पंजाब के कृषि मंत्री ने केंद्रीय बजट पर जताई निराशा, पंजाब और किसानों को अनदेखा करने का दिया हवाला
बाढ़ प्रभावित पंजाब के लिए विशेष पैकेज की कमी का उठाया मुद्दा
बढ़ती लागत, एमएसपी देने के अधूरे वादे और फसल बीमा बजट में कटौती के गंभीर मुद्दे उठाए
केंद्र पर लगातार भेदभाव का लगाया आरोप, निष्पक्ष हिस्सेदारी और कृषि संकट पर ध्यान केंद्रित करने की मांग की
चंडीगढ़, 1 फरवरी-पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, स. गुरमीत सिंह खुड्डियां ने केंद्रीय बजट पर गहरी निराशा और चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस बजट में पंजाब और यहां के किसानों की महत्वपूर्ण जरूरतों को नजरअंदाज किया गया है।
केंद्रीय बजट पर पूछे सवालों के जवाब देते हुए स. खुड्डियां ने कहा, "वास्तविक प्रभाव तब पता चलेगा जब प्रस्तावों का विस्तार से खुलासा होगा। हालांकि, मुझे पूरा संदेह है कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने पंजाब और किसानों के लिए कुछ भी लाभकारी नहीं किया है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब को लगातार भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। बड़े पैमाने पर बाढ़ की मार झेलने के बाद भी, मांगा गया केंद्रीय राहत पैकेज कभी भी राज्य को नहीं दिया गया।
कृषि संकट के बारे में विस्तार से बताते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है, लेकिन बजट इस क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों को हल करने में विफल रहा है। उन्होंने कहा, "हर चीज की कीमत आसमान छू रही है - डीजल, खाद, कीटनाशक - लेकिन बजट में इस संबंध में कोई राहत नहीं दिखती। हमें सभी फसलों के लिए समर्पित वितरण या अधिक एमएसपी की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।"
उन्होंने फसल बीमा योजना के लिए बजट में कटौती और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर महत्वपूर्ण घोषणाओं की अनुपस्थिति की विशेष रूप से आलोचना की। खुड्डियां ने कहा, "सहायता बढ़ाने के बजाय, केंद्र इसमें कटौती कर रहा है। ऐसे समय में जब किसान मुसीबत में हैं, केंद्र सरकार ने पीठ दिखा दी है।"
कृषि मंत्री ने पंजाब सरकार के सक्रिय कदमों को रेखांकित करते हुए कहा कि जहां केंद्र ऐसा करने में असफल रहा, वहीं पंजाब सरकार किसान कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा, "बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए हमारी सरकार ने तुरंत प्रति एकड़ 20,000 रुपये का मुआवजा दिया है।"
स. खुड्डियां ने आर्थिक उपेक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा संकट से जोड़ते हुए कहा, "पंजाब देश की खाद्य सुरक्षा में बड़ा योगदान देता है और इसके युवा हमेशा सीमाओं की रक्षा के लिए आगे रहते हैं। फिर भी, राज्य के जायज़ अधिकारों को हमेशा नजरअंदाज किया जाता है।"
उन्होंने जोर देकर कहा, "केंद्र के साथ अच्छे संबंध वाली पिछली सरकारें विभाग से छूट की मांग कर सकती थीं, लेकिन ऐसा नहीं किया गया क्योंकि वे पंजाब को दबाकर रखना चाहती थीं। हम इस स्थिति का सामना कर रहे हैं और पंजाब को प्रगति के रास्ते पर वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास करते रहेंगे।"
स. खुड्डियां ने कहा, "समय की जरूरत थी कि केंद्र सरकार कृषि के सामने बढ़ते संकट को हल करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए कोई बड़ा और लाभकारी पैकेज पेश करे। लेकिन अफसोस है कि इस बजट में हमारे किसानों के सामने आने वाली मुश्किलों और जटिलताओं को सुलझाने की कोई गुंजाइश नहीं है।"
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केंद्र सरकार द्वारा बजट में फिर पंजाब के साथ भेदभाव: हरभजन सिंह ई.टी.ओ.
