भूपिंद् शर्मा, चंंडीगढ़ः अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के इतिहास में 2 सितंबर 2026 का दिन एक नए अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। ट्रस्ट ने सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ नियुक्त करने का फैसला किया। मणिराम दास छावनी में महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में हुई ट्रस्ट की बैठक में यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया, जिसमें ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी और आमंत्रित सदस्य शामिल हुए।
यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब मंदिर प्रबंधन एक कठिन दौर से गुजर रहा था। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने मंदिर में दान की व्यापक हेराफेरी के आरोपों के बीच अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था, और इस मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी थी। ऐसे संवेदनशील समय में एक पेशेवर और अनुशासित प्रशासक की जरूरत महसूस की जा रही थी, और ट्रस्ट ने इसके लिए एक व्यवस्थित प्रक्रिया अपनाई। छह जुलाई को एक खोज समिति बनाई गई, जिसने अगस्त में अयोध्या के ग्रीन हाउस में सोलह अंतिम उम्मीदवारों से आमने-सामने बातचीत की। कुल मिलाकर पचपन सौ पचासी से अधिक आवेदन आए थे, जिनमें से समिति ने एक सितंबर को अपनी पचहत्तर पन्नों की रिपोर्ट सौंपते हुए तीन नामों का पैनल ट्रस्ट को सुझाया। इस पैनल में पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडे और पूर्व आईएएस अधिकारी दिनेश चंद्र के साथ-साथ एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का नाम भी शामिल था, और अंततः ट्रस्ट ने मिश्रा के अनुभव और नेतृत्व क्षमता पर भरोसा जताया।
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का परिचय किसी परिचय का मोहताज नहीं है। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे मिश्रा के पिता एक प्राध्यापक थे। दिसंबर 1986 में भारतीय वायुसेना में लड़ाकू पायलट के रूप में कमीशन प्राप्त करने वाले मिश्रा ने अड़तीस वर्षों की अपनी लंबी सेवा में कई महत्वपूर्ण पद संभाले। वे एक फाइटर कॉम्बैट लीडर और अनुभवी टेस्ट पायलट रहे हैं, जिनके नाम तीन हजार घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव दर्ज है। उन्होंने विमान एवं प्रणाली परीक्षण प्रतिष्ठान में मुख्य परीक्षण पायलट, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड में मुख्य परीक्षण पायलट, तथा दो अग्रिम मोर्चे के वायु अड्डों के वायु अधिकारी कमांडिंग जैसे दायित्व निभाए। जनवरी 2025 में उन्होंने पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला और अप्रैल 2026 में सेवानिवृत्त होने तक इस पद पर बने रहे।
मिश्रा की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि यह रही कि उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व किया, जिसके लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक से सम्मानित किया गया। यह पदक युद्धकालीन विशिष्ट सेवा के लिए दिया जाने वाला देश का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है, और छियालीस वर्षों के इतिहास में यह अब तक केवल दस बार ही प्रदान किया गया है। इसके अतिरिक्त उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक और विशिष्ट सेवा पदक से भी नवाजा जा चुका है। नेशनल डिफेंस एकेडमी और एयर फोर्स एकेडमी से प्रशिक्षित मिश्रा अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज तथा ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज के भी पूर्व छात्र रहे हैं।
अब सवाल यह उठता है कि एक वायुसेना अधिकारी को मंदिर प्रबंधन जैसी नागरिक और आध्यात्मिक जिम्मेदारी के लिए क्यों चुना गया? इसका उत्तर उनके अनुभव की प्रकृति में छिपा है। मिश्रा का पूरा करियर अनुशासन, बड़े पैमाने पर संसाधनों के प्रबंधन, सुरक्षा नियोजन और जटिल संगठनात्मक ढांचों को संभालने के इर्द-गिर्द रहा है। राम मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल भर नहीं रह गया, बल्कि प्रतिदिन लाखों श्रद्धालुओं के आगमन, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और निरंतर होते बुनियादी ढांचे के विस्तार वाला एक विशाल संस्थान बन चुका है। ऐसे में एक ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता थी जो सैन्य अनुशासन के साथ-साथ बड़े पैमाने की प्रशासनिक चुनौतियों को भी दक्षता से संभाल सके, और मिश्रा का अनुभव इस कसौटी पर स्वाभाविक रूप से खरा उतरता दिखता है।
इस नियुक्ति का एक और सकारात्मक पहलू यह है कि ट्रस्ट ने विवाद के दौर से गुजरने के बावजूद एक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया अपनाई। हजारों आवेदनों में से गहन साक्षात्कार और मूल्यांकन के बाद योग्यतम व्यक्ति का चुनाव यह संकेत देता है कि ट्रस्ट अब मंदिर प्रबंधन को एक पेशेवर संस्थागत ढांचे में ढालने की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ रहा है। सीईओ पद का सृजन स्वयं इस बात का प्रमाण है कि प्रशासनिक जवाबदेही और व्यवस्थित कामकाज को प्राथमिकता दी जा रही है।
साथ ही ट्रस्ट ने इसी बैठक में तीन नए सदस्यों की नियुक्ति भी की, जिनमें अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडे, दिल्ली के महेश भगचंडका और अयोध्या की निर्मला यादव शामिल हैं। यह विस्तार दर्शाता है कि ट्रस्ट अपने प्रबंधन ढांचे को व्यापक और विविध बनाने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
कुल मिलाकर, एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को राम मंदिर के प्रशासनिक भविष्य के लिए एक सकारात्मक और दूरदर्शी कदम के रूप में देखा जा सकता है। एक अनुशासित सैन्य पृष्ठभूमि, वैश्विक स्तर की प्रशिक्षण संस्थाओं का अनुभव और युद्धकाल में सिद्ध नेतृत्व क्षमता के साथ मिश्रा के पास वह सब कुछ है जो अयोध्या जैसे विशाल और संवेदनशील तीर्थ स्थल के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक माना जाता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि वे प्रभु श्रीराम की सेवा में अपने प्रशासनिक कौशल का किस प्रकार उपयोग करते हैं, लेकिन इतना तय है कि यह नियुक्ति ट्रस्ट की गरिमा और व्यवस्था को और अधिक मजबूती प्रदान करने वाली साबित हो सकती है।