ईरान की राजधानी तेहरान समेत देश के कई प्रमुख शहरों में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। बीते कुछ दिनों से जारी जनआक्रोश अब हिंसक रूप ले चुका है। सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी खुलकर सरकार और सर्वोच्च नेतृत्व के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। “तानाशाह मुर्दाबाद” जैसे नारों से राजधानी गूंज उठी है, जबकि सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में कई लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स और मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, विरोध प्रदर्शन ईरान की बिगड़ती आर्थिक स्थिति, महंगाई, बेरोजगारी और राजनीतिक दमन के खिलाफ भड़क उठे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार आम जनता की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है और असहमति की आवाज को दबाने के लिए बल प्रयोग कर रही है। हालात उस वक्त और तनावपूर्ण हो गए जब सुरक्षाबलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस, रबर बुलेट और कथित तौर पर वास्तविक गोलियों का इस्तेमाल किया।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि तेहरान के कई इलाकों में रातभर हिंसा होती रही। सड़कों पर आगजनी, सरकारी इमारतों को नुकसान और वाहनों में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं। इंटरनेट सेवाओं पर भी आंशिक रोक लगाए जाने की खबरें हैं, जिससे सूचनाओं के आदान-प्रदान पर असर पड़ा है। इसके बावजूद सोशल मीडिया के जरिए विरोध प्रदर्शनों की तस्वीरें और वीडियो तेजी से सामने आ रहे हैं।
ईरानी प्रशासन ने हालात के लिए “विदेशी साजिश” को जिम्मेदार ठहराया है। सरकारी बयान में कहा गया है कि कुछ असामाजिक तत्व देश में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और कई शहरों में कर्फ्यू जैसी स्थिति बना दी गई है।
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने ईरान में बढ़ती हिंसा और नागरिकों की मौत पर चिंता जताई है। कई पश्चिमी देशों और मानवाधिकार संगठनों ने ईरानी सरकार से संयम बरतने, बल प्रयोग रोकने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के अधिकारों का सम्मान करने की अपील की है। हालांकि, ईरान ने इन बयानों को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताते हुए खारिज कर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान इस समय गंभीर आंतरिक संकट के दौर से गुजर रहा है। आर्थिक दबाव, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और राजनीतिक असंतोष मिलकर हालात को और जटिल बना रहे हैं। यदि सरकार और जनता के बीच संवाद का रास्ता नहीं निकला, तो आने वाले दिनों में स्थिति और विस्फोटक हो सकती है।
कुल मिलाकर, तेहरान में गूंजते विरोधी नारों और हिंसक झड़पों ने यह साफ कर दिया है कि ईरान में असंतोष गहराता जा रहा है। हालात पर काबू पाना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है और पूरी दुनिया की नजरें अब वहां की अगली घटनाओं पर टिकी हुई हैं।