शेयर बाजार में हाल के दिनों में आई तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। खास तौर पर आईटीसी (ITC) के शेयरों में अचानक आई कमजोरी ने बाजार का ध्यान खींचा है। दो कारोबारी सत्रों के भीतर ITC के शेयरों में आई भारी गिरावट से देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है। बाजार आकलनों के मुताबिक, ITC में हिस्सेदारी के कारण LIC की निवेश वैल्यू में लगभग 11,000 करोड़ रुपये तक की कमी आई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ITC के शेयरों पर दबाव की बड़ी वजह सरकार से जुड़ा एक अहम नीतिगत फैसला माना जा रहा है। तंबाकू और सिगरेट सेक्टर से जुड़े संभावित नियामकीय बदलावों और टैक्स नीति को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों की धारणा को कमजोर किया। नतीजतन, भारी बिकवाली देखने को मिली और ITC के शेयर लगातार दो दिन तक फिसलते चले गए।
LIC, जो लंबे समय से ITC की बड़ी शेयरधारक रही है, इस गिरावट से सबसे ज्यादा प्रभावित निवेशकों में शामिल है। LIC की हिस्सेदारी के कारण ITC के शेयर भाव में थोड़ी सी गिरावट भी हजारों करोड़ रुपये के कागजी नुकसान में तब्दील हो जाती है। बाजार बंद होने के बाद सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, महज दो दिनों में ITC के मार्केट कैप में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिसका सीधा असर LIC के पोर्टफोलियो पर पड़ा।
हालांकि, बाजार जानकार यह भी मानते हैं कि यह नुकसान फिलहाल कागजी है और शेयरों में उतार-चढ़ाव बाजार का स्वाभाविक हिस्सा है। ITC जैसी ब्लू-चिप कंपनी के फंडामेंटल्स को लेकर अब भी कई विशेषज्ञ सकारात्मक नजरिया रखते हैं। कंपनी का एफएमसीजी, होटल और एग्री-बिजनेस जैसे विविध क्षेत्रों में मजबूत आधार है, जो लंबी अवधि में निवेशकों के लिए सहारा बन सकता है।
इसके बावजूद, सरकारी फैसलों और नीतिगत संकेतों का असर बाजार की भावनाओं पर तुरंत पड़ता है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से स्पष्ट संकेत और कंपनी की रणनीति पर बाजार की नजर बनी रहेगी।
निवेश विशेषज्ञों की सलाह है कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय निवेशकों को दीर्घकालिक नजरिए से फैसले लेने चाहिए। वहीं, LIC जैसे बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए यह गिरावट एक बार फिर इस सवाल को जन्म देती है कि सरकारी नीतियों का असर आम निवेशकों के साथ-साथ सार्वजनिक संस्थानों की पूंजी पर भी कितना गहरा होता है।