प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय संवाद कार्यक्रम ‘परीक्षा पे चर्चा’ को इस बार अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिली है। परीक्षा के तनाव, पढ़ाई की रणनीति और जीवन कौशल पर केंद्रित इस पहल के तहत अब तक 3 करोड़ से अधिक रजिस्ट्रेशन दर्ज किए जा चुके हैं। यह आंकड़ा न केवल कार्यक्रम की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है, बल्कि छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच इसकी गहरी स्वीकार्यता को भी रेखांकित करता है।
‘परीक्षा पे चर्चा’ का उद्देश्य बोर्ड परीक्षाओं और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को मानसिक दबाव से मुक्त करना और उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है। प्रधानमंत्री मोदी इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों से सीधे संवाद करते हैं और उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ जीवन के व्यापक दृष्टिकोण को समझने की सीख देते हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी छात्रों के साथ-साथ माता-पिता और शिक्षकों ने बड़ी संख्या में पंजीकरण कराया है।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, देश के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों से रिकॉर्ड संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। ऑनलाइन माध्यम के जरिए हुए इन रजिस्ट्रेशनों में सरकारी और निजी स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों से जुड़े छात्र शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग ने इस कार्यक्रम की पहुंच को और व्यापक बनाया है।
पिछले वर्षों में ‘परीक्षा पे चर्चा’ के दौरान प्रधानमंत्री ने समय प्रबंधन, लक्ष्य निर्धारण, असफलता से सीख, और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर खुलकर बात की है। इसी वजह से यह कार्यक्रम केवल परीक्षा तक सीमित न रहकर एक प्रेरणादायक संवाद बन चुका है। कई छात्रों का कहना है कि इस चर्चा से उन्हें परीक्षा को लेकर सकारात्मक सोच विकसित करने में मदद मिलती है।
कार्यक्रम को लेकर अभिभावकों और शिक्षकों में भी खास उत्साह देखा जा रहा है। उनका मानना है कि बच्चों पर अनावश्यक दबाव डालने के बजाय उन्हें समझने और सहयोग करने का संदेश समाज तक पहुंचता है। यही कारण है कि हर साल इसके पंजीकरण में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।
कुल मिलाकर, 3 करोड़ से अधिक रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा यह साबित करता है कि ‘परीक्षा पे चर्चा’ अब एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले चुका है, जो परीक्षा को बोझ नहीं, बल्कि सीखने के अवसर के रूप में देखने की सोच को मजबूती से आगे बढ़ा रहा है।