Sunday, October 04, 2026
BREAKING
• भारत में बनेंगे 48 "सुपर हरक्यूलिस"? लॉकहीड मार्टिन ने चल दिया ₹1 लाख करोड़ का बड़ा दांव! • Latest News from Punjab October 2026 • Latest News from Haryana October 2026 • उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली में पांचवें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में उद्घाटन भाषण दिया • केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने तुर्की से कुख्यात नार्को-ट्रैफिकिंग किंगपिन नवप्रीत सिंह के प्रत्यर्पण की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने पर सभी एजेंसियों को बधाई दी • भारतीय नौसेना के जहाज सह्याद्रि और कुलिश ने एआईएमई-2026 में अपनी भागीदारी पूरी की • डीएआरई/आईसीएआर ने देशभर में स्वच्छता अभियान और सफाई मित्रों के सम्मान के साथ विशेष अभियान 6 शुरू किया • Horoscope Today: दैनिक राशिफल 04 अक्तूबर, 2026 • 100 मिलियन बैरल का बड़ा दांव! तेल की आग बुझाने उतरे दुनिया के सात दिग्गज, क्या अब सचमुच सस्ता होगा डीज़ल? • Latest News from Punjab October 2026

संपादकीय

भारत में बनेंगे 48 "सुपर हरक्यूलिस"? लॉकहीड मार्टिन ने चल दिया ₹1 लाख करोड़ का बड़ा दांव!

October 04, 2026 05:20 PM

 भूपिंद्र शर्मा, चंडीगढ़ः भारतीय आसमान में इन दिनों एक बहुत बड़ी बाज़ी सज रही है। अमेरिकी रक्षा दिग्गज लॉकहीड मार्टिन ने भारत के मध्यम परिवहन विमान कार्यक्रम के लिए लगभग 10.5 अरब डॉलर, यानी करीब एक लाख करोड़ रुपये की बोली का खाका पेश किया है। सवाल सिर्फ़ यह नहीं है कि सौदा किसे मिलेगा। असली सवाल यह है कि इस सौदे के बहाने भारत का रक्षा-विनिर्माण किस दिशा में जाएगा।

रक्षा मंत्रालय ने 12 अगस्त 2026 को 60 मध्यम परिवहन विमानों के लिए औपचारिक प्रस्ताव-अनुरोध यानी आरएफपी जारी किया। इसकी अनुमानित कीमत करीब एक लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है, और बोलियाँ जमा करने की समय-सीमा दिसंबर 2026 की शुरुआत रखी गई है। यह कार्यक्रम वायुसेना के पुराने पड़ चुके एएन-32 जैसे विमानों की जगह लेने के लिए है। इन विमानों ने दशकों तक देश के दूरस्थ इलाकों में माल और जवान पहुँचाए हैं, लेकिन अब उनकी जगह नई पीढ़ी के विमान चाहिए।

दिलचस्प बात यह है कि शुरुआती जानकारी-अनुरोध में 80 विमानों तक की बात थी, पर अंतिम आरएफपी में संख्या घटकर 60 रह गई, जबकि आगे और विमान लेने का विकल्प खुला रखा गया है। ज़रूरत भी साफ़ है। लद्दाख की ऊँचाइयों और पूर्वोत्तर के कच्चे हवाई पट्टों पर ऐसे विमान चाहिए जो कठिन परिस्थितियों में भी भरोसे से उड़ान भर सकें।

कंपनी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डैन टेनी ने बताया कि लॉकहीड भारत में अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने को तैयार है। हालाँकि यह विस्तार इस शर्त पर टिका है कि उसे यह ठेका मिले। प्रस्ताव के अनुसार 60 में से 12 सी-130जे सुपर हरक्यूलिस सीधे तैयार हालत में भेजे जाएँगे, जबकि बाकी 48 विमान भारत में ही बनेंगे। इस काम में उसकी साझेदार होगी टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स।

यह साझेदारी नई नहीं है। टाटा पहले से सी-130जे के ढाँचागत हिस्से और पूँछ वाले भाग भारत में बना रही है। कंपनी का दावा है कि इस कार्यक्रम से जुड़े भारतीय आपूर्तिकर्ताओं की संख्या 500 से ऊपर है, जिनमें लगभग 140 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम हैं, और इससे 70 करोड़ डॉलर से अधिक का निर्यात हो चुका है। इसके साथ टाटा से विमानों के रखरखाव की सुविधाएँ