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हरियाणा

Latest News from Haryana October 2026

October 11, 2026 06:39 AM

स्थानीय निकायों को छठे राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार ही आवंटित होगी धनराशि

 

हरियाणा मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी: अगले राज्य वित्त आयोग की सिफारिशें प्राप्त होने तक जारी रहेगी व्यवस्था

 

चंडीगढ़, 10 अक्तूबर-मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में वित्त वर्ष 2026-27 से अगले राज्य वित्त आयोग की सिफारिशें प्राप्त होने तक ग्रामीण एवं शहरी स्थानीय निकायों को धनराशि आवंटित करने के लिए छठे राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों को जारी रखने की मंजूरी दी गई।

यह निर्णय इसलिए लिया गया है क्योंकि सातवें राज्य वित्त आयोग से अभी तक राज्य सरकार को रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। ऐसे में, पूर्व में अपनाई गई व्यवस्था के अनुरूप, अगले राज्य वित्त आयोग की सिफारिशें प्राप्त होने तक स्थानीय निकायों को धनराशि छठे राज्य वित्त आयोग की स्वीकृत सिफारिशों के अनुरूप ही वितरित की जाएगी।

 

अनुमोदित व्यवस्था के तहत राज्य के स्वयं के कर राजस्व का वास्तविक आधार पर 7 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय निकायों को आवंटित किया जाएगा। ग्राम पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों को इस धनराशि का वितरण जनसंख्या के लिए 80 प्रतिशत तथा क्षेत्रफल के लिए 20 प्रतिशत वेटेज के आधार पर किया जाएगा। इसके लिए हर वर्ष 31 दिसंबर तक परिवार पहचान पत्र पोर्टल पर उपलब्ध जनसंख्या के आंकड़ों का उपयोग किया जाएगा।

 

जिला परिषदों और पंचायत समितियों के मामले में भी प्रत्येक वर्ष 31 दिसंबर तक परिवार पहचान पत्र पोर्टल पर उपलब्ध जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर धनराशि वितरित की जाएगी। ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के बीच राशि का अंतर-स्तरीय वितरण क्रमशः 75:15:10 के अनुपात में किया जाएगा। अनुमोदित व्यवस्था के अनुसार, स्थानीय निकाय आवंटित धनराशि का अधिकतम 30 प्रतिशत हिस्सा गलियों को पक्का करने पर खर्च कर सकेंगे।

 

इस व्यवस्था में यह भी प्रावधान किया गया है कि शहरी स्थानीय निकायों का वास्तविक राजस्व, पिछले वर्ष के लेखापरीक्षित खातों में दर्शाए गए बजटीय राजस्व का कम से कम 85 प्रतिशत होना चाहिए। इस शर्त का पालन न करने पर संबंधित शहरी स्थानीय निकायों को चालू वर्ष में राज्य वित्त आयोग के अनुदान के तहत अनुशंसित हिस्से में 20 प्रतिशत की कटौती का सामना करना पड़ेगा।

दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना के आय पात्रता मानदंडों में बदलाव

 

हरियाणा सरकार ने परिवार की सालाना आय की सीमा बढ़ाकर 1.80 लाख की

 

चंडीगढ़, 10 अक्टूबर-हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा कैबिनेट की बैठक में दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना में अहम बदलावों को मंजूरी दी गई। इन बदलावों का मकसद योजना का लाभ ज्यादा से ज्यादा पात्र महिलाओं तक पहुँचाना, इसे लागू करने की प्रक्रिया को आसान बनाना और आर्थिक सहायता पहुँचाने के सिस्टम को मजबूत करना है। ये संशोधन 01 नवम्बर, 2026 से प्रभावी होंगे।

 

मंजूर किए गए बदलावों के तहत, योजना के लिए परिवार की सालाना आय की पात्रता सीमा 1 लाख से बढ़ाकर 1.80 लाख रुपये कर दी गई है।

