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी भ्रांतियां पैदा किए, बच्चों के साथ सहयोगात्मक तरीके से संवाद करने के लिए संवेदनशील बनाया जाएगा। प्रोजेक्ट के तहत भागीदार स्कूलों में 'छात्र स्वास्थ्य राजदूत' (स्टूडेंट हेल्थ एंबेसडर) बनाने का भी प्रस्ताव है। एक वरिष्ठ छात्र स्वास्थ्य राजदूत को 'साथ समन्वयक' (SAATH Coordinator) के रूप में नामित किया जाएगा, जो विद्यार्थियों और नामित स्कूल कर्मियों के बीच जागरूकता गतिविधियों व संचार को सुगम बनाएगा। उनकी भूमिका केवल सहपाठियों के बीच जागरूकता फैलाने और सहयोगात्मक संवाद तक सीमित रहेगी; वे कोई निदान या उपचार नहीं करेंगे।

 

*पहचान और रेफरल के लिए पांच-स्तरीय तंत्र*

 

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि प्रस्तावित रूपरेखा में पांच-स्तरीय सहायता और रेफरल तंत्र की परिकल्पना की गई है, जो कक्षा के स्तर से शुरू होकर आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ मनोचिकित्सकीय देखभाल तक विस्तारित होगा। पहले स्तर पर, कक्षा शिक्षक व्यवहार या भावनात्मक बदलावों का अवलोकन करेंगे, छात्रों के साथ सहानुभूतिपूर्वक बातचीत करेंगे और स्कूल-स्तरीय हस्तक्षेपों का रिकॉर्ड वर्ग-वार 'साथ मूल्यांकन और परामर्श रजिस्टर' में रखेंगे। दूसरे स्तर पर, छात्र स्वास्थ्य राजदूत और साथ समन्वयक सहपाठियों में जागरूकता बढ़ाएंगे और सहायता की आवश्यकता वाले छात्रों को नामित स्कूल कर्मियों तक पहुँचने में मदद करेंगे। तीसरे स्तर पर, स्वास्थ्य विभाग के परामर्शदाता और मनोविज्ञान-योग्य नामित शिक्षक अपनी पेशेवर क्षमताओं के दायरे में परामर्श, स्क्रीनिंग, मूल्यांकन और मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। चौथे स्तर पर, विशेष मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन की आवश्यकता वाले छात्रों को नामित AFLC क्लीनिकों में भेजा जाएगा, जहाँ क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट उनकी ज़रूरतों का आकलन करेंगे और उचित सहायता देंगे। पांचवें स्तर पर, मनोचिकित्सकीय मूल्यांकन या उपचार की आवश्यकता वाले छात्रों को मनोचिकित्सकों द्वारा जांच के लिए मानसिक स्वास्थ्य क्लीनिकों में भेजा जाएगा, जिसके बाद सलाह के अनुसार उपचार और फॉलो-अप किया जाएगा। यह रेफरल व्यवस्था यह सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है कि जिन छात्रों को पेशेवर हस्तक्षेप की आवश्यकता है, उन्हें केवल स्कूल-स्तरीय सहायता पर निर्भर न रखकर निरंतर और विशेषज्ञ देखभाल मिले।

 

*122 परामर्शदाता और 400 शिक्षक संभालेंगे नेटवर्क*

 

उन्होंने बताया कि हरियाणा भर में साथ (SAATH) प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 122 परामर्शदाताओं को प्रशिक्षित किया है। ये परामर्शदाता इस पहल के तहत चिह्नित 200 सरकारी स्कूलों में से प्रत्येक स्कूल के दो नामित शिक्षकों के साथ समन्वय करेंगे, जिससे लगभग 400 प्रशिक्षित शिक्षकों का एक नेटवर्क तैयार होगा। स्कूल शिक्षा विभाग प्रत्येक स्कूल में दो शिक्षकों की पहचान करके, उनका प्रशिक्षण सुनिश्चित करके और स्कूल के माहौल में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता व शुरुआती पहचान को एकीकृत करके इस पहल को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सभी नामित शिक्षकों को मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं, मनोवैज्ञानिक तनाव की शुरुआती पहचान, सहायक संचार और उचित रेफरल तंत्र पर संरचित प्रशिक्षण मिलेगा। इस समन्वित दृष्टिकोण के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य एक वर्ष के भीतर सभी 200 चिह्नित सरकारी स्कूलों के कक्षा IX से XII तक के छात्रों तक पहुँचना है। यह पहल संवेदनशील छात्रों की शुरुआती स्तर पर पहचान करने, समय पर पेशेवर सहायता उपलब्ध कराने और एक मानसिक रूप से स्वस्थ व मजबूत पीढ़ी को बढ़ावा देने में मदद करेगी।

