दिल्ली-NCR के लोगों के लिए राहत की खबर है। वायु गुणवत्ता में आंशिक सुधार को देखते हुए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के चरण-4 की सख्त पाबंदियों को हटा लिया गया है। हालांकि, प्रशासन ने साफ किया है कि यह पूरी छूट नहीं है। प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए GRAP-1, GRAP-2 और GRAP-3 के तहत कई कड़े नियम अभी भी लागू रहेंगे।
पिछले कुछ दिनों में हवा की गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘अत्यंत गंभीर’ श्रेणी से नीचे आया है। मौसम में बदलाव, हल्की हवाओं और बेहतर वेंटिलेशन के चलते प्रदूषकों का स्तर कुछ हद तक कम हुआ, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। GRAP-4 हटने से निर्माण गतिविधियों, उद्योगों और परिवहन से जुड़ी कई पाबंदियों में राहत मिली है, जिससे सामान्य जनजीवन और आर्थिक गतिविधियों को सहारा मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि प्रदूषण का खतरा अभी टला नहीं है। डीज़ल जनरेटर के इस्तेमाल पर कड़ी निगरानी, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, सड़कों की नियमित सफाई, पानी का छिड़काव और कचरा जलाने पर सख्त कार्रवाई जैसे नियम पहले की तरह लागू रहेंगे। स्कूलों, अस्पतालों और संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जनवरी के आखिरी सप्ताह में मौसम फिर पलट सकता है। तापमान में गिरावट और हवा की रफ्तार कम होने पर प्रदूषण बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी वजह से प्रशासन ने स्थिति पर रोज़ाना निगरानी रखने और जरूरत पड़ने पर तुरंत पाबंदियां फिर से लागू करने की बात कही है।
नागरिकों से भी सहयोग की अपील की गई है—निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग, कार-पूलिंग, कचरा न जलाना और ऊर्जा-सक्षम विकल्प अपनाने पर जोर दिया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि GRAP-4 हटना राहत जरूर है, लेकिन यह अस्थायी है। स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालिक नीतियां, स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेज़ संक्रमण और नागरिक भागीदारी बेहद जरूरी है।
कुल मिलाकर, दिल्ली-NCR को फिलहाल सांस लेने की थोड़ी राहत मिली है, लेकिन प्रदूषण से जंग अभी खत्म नहीं हुई। सतर्कता और सख्ती दोनों ही इस दौर की जरूरत बने रहेंगे।