 

इस योजना का मकसद महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करके और उन्हें सामाजिक सुरक्षा देकर महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। अभी 10 लाख से ज्यादा महिलाएँ इस पहल का लाभ उठा रही हैं।

 

कैबिनेट ने उस प्रावधान को हटाने को भी मंजूरी दी, जिसके तहत लाभार्थी कम मासिक सहायता राशि चुन सकते थे। इस बदलाव से सभी पात्र लाभार्थियों को 2,100 प्रतिमाह का तय लाभ मिलेगा, जिससे भुगतान में एकरूपता आएगी और प्रशासनिक प्रक्रिया आसान होगी।

 

योजना के भुगतान सिस्टम के तहत, नए लाभार्थियों के लिए पहली किस्त पूरी तरह से उनके बचत बैंक खातों में जमा की जाएगी। दूसरे महीने से, 1,100 रुपये सीधे लाभार्थी के बचत खाते में जमा किए जाएँगे, जबकि 1,000 रुपये योजना के प्रावधानों के अनुसार सरकार द्वारा संचालित आवर्ती जमा (आरडी) या सावधि जमा (एफडी) खाते में जमा किए जाएँगे।

 

तिमाही ‘लाइवनेस वेरिफिकेशन’ (जीवंतता सत्यापन)

 

लाभार्थियों के लिए नियमों का पालन आसान बनाने और साथ ही प्रभावी प्रमाणीकरण बनाए रखने के लिए, कैबिनेट ने ‘लाइवनेस वेरिफिकेशन’ मासिक की बजाय हर तिमाही में एक बार करने को मंजूरी दी है। आर्थिक सहायता जारी रखने के लिए लाभार्थियों को हर तिमाही ‘लाडो लक्ष्मी ऐप’ के जरिए चेहरे का प्रमाणीकरण (फेस ऑथेंटिकेशन) पूरा करना होगा।

सीआरआईडी को स्वतंत्र विभाग का दर्जा, डिजिटल गवर्नेंस होगी और मजबूत

 

हारट्रोन पर होगा सीआरआईडी का प्रशासनिक नियंत्रण

 

चंडीगढ़, 10 अक्टूबर-हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में, राज्य में डिजिटल गवर्नेंस व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा ई-गवर्नेंस एवं डिजिटल सेवाओं में बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सिटिजन रिसोर्स इन्फॉर्मेशन डिपार्टमेंट (सीआरआईडी) को हरियाणा सरकार के कार्य (आवंटन) नियम, 1974 के तहत स्वतंत्र विभाग का दर्जा देने की मंजूरी प्रदान की गई।

 

मंत्रिमंडल ने हरियाणा स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (हारट्रोन) को भी सीआरआईडी के प्रशासनिक नियंत्रण में लाने की मंजूरी दी, ताकि संबंधित कार्यों को सुव्यवस्थित किया जा सके और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाई जा सके।

 

यह निर्णय सीआरआईडी की जिम्मेदारियों के व्यापक दायरे और प्रकृति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सीआरआईडी ई-गवर्नेंस एवं डिजिटल सेवाओं की देखरेख करने के साथ-साथ हरियाणा परिवार पहचान प्राधिकरण, हरियाणा अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (हरसैक) तथा दृश्या का प्रशासन भी संभालता है। इन कार्यों के व्यापक दायरे को देखते हुए प्रभावी प्रशासन और जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी समझा गया कि सीआरआईडी को स्वतंत्र विभाग का दर्जा दिया जाए।

 

