उत्तर भारत इन दिनों कड़ाके की ठंड की चपेट में है। मैदानी इलाकों में शीतलहर और घने कोहरे ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है, वहीं हिमालयी राज्यों में लगातार हो रही बर्फबारी से तापमान में और गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे बना हुआ है, जिससे ठंड का असर और तेज हो गया है।
दिल्ली और आसपास के इलाकों में सुबह के समय घना कोहरा छाया रहने के कारण सड़क और रेल यातायात प्रभावित हुआ है। दृश्यता बेहद कम होने से कई ट्रेनों और उड़ानों में देरी देखी गई। IMD का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक कोहरे की स्थिति बनी रह सकती है, खासकर तड़के और देर रात के समय। दिन में धूप निकलने से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन ठंडी हवाओं के कारण ठिठुरन बनी रहेगी।
उधर, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी दर्ज की गई है। पर्वतीय क्षेत्रों में कई सड़कें बंद हैं और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय रहने के चलते पहाड़ों पर बर्फबारी का सिलसिला जारी है, जिसका असर मैदानी इलाकों में ठंडी हवाओं के रूप में महसूस किया जा रहा है।
बारिश को लेकर IMD ने संकेत दिए हैं कि जनवरी के पहले सप्ताह के दौरान उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बूंदाबांदी या हल्की वर्षा की संभावना जताई गई है। हालांकि, फिलहाल भारी बारिश के आसार नहीं हैं।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश होने से कोहरे की तीव्रता में कुछ कमी आ सकती है, लेकिन तापमान में और गिरावट भी दर्ज की जा सकती है। किसानों के लिए यह मौसम दोहरा असर डाल सकता है—जहां एक ओर ठंड से फसलों को नुकसान की आशंका है, वहीं हल्की बारिश रबी फसलों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
IMD ने लोगों को सलाह दी है कि वे शीतलहर को देखते हुए सावधानी बरतें, गर्म कपड़े पहनें और सुबह-शाम अनावश्यक बाहर निकलने से बचें। आने वाले दिनों में उत्तर भारत में ठंड का प्रकोप फिलहाल बना रहने की संभावना है।