 

*शिक्षकों को मिलेगा संरचित प्रशिक्षण*

 

डॉ मिश्रा ने बताया कि स्कूल कर्मियों का प्रशिक्षण इस परियोजना का एक और प्रमुख घटक होगा। मानसिक स्वास्थ्य विभाग शिक्षकों और परामर्शदाताओं के लिए मानकीकृत और आयु-अनुकूल वीडियो प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करेगा, जिन्हें ECHO प्लेटफॉर्म और यूट्यूब सहित आधिकारिक डिजिटल चैनलों के माध्यम से प्रसारित किया जाएगा। लेवल 1 प्रशिक्षण कक्षा VI से VIII तक को कवर करेगा और इसमें बच्चों के बुनियादी मानसिक स्वास्थ्य, विकासात्मक बदलावों, भावनात्मक कठिनाइयों, शुरुआती चेतावनी संकेतों, सहायक संचार और रेफरल प्रक्रियाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। कक्षा IX से XII को संभालने वाले शिक्षकों के लिए तय लेवल 2 प्रशिक्षण किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य, परीक्षा के तनाव, साथियों के दबाव, नशीले पदार्थों के सेवन की रोकथाम, जटिल व्यवहार संबंधी चिंताओं और उचित रेफरल प्रक्रियाओं को कवर करेगा। इसमें बुनियादी प्रशिक्षण का दोहराव भी शामिल होगा। प्रशिक्षण मॉड्यूल में गोपनीयता, बाल संरक्षण और संवेदनशील संचार पर जोर दिया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मनोवैज्ञानिक कठिनाइयों का सामना कर रहे छात्रों को किसी भी प्रकार के भेदभाव का सामना न करना पड़े।

 

हरियाणा के मानसिक स्वास्थ्य निदेशक, डॉ. ब्रह्म दीप ने कहा कि शुरुआती पहचान और समय पर हस्तक्षेप से बच्चों की मनोवैज्ञानिक कठिनाइयों को गंभीर मानसिक स्थितियों में बदलने से रोका जा सकता है। साथ प्रोजेक्ट के माध्यम से उद्देश्य भावनात्मक रूप से मजबूत छात्र तैयार करना, एक सहायक स्कूल वातावरण का निर्माण करना और यह सुनिश्चित करना है कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा कोई भी बच्चा बिना पहचान के या पेशेवर सहायता के बिना न छूटे। प्रस्तावित साथ प्रोजेक्ट के जरिए हरियाणा एक एकीकृत और टिकाऊ स्कूल मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली स्थापित करने का लक्ष्य रखता है, जो निवारक जागरूकता, शुरुआती पहचान, परामर्श, पेशेवर मूल्यांकन और विशेष उपचार को एक साथ लाती है। यह पहल राज्य सरकार की इस प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि मानसिक स्वास्थ्य सहायता को स्कूल के माहौल का एक अभिन्न हिस्सा बनाया जाए और हर छात्र की सुरक्षित व सहयोगात्मक देखभाल तक पहुँच सुनिश्चित की जाए।

क्रमांक -2026

जंगबीर सिंह

 

 

 

 

 

 

 

 

*हरियाणा की प्रगति और जनता की खुशहाली हमारी साझा मंजिल : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी*

 

*कहा: राजनीतिक विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन हम सभी हरियाणा की जनता के प्रतिनिधि*

 

*विधानसभा की गरिमा, जनसंवाद और संवैधानिक मूल्यों को अपने आचरण में उतारने का किया आह्वान*

 

*संविधान पखवाड़े के तहत आयोजित जनप्रतिनिधि सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को किया संबोधित*

 

चंडीगढ़, 2 नवंबर- मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की राजनीतिक राहें और विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन हरियाणा की प्रगति और प्रदेश के लोगों की खुशहाली सभी की साझा मंजिल है। हम सभी की पहचान इस बात से है कि हम हरियाणा की जनता के प्रतिनिधि हैं। जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे जनता की आकांक्षाओं और आवश्यकताओं को समझते हुए प्रदेश के विकास में अपना योगदान दें।

 

मुख्यमंत्री सोमवार को पंचकूला के इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में हरियाणा विधानसभा द्वारा संविधान पखवाड़े के तहत आयोजित जनप्रतिनिधि सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हरियाणा ने अपनी स्थापना के 60 वर्ष पूरे कर लिए हैं। हीरक जयंती के इस अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेकर भविष्य की दिशा तय करने का अवसर है। सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला की उपस्थिति से इसकी गरिमा बढ़ी है और संसदीय प्रक्रियाओं, सदन की मर्यादा तथा जनप्रतिनिधियों के दायित्वों पर उनका मार्गदर्शन सभी के लिए मूल्यवान है। उन्होंने कहा कि हीरक जयंती समारोह में देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु ने पधार कर हरियाणा की जनता को अपना आर्शीवाद दिया।

 

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा की 60 वर्षों की विकास यात्रा केवल सड़कों, संस्थानों और उद्योगों के विस्तार की कहानी नहीं है, बल्कि इसमें किसानों, श्रमिकों, महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों की मेहनत भी शामिल है। खेतों की हरियाली से उद्योगों की ऊंचाइयों तक, गांवों की पगडंडियों से आधुनिक एक्सप्रेस-वे तक और अखाड़ों की मिट्टी से विश्व के खेल मंचों तक हरियाणा ने अपने परिश्रम, साहस और संकल्प से प्रगति के नए अध्याय लिखे हैं। प्रदेश की उपलब्धियों की नींव उन चर्चाओं, निर्णयों और कानूनों से भी पड़ी है, जिन्हें जनप्रतिनिधियों ने विधानसभा में आकार दिया।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 नवंबर, 1966 को हरियाणा अस्तित्व में आया था और उस समय विधानसभा में 54 सदस्य थे। वर्ष 1967 में विधानसभा सीटों की संख्या 81 हुई और वर्ष 1977 में बढ़कर 90 हो गई। उन्होंने कहा कि इन सीटों में आज बढ़ोतरी की आवश्यकता है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी हो सके और आम जनता को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं सुलभ हो सके।

 

उन्होंने कहा कि आज प्रदेश 15वीं विधानसभा के दौर में अपनी लोकतांत्रिक यात्रा को आगे बढ़ा रहा है। ये आंकड़े प्रतिनिधित्व के विस्तार और जनता की आकांक्षाओं के बढ़ते दायरे को दर्शाते हैं। उन्होंने बताया कि 6 दिसंबर, 1966 को हरियाणा विधानसभा की पहली बैठक हुई थी। उस समय संसाधन सीमित थे और शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सिंचाई, बिजली, सड़क तथा प्रशासनिक व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना बड़ी चुनौती थी। उन्होंने उन सभी जनप्रतिनिधियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की, जिन्होंने इन परिस्थितियों में प्रदेश के भविष्य की मजबूत नींव रखने का प्रयास किया।

 

उन्होंने कहा कि संविधान का सम्मान हमारे निर्णयों और आचरण में दिखाई देना चाहिए। संविधान की प्रस्तावना में न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता के आदर्श निहित हैं। जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि इन आदर्शों को शासन के व्यवहार में उतारें। जब पात्र नागरिक को बिना भेदभाव उसका अधिकार मिलता है, कमजोर व्यक्ति की सुनवाई होती है और समाज में परस्पर सम्मान बढ़ता है, तभी इन संवैधानिक मूल्यों को मजबूती मिलती है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा कानून बनाने, सार्वजनिक धन के उपयोग को स्वीकृति देने और सरकार को जवाबदेह बनाने का महत्वपूर्ण मंच है। सदन में उठाया गया सार्थक प्रश्न किसी गांव की समस्या को समाधान तक पहुंचा सकता है और किसी विधेयक पर दिया गया उपयोगी सुझाव लाखों नागरिकों का जीवन बेहतर बना सकता है। प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण, बजट चर्चा और समितियों का कार्य संसदीय व्यवस्था को जीवंत बनाते हैं। इन प्रक्रियाओं का प्रभावी उपयोग करने के लिए अध्ययन, तैयारी और जनता से निरंतर संपर्क आवश्यक है।

 

उन्होंने कहा कि जवाबदेही शासन को मजबूत बनाती है। विपक्ष द्वारा उठाई गई जनहित की बात को गंभीरता से सुनना लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है। इसी प्रकार आलोचना के साथ व्यावहारिक सुझाव देना भी सार्वजनिक जीवन की बड़ी सेवा है। सदन में तीखी बहस हो सकती है, लेकिन भाषा की गरिमा बनी रहनी चाहिए। जनप्रतिनिधियों को तर्कों से एक-दूसरे के विचारों को चुनौती देनी चाहिए और अपने आचरण से लोकतंत्र तथा संविधान के प्रति जनता का विश्वास बढ़ाना चाहिए।

 

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आज डिजिटल माध्यमों से नागरिक जनप्रतिनिधियों के शब्दों और व्यवहार को तुरंत देखते हैं। विशेष रूप से युवा पीढ़ी उनसे सीखती है कि सार्वजनिक जीवन में असहमति कैसे व्यक्त की जाती है। इसलिए तथ्यों की पुष्टि करना, व्यक्तिगत आक्षेप से बचना और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जिम्मेदार भाषा अपनाना आवश्यक है। चुनाव समाप्त होने के बाद जनप्रतिनिधि अपने पूरे क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान पखवाड़े की सार्थकता तभी बढ़ेगी, जब इसकी चर्चा सभागारों से निकलकर गांवों, विद्यालयों और बस्तियों तक पहुंचेगी। नागरिकों को सरल भाषा में विधानसभा की कार्यप्रणाली, कानून बनने की प्रक्रिया, बजट की प्राथमिकताओं और जनसमस्याओं को उठाने के तरीकों की जानकारी दी जानी चाहिए। लोगों को अपने अधिकारों के साथ मौलिक कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक करना होगा। सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा, महिलाओं का सम्मान, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सद्भाव दैनिक जीवन का हिस्सा बनना चाहिए।

 

उन्होंने वर्तमान और पूर्व विधायकों से आग्रह किया कि वे अपने क्षेत्रों में युवाओं के साथ संविधान संवाद आयोजित करें। विद्यालयों और महाविद्यालयों में युवा संसद, संविधान की प्रस्तावना का वाचन तथा स्थानीय समस्याओं पर विचार-विमर्श जैसे प्रयास किए जाने चाहिए। इससे विद्यार्थियों को विधानसभा की कार्यप्रणाली और संविधान में निहित मूल्यों को समझने का अवसर मिलेगा तथा लोकतंत्र के प्रति उनका विश्वास बढ़ेगा।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित हरियाणा के निर्माण में जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है। किसी क्षेत्र की आवश्यकताओं को वहां रहने वाले लोग सबसे अच्छी तरह समझते हैं। इसलिए विकास की प्राथमिकताएं तय करते समय महिलाओं, किसानों, श्रमिकों, युवाओं, उद्यमियों और वंचित वर्गों की आवाज सुनी जानी चाहिए। जनप्रतिनिधि सरकार और समाज के बीच संवाद का सशक्त माध्यम बनें। जब योजना बनाने में नागरिक सहभागी होता है, तो उसके क्रियान्वयन और सार्वजनिक संसाधनों की रक्षा के प्रति उसका जुड़ाव भी बढ़ता है।

 

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 के विकसित भारत में हरियाणा की भूमिका अभी से तैयार करनी होगी। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल, रोजगार, आधुनिक कृषि और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को आगे बढ़ाने के साथ जल संरक्षण, स्वच्छ पर्यावरण और संतुलित शहरी विकास पर गंभीरता से काम करना होगा। नई तकनीक के अवसर प्रत्येक वर्ग तक पहुंचने चाहिए और विकास का लाभ गांव तथा शहर दोनों को मिलना चाहिए। समृद्धि के साथ सामाजिक विश्वास और नागरिक गरिमा भी बढ़नी चाहिए।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी विरासत ऐसा हरियाणा होना चाहिए, जहां सभी के लिए अवसर हों, प्रत्येक नागरिक को सम्मान मिले और लोकतंत्र में जनता का विश्वास निरंतर मजबूत हो। आने वाली पीढ़ियां हमसे पूछेंगी कि जब हमारे पास निर्णय लेने का अवसर था, तब हमने उनके लिए क्या किया। इसका जवाब हमारे काम में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से संकल्प लेने का आह्वान किया कि वे सदन की गरिमा बढ़ाएंगे, जनसंवाद मजबूत करेंगे और संवैधानिक मूल्यों को अपने आचरण में उतारेंगे।

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