हारट्रोन को सीआरआईडी के अधीन लाने से उसके प्रशासनिक नियंत्रण और कार्यों में एकरूपता आएगी। हारट्रोन सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स संबंधी बुनियादी ढांचे की खरीद, ई-गवर्नेंस परियोजनाओं को सहयोग, तकनीकी मानव संसाधन उपलब्ध कराने तथा परामर्श सेवाएं प्रदान करने के लिए राज्य की नोडल तकनीकी एजेंसी के रूप में कार्य करता है। चूंकि ये गतिविधियां सीआरआईडी के कार्यक्षेत्र से संबंधित हैं, इसलिए हारट्रोन को इसके प्रशासनिक नियंत्रण में लाने से संबंधित कार्यों में बेहतर समन्वय सुनिश्चित होगा।

 

मंत्रिमंडल ने सामान्य प्रशासन विभाग तथा उद्योग एवं वाणिज्य विभाग को वर्तमान में आवंटित चार विषयों के दोहराव को समाप्त करने की भी मंजूरी दी है। इससे सरकारी कार्यों के आवंटन में अधिक स्पष्टता आएगी तथा विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों में दोहराव और कार्यक्षेत्र में टकराव से बचा जा सकेगा। इस निर्णय के बाद सीआरआईडी के स्वतंत्र विभागीय कार्य आवंटन के अंतर्गत हारट्रोन सहित कुल 19 विषय होंगे।

उल्लेखनीय है कि मंत्रिमंडल ने अप्रैल 2023 में ही सीआरआईडी को स्वतंत्र विभाग का दर्जा देने की मंजूरी प्रदान कर दी थी। वर्तमान निर्णय के माध्यम से उस मंजूरी को प्रभावी बनाया गया है।

हरियाणा में मीडिया कर्मियों के लिए आर्थिक सहायता दुगुनी

कैबिनेट ने ढाई लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने को दी मंजूरी

 

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 2026-27 के बजट भाषण में की थी घोषणा

 

चंडीगढ़, 10 अक्टूबर-हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहाँ हुई हरियाणा कैबिनेट की बैठक में ‘हरियाणा मीडिया पर्सनल वेलफेयर फंड एडमिनिस्ट्रेशन स्कीम’ में संशोधन को मंजूरी दी गई। इसके तहत पात्र मीडिया कर्मियों के लिए आर्थिक सहायता की अधिकतम सीमा को हर मामले में 2.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है।

खास बात यह है कि कैबिनेट ने यह फैसला मुख्यमंत्री द्वारा 2 मार्च, 2026 को हरियाणा विधानसभा में वर्ष 2026-27 के बजट भाषण के दौरान की गई घोषणा के अनुरूप लिया गया है। बजट भाषण के दौरान, मुख्यमंत्री ने आपात स्थिति में मीडिया कर्मियों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता की अधिकतम सीमा को 2.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की घोषणा की थी।

इस फैसले से बीमारी, मृत्यु, दुर्घटना या अन्य आपातकालीन स्थितियों के कारण गंभीर जरूरत पड़ने पर पात्र मीडिया कर्मियों और उनके आश्रितों या कानूनी उत्तराधिकारियों को बढ़ी हुई आर्थिक सहायता मिलेगी। हालाँकि, ‘हरियाणा मीडिया पर्सनल वेलफेयर फंड एडमिनिस्ट्रेशन स्कीम’ के अन्य पात्रता मानदंड और नियम-शर्तें पहले जैसे ही रहेंगे।

ग्रुप-सी भर्ती के लिए पूर्व-अग्निवीरों को मिलेगी सभी परीक्षाओं से छूट, हरियाणा कैबिनेट ने मंजूरी दी

वाइल्डलाइफ गार्ड, आईआरबी कांस्टेबल, एसडीआरएफ कांस्टेबल और फायर ऑपरेटर-कम-ड्राइवर पदों के लिए पीएसटी-पीएमटी से भी छूट मिलेगी

 

चंडीगढ़, 10 अक्टूबर-मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहाँ हुई हरियाणा कैबिनेट की बैठक में, सरकारी विभागों में सेवा के लिए पूर्व-अग्निवीरों के प्रशिक्षण, अनुशासन और कौशल को मान्यता देते हुए उनके पुनर्वास और लाभपरक रोजगार को सुगम बनाने के लिए राज्य की अग्निवीर नीति में संशोधनों को मंजूरी दी गई।

स्वीकृत संशोधनों के तहत, पूर्व-अग्निवीरों को इस नीति के अंतर्गत आने वाले ग्रुप-सी पदों पर सीधी भर्ती के लिए निर्धारित सभी प्रकार की परीक्षाओं से छूट दी जाएगी। निर्धारित आरक्षण और अन्य भर्ती प्रावधानों के अधीन, विज्ञापित पदों के विरुद्ध सीधी नियुक्ति के लिए उनके नाम पर विचार किया जाएगा।

 

कैबिनेट ने पर्यावरण, वन और वन्यजीव विभाग में वाइल्डलाइफ गार्ड, इंडियन रिजर्व बटालियन (आईआरबी) में कांस्टेबल, राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) में कांस्टेबल तथा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में फायर ऑपरेटर-कम-ड्राइवर के पदों के लिए आवेदन करने वाले पूर्व-अग्निवीरों को शारीरिक जांच परीक्षा (पीएसटी) और शारीरिक माप परीक्षा (पीएमटी) से भी (यथा लागू) छूट की मंजूरी दी। इन पदों को हाल ही में राज्य की पूर्व-अग्निवीर आरक्षण नीति के तहत शामिल किया गया था।

 

ये संशोधन हरियाणा के मूल निवासी पूर्व-अग्निवीरों को निर्दिष्ट सरकारी पदों पर क्षैतिज (हॉरिजॉन्टल) आरक्षण प्रदान करने की हरियाणा सरकार की मौजूदा नीति के अनुरूप किए गए हैं।

 

परीक्षाओं से छूट की यह व्यवस्था नीति के अंतर्गत आने वाले ग्रुप-सी पदों पर सीधी भर्ती पर लागू होगी। हालांकि, नियुक्ति के बाद संबंधित विभागीय सेवा नियमों के अन्य सभी नियम, शर्तें और प्रावधान लागू होंगे।

 

कैबिनेट ने यह भी मंजूरी दी कि पूर्व-अग्निवीरों की नियुक्ति से उत्पन्न होने वाली किसी भी परिणामी कमी को संबंधित श्रेणी की भविष्य की भर्तियों में समायोजित किया जाएगा।

माइनिंग गार्ड के पदों को ग्रुप-डी से ग्रुप-सी में अपग्रेड करने की मिली मंजूरी

 

पूर्व अग्निवीरों के हित में हरियाणा सरकार का बड़ा निर्णय

 

चंडीगढ़, 10 अक्टूबर-मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में खान एवं भूविज्ञान विभाग में माइनिंग गार्ड के पद को ग्रुप-डी (सीधी भर्ती स्तर) से अपग्रेड करके ग्रुप-सी (एफपीएल-2) में अपग्रेड करने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की गई। इस निर्णय का उद्देश्य सरकारी पदों की भर्ती में पूर्व अग्निवीरों के लिए राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित आरक्षण एवं अन्य लाभों के क्रियान्वयन को सुविधाजनक बनाना है।

 

मंत्रिमंडल द्वारा माइनिंग गार्ड के पद को ग्रुप-सी के पदों के लिए लागू खान एवं भूविज्ञान विभाग के संबंधित सेवा नियमों के अंतर्गत लाने की भी मंजूरी दी गई। इसके लिए हरियाणा खान एवं भूविज्ञान विभाग (ग्रुप-सी) सेवा नियम, 1998 में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।

 

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने सरकारी पदों पर भर्ती में पूर्व अग्निवीरों को कई तरह के लाभ प्रदान करने की अधिसूचना जारी की है। इनमें क्षैतिज आरक्षण, अधिकतम आयु सीमा में छूट, सामान्य पात्रता परीक्षा (सीईटी) से छूट तथा जहां लागू हो, फिजिकल स्क्रीनिंग टेस्ट से छूट शामिल हैं।

 

इस पद को अपग्रेड करने से यह अन्य विभागों में समान पदों के अनुरूप हो जाएगा। इनमें वन विभाग में फॉरेस्ट गार्ड, कारागार विभाग में वार्डर तथा गृह विभाग में पुलिस कांस्टेबल शामिल हैं, जिन्हें ग्रुप-सी के पदों के रूप में वर्गीकृत किया गया है। ग्रुप-सी के पदों पर भर्ती में सीईटी के अतिरिक्त चयन प्रक्रिया के विभिन्न चरण शामिल होते हैं। इससे पूर्व अग्निवीरों के लिए राज्य सरकार की नीति को लागू करते समय अभ्यर्थियों की उपयुक्तता का आकलन करने के लिए उचित व्यवस्था स्थापित की जा सकेगी।

 

प्रशासनिक विभाग को संबंधित सेवा नियमों में आवश्यक संशोधन करने तथा जहां भी आवश्यक हो, मानव संसाधन विभाग, वित्त विभाग और अन्य संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमोदन एवं सहमति प्राप्त करने के लिए अधिकृत किया गया है। इसके अतिरिक्त, माइनिंग गार्ड के पद को हरियाणा खान एवं भूविज्ञान विभाग (ग्रुप-डी) सेवा नियम, 1998 से भी हटाया जाएगा।

गांवों में ‘हर-हित’ स्टोर को मिलेगी तेजी से मंजूरी

डीसी दे सकेंगे 20 वर्ग गज तक की पंचायती जमीन के पट्टे को मंजूरी

 

चंडीगढ़, 10 अक्टूबर-हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में गांवों में ‘हर-हित’ स्टोर का तेजी से विस्तार करने के लिए ‘हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) नियम, 1964’ में संशोधन को मंजूरी दी गई।

 

इस संशोधन के तहत संबंधित उपायुक्तों को ग्राम पंचायतों की ‘शामलात देह’ (गांव की साझा जमीन) में 20 वर्ग गज तक की जमीन हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन लिमिटेड को ‘हर-हित’ स्टोर स्थापित करने के लिए आवंटन के जरिए पट्टे पर देने की मंजूरी का अधिकार दिया गया है। इन नए नियमों को ‘हरियाणा विलेज कॉमन लैंड्स (रेगुलेशन) पांचवां संशोधन नियम, 2026’ कहा जाएगा।

 

राज्य सरकार के उपक्रम ‘हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन लिमिटेड’ द्वारा फ्रैंचाइजी के माध्यम से ‘हर-हित’ रिटेल चेन चलाई जा रही है। अभी 5,000 स्टोर के लक्ष्य के मुकाबले लगभग 1,400 स्टोर चल रहे हैं। गांवों में हर स्टोर के लिए 20 वर्ग गज जमीन की आवश्यकता है।

 

अभी ऐसे हर पट्टे के लिए राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति लेनी पड़ती है। संबंधित उपायुक्त को मंजूरी देने का अधिकार मिलने से, इन छोटी जगहों के प्रस्तावों पर जिला स्तर पर कार्रवाई हो सकेगी, जिससे रिटेल नेटवर्क का विस्तार आसान हो जाएगा।

 

संशोधन के तहत, ग्राम पंचायत की जमीन ‘हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन लिमिटेड’ को आवंटन के जरिए एक बार में ज्यादा से ज्यादा पांच साल की अवधि के लिए पट्टे पर दी जा सकती है, जिसे अधिकतम तीन साल के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है। पट्टे की राशि और अन्य शर्तें राज्य सरकार समय-समय पर तय करेगी।

 

इस संशोधन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ऐसी जमीन पर ‘हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन लिमिटेड‘ की फ्रैंचाइजी के जरिए ‘हर-हित स्टोर’ चलाने को सब-लीज नहीं माना जाएगा।

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