चंडीगढ़, 1 फरवरी 2026: पंजाब के लोक निर्माण मंत्री हरभजन सिंह ई.टी.ओ. ने केंद्र सरकार के 2026 के बजट में पंजाब राज्य के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि खुद को किसान हितैषी बताने वाली केंद्र सरकार इस बार भी पंजाब के किसानों को एम.एस.पी. की गारंटी देने में असफल रही है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार हर मुद्दे पर पंजाब के साथ भेदभाव कर रही है।
उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने वर्ष 2025 में हुई भारी बारिश के कारण राज्य की सडक़ों को हुए भारी नुकसान के मद्देनजर विशेष पैकेज की मांग की थी, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार ने सीमा सुरक्षा के मद्देनजर 1,000 करोड़ रुपये के एक विशेष वित्तीय पैकेज की मांग की थी, जिससे पुलिस का आधुनिकीकरण किया जाना था। इसके अलावा ग्रामीण विकास फंड में बकाया 7,757 करोड़ रुपये, प्रति एकड़ 15,000 रुपये तक का उच्च फसल विविधीकरण प्रोत्साहन, राजस्व नुकसान के लिये जीएसटी मुआवजे की मांग, साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं और जल आपूर्ति के लिए फंडों की मांग की गई थी। लेकिन केंद्र सरकार ने इनमें से किसी भी मांग को पूरा नहीं किया।
स. हरभजन सिंह ई.टी.ओ. ने कहा कि पंजाब के लोगों को उम्मीद थी कि केंद्रीय बजट में पंजाब राज्य के किसानों और उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष रियायतों की घोषणा की जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।
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केंद्रीय बजट ने पंजाब और हरियाणा के किसानों के साथ फिर किया धोखा: हरपाल चीमा
केंद्र ने एमएसपी से मुंह मोड़ा, मंडी और कृषि आधारभूत ढांचे की जरूरतों को किया नजरअंदाज: वित्त मंत्री
चंडीगढ़, 1 फरवरी-पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने एक बार फिर पंजाब और हरियाणा के किसानों की जायज चिंताओं को नजरअंदाज किया है, जिससे उसके किसान-हितैषी होने के खोखले दावों की पोल खुल गई है। चीमा ने इशारा किया कि कृषि आधारभूत ढांचा फंड में कोई वृद्धि नहीं की गई और न ही मंडी के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए कोई ठोस सहायता दी गई है, जिससे कृषि प्रधान राज्यों को अपने भरोसे छोड़ दिया गया है।
उन्होंने कहा कि पंजाब का किसान देश का पेट भरता है, फिर भी केंद्र सरकार उन व्यवस्थाओं में निवेश को लगातार अनदेखा कर रही है जो खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं। वित्त मंत्री ने उच्च मूल्य वाली फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए अपनाए गए चयनात्मक दृष्टिकोण की भी आलोचना की। जबकि बजट में नारियल, काजू, चंदन और ड्राई फ्रूट्स जैसी फसलों का जिक्र है, लेकिन उत्तरी भारत के किसानों के लिए कुछ भी नहीं है जो अपनी कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल फसलों पर निर्भर करते हैं।
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि यह बजट स्पष्ट रूप से केंद्र के पक्षपात और अनाज उत्पादक राज्यों, खासकर पंजाब के किसानों के प्रति उसकी निरंतर उदासीनता को दर्शाता है। ये किसान सम्मान, सहयोग और उचित निवेश के हकदार हैं, खोखले नारों के नहीं।
पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि इस केंद्रीय बजट 2026 में कृषि आधारभूत ढांचा फंड में वृद्धि या मंडी आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के बारे में पंजाब और हरियाणा के किसानों के लिए कुछ भी नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि राज्यों को अपने ही फंडों से विकास करना होगा। बजट में उच्च-मूल्य वाली फसलों के विकास का जिक्र हुआ लेकिन पंजाब को पूरी तरह से नजरअंदाज रखा गया।
उन्होंने कहा कि यूरिया सब्सिडी पिछले साल 1,26,475 करोड़ से घटाकर 1,16,805 करोड़ कर दी गई है। इस बजट में ‘आम आदमी’ के लिए कुछ नहीं है, जबकि आज के समय में जब महंगाई आम आदमी की बचत को खा रही है और आय नहीं बढ़ रही, तो टैक्स में जीरो राहत उचित नहीं है। दरअसल, भारत सरकार ने एसएसटी (सिक्योरिटीज़ ट्रांजेक्शन टैक्स) बढ़ा दिया है जो आम आदमी पर बुरा प्रभाव डालेगा। इस वृद्धि से बाद लंबी अवधि के पूंजी लाभ पर कोई राहत नहीं है। यह आम आदमी को हर तरफ से निचोडऩे जैसा है।
रक्षा के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद थी कि केंद्रीय वित्त मंत्री भारत को रक्षा उत्पादन पर मजबूत बनाने और पिछले साल पाकिस्तान के साथ तनाव के मद्देनजर रक्षा बजट को अर्थपूर्ण बढ़ाने के लिए बड़ी योजनाओं का ऐलान करेंगे। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। केंद्रीय वित्त मंत्री के भाषण में रक्षा का कुल जिक्र सिर्फ ‘चार (4)’ बार हुआ।
प्रधानमंत्री-विश्वकर्मा योजना को उजागर करते हुए उन्होंने बताया कि यह पिछले साल बहुत जोर-शोर से शुरू की गई थी ताकि पारंपरिक कारीगरों और दस्तकारों को संपूर्ण, आधुनिक सहायता प्रदान की जा सके, कौशल प्रशिक्षण की पेशकश की जा सके। बजट 5,100 करोड़ से घटाकर 3,861 करोड़ कर दिया गया। एक तरफ वे कहते हैं कि यह बजट विरासती उद्योगों और युवा-शक्ति बजट को विकसित करने के उद्देश्य से है, फिर उन्होंने इस योजना के लिए बने बजट में कटौती क्यों की?
16वें वित्त आयोग पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि वर्टिकल डिवोल्यूशन (टैक्स पूल में सभी राज्यों का कुल हिस्सा) 41 प्रतिशत पर ही रखा गया है। कोई बदलाव नहीं किया गया। वित्त आयोग ने राज्यों की खराब हालत को पूरी तरह नजरअंदाज किया है और राज्यों को पेश वित्तीय तनाव के बावजूद इस हिस्से को बढ़ाने में असफल रहा है। 15वें वित्त आयोग में पंजाब के लिए हॉरिजॉन्टल डिवोल्यूशन 1.807 प्रतिशत से बढक़र 1.996 प्रतिशत हो गया था। 16वें वित्त आयोग से कोई मालिया घाटा अनुदान नहीं है। 15वें वित्त आयोग ने इन अनुदानों की सिफारिश की थी। एसडीआरएफ की शर्तें बहुत अधिक सीमित हैं और आपदाओं को प्रभावी ढंग से कम करने व प्रबंधन करने में पंजाब जैसे राज्य को प्रभावित करेंगी। उन्होंने आगे कहा कि बजट भाषण में राज्य का कोई जिक्र नहीं है। वे पंजाब और पंजाबियों को पूरी तरह भूल गए हैं।
शिक्षा के मामले में यह बहुत निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा पर पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत से कम (98 प्रतिशत) वृद्धि हुई है। बजट में पिछले साल की तुलना में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिसमें पीएम-श्री योजना के लिए 7,500 करोड़ रुपये रखे गए थे।
पूंजी निर्माण के लिए राज्यों को विशेष सहायता (एसएएससीआई) के बारे में उन्होंने कहा कि इस योजना का कोई जिक्र नहीं है। सभी राज्यों ने सीएपीईएक्स के उच्च स्तर को जारी रखने के लिए योजना के रूपरेखा को अर्थपूर्ण ढंग से विस्तार देने की मांग की थी।
स्वास्थ्य के मामले में उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के बजट में कोई बदलाव नहीं किया गया जो 9,500 करोड़ रुपये है। स्वच्छ भारत मिशन का बजट पिछले साल 5,000 करोड़ से आधा होकर 2500 करोड़ घटकर आधा रह गया़। मनरेगा के तहत वीबी-जी-राम-जी बजट 88,000 करोड़ से बढक़र 95,692 करोड़ रुपये हो गया है।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि सीमा आधारभूत ढांचा और प्रबंधन योजना (केंद्रीय योजना) का बजट पिछले साल 5,597 करोड़ से घटकर वर्तमान बजट में 5,577 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
श्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि इस बजट में दक्षिणी और उत्तर-पूर्वी भारत की ओर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया है। बजट में पंजाब या यहां तक कि उत्तरी भारत के लिए कुछ भी नहीं है। बजट में किसानों और कृषि के लिए कुछ भी नहीं है। इस केंद्रीय बजट में नौकरियों और युवाओं को भी अनदेखा किया गया है।
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मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा प्रधानमंत्री को हलवारा हवाई अड्डे का नाम शहीद करतार सिंह सराभा के नाम पर रखने की अपील
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने केंद्र सरकार से मोहाली हवाई अड्डे से अंतरराष्ट्रीय संपर्क में और विस्तार करने की अपील की
भगवंत मान सरकार गुरुओं और शहीदों के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध
पंजाब के हवाई अड्डों का नाम गुरुओं और शहीदों के नाम पर रखना उनकी विरासत के प्रति गहन सम्मान का प्रतीक है: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
जल्द ही, पंजाब के चारों हवाई अड्डे हमारे गुरुओं और शहीदों के नामों से जाने जाएंगे: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
पंजाब सरकार राज्य की आध्यात्मिक और क्रांतिकारी विरासत को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लुधियाना के हलवारा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर टर्मिनल भवन के उद्घाटन समारोह में की शिरक्त
लुधियाना, 1 फरवरी 2026-पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज लुधियाना के हलवारा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर टर्मिनल भवन के उद्घाटन के अवसर पर भारत सरकार से हवाई अड्डे का नाम महान शहीद करतार सिंह सराभा के नाम पर रखने की अपनी मांग दोहराई और कहा कि यह कदम भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे कम उम्र के नायकों में से एक के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
मुख्यमंत्री ने केंद्र से मोहाली हवाई अड्डे से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में वृद्धि करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि पंजाब लगातार उस मोड़ की ओर बढ़ रहा है जहाँ इसके चारों हवाई अड्डों के नाम राज्य के महान गुरुओं और शहीदों के नाम पर रखे जाएंगे, जो आधुनिक बुनियादी ढांचे को राज्य की आध्यात्मिक और क्रांतिकारी विरासत से जोड़ेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हवाई अड्डे के वर्चुअल उद्घाटन के दौरान केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू की उपस्थिति में यह मुद्दा उठाते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘शहीद करतार सिंह सराभा ने मात्र 19 वर्ष की उम्र में मातृभूमि के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। उनके महान बलिदान ने लाखों लोगों को ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया और शहीद-ए-आजम भगत सिंह भी उन्हें अपना रोल मॉडल मानते थे।’
मुख्यमंत्री ने कहा कि हलवारा हवाई अड्डे का नाम शहीद करतार सिंह सराभा के नाम पर रखना इस महान शहीद के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी जो इस क्षेत्र से जुड़े थे और एविएशन में करियर बनाने के लिए बर्कले यूनिवर्सिटी गए थे, लेकिन वापस आने के बजाय उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के लिए अपना जीवन समर्पित करने का रास्ता चुना। उन्होंने कहा, ‘पंजाब महान गुरुओं, पैगंबरों, संतों, पीरों और शहीदों की धरती है। इस पवित्र मिट्टी के कण-कण से उनकी कुर्बानियों की महक आती है।’
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यदि हलवारा हवाई अड्डे का नाम शहीद करतार सिंह सराभा के नाम पर रखा जाता है तो पंजाब के चार हवाई अड्डों में से दो का नाम सम्माननीय गुरुओं के नाम पर और दो का नाम शहीदों के नाम पर रखा जाएगा। उन्होंने कहा, ‘श्री गुरु रामदास अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, अमृतसर और श्री गुरु रविदास महाराज जी हवाई अड्डा, आदमपुर का नाम गुरुओं के नाम पर रखा गया है, जबकि शहीद भगत सिंह हवाई अड्डा, मोहाली और शहीद करतार सिंह सराभा हवाई अड्डा, हलवारा हमारे शहीदों की याद को समर्पित होगा।’
गुरु रविदास के प्रकाश पर्व पर लोगों को बधाई देते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह बहुत गर्व और संतुष्टि की बात है कि आदमपुर हवाई अड्डे का नाम भक्ति आंदोलन के महान समर्थक के नाम पर रखा गया है। उन्होंने कहा, ‘श्री गुरु रविदास महाराज जी द्वारा समानतावादी समाज की रचना के लिए दिखाया गया मार्ग हमारी सरकार की जनता की सेवा करने की प्रतिबद्धता का मुख्य आधार है।’ उन्होंने कहा कि यह पंजाब के लिए एक ऐतिहासिक दिन रहा क्योंकि प्रधानमंत्री ने इस शुभ अवसर पर दो हवाई अड्डों को जनता को समर्पित किया।
हलवारा हवाई अड्डे की रणनीतिक महत्ता को उजागर करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि इस हवाई अड्डे ने वर्षों दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और महत्वपूर्ण अभियानों के दौरान सशस्त्र सेनाओं द्वारा इसका उपयोग किया जाता रहा है। उन्होंने हलवारा में टर्मिनल, जिसे अब जनता को समर्पित कर दिया गया है, विकसित करने में योगदान के लिए भारतीय सशस्त्र सेनाओं का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा, ‘राज्य सरकार आने वाले दिनों में इस हवाई अड्डे से संपर्क बढ़ाने के लिए भारत सरकार के साथ विचार-विमर्श करेगी।’
पहले किए गए प्रयासों को याद करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि 22 मार्च, 2023 को पंजाब विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें भारत सरकार से इंडियन एयर फोर्स स्टेशन, हलवारा, लुधियाना में स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम शहीद करतार सिंह सराभा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा रखने का अनुरोध किया गया था। उन्होंने कहा, ‘गदर पार्टी के एक सक्रिय नेता के रूप में, शहीद करतार सिंह सराभा ने पहले विदेशों में और फिर देश के अंदर भारत की आजादी के लिए अथक मेहनत की। हवाई अड्डे का नाम उनके नाम पर रखना उनके बेमिसाल योगदान को एक विनम्र श्रद्धांजलि होगी।’
मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों के कारण मोहाली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम पहले ही शहीद भगत सिंह के नाम पर रखा जा चुका है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘हमारे महान शहीदों के नाम पर हवाई अड्डों, विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों का नामकरण हमारी सरकार के महान शहीदों की विरासत को संरक्षित करने और युवाओं को देश की निस्वार्थ सेवा के लिए समर्पित करने के दृष्टिकोण का अभिन्न अंग है।’
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‘गैंगस्टरां ते वार’ का 13वाँ दिन: पंजाब पुलिस ने 767 स्थानों पर की छापेमारी; 148 व्यक्ति 4 हथियारों समेत काबू
- पुलिस टीमों ने 178 व्यक्तियों के खिलाफ की एहतियातन कार्रवाई, 291 को पूछताछ के बाद किया रिहा
- लोग गैंगस्टर विरोधी हेल्पलाइन नंबर 93946-93946 पर गुप्त रूप से दे सकते हैं गैंगस्टरों की जानकारी
- ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ के 337वें दिन 73 नशा तस्कर 2.8 किलो हेरोइन समेत काबू
चंडीगढ़, 1 फरवरी: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देशों के तहत शुरू की गई निर्णायक ‘गैंगस्टरां ते वार’ मुहिम के 13वें दिन पंजाब पुलिस ने पूरे राज्य में गैंगस्टरों के सहयोगियों के पहचाने गये और मैप किए गए 767 ठिकानों पर छापेमारी की।
उल्लेखनीय है कि ‘गैंगस्टरां ते वार’ पंजाब को गैंगस्टर मुक्त राज्य बनाने के लिए एक निर्णायक मुहिम है, जिसकी शुरुआत 20 जनवरी, 2026 को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पंजाब गौरव यादव द्वारा की गई थी। एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (ए.जी.टी.एफ.) पंजाब के पूर्ण समन्वय से सभी जिलों की पुलिस टीमें राज्य भर में विशेष कार्रवाइयाँ कर रही हैं।
‘गैंगस्टरां ते वार’ के 13वें दिन पुलिस टीमों ने 148 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से चार हथियार बरामद किए, जिसके साथ मुहिम की शुरुआत से अब तक कुल गिरफ्तारियों की संख्या 4,061 हो गई है।
इसके अलावा 178 व्यक्तियों के खिलाफ एहतियातन कार्रवाई की गई, जबकि 291 व्यक्तियों को तफ्तीश और पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। पुलिस टीमों ने कार्रवाई के दौरान 14 भगोड़े अपराधियों (पी.ओज़.) को भी गिरफ्तार किया है।
उन्होंने कहा कि लोग गुप्त रूप से वांछित अपराधियों/गैंगस्टरों के बारे में एंटी-गैंगस्टर हेल्पलाइन नंबर 93946-93946 के माध्यम से रिपोर्ट कर सकते हैं और किसी भी प्रकार के अपराध व आपराधिक गतिविधियों की सूचना/जानकारी साझा कर सकते हैं।
इस दौरान पुलिस टीमों ने नशों के खिलाफ अपनी जंग जारी रखते हुए ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ मुहिम के 337वें दिन 73 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से 2.8 किलो हेरोइन, 252 ग्राम अफीम, 386 नशीली गोलियाँ/कैप्सूल और 14,730 रुपये की ड्रग मनी बरामद की। इस तरह केवल 337 दिनों में गिरफ्तार किए गए कुल नशा तस्करों की संख्या 47,355 हो गई है। नशा छुड़ाऊ मुहिम के हिस्से के रूप में, पंजाब पुलिस ने आज 30 व्यक्तियों को नशा छुड़ाने और पुनर्वास इलाज करवाने के लिए राजी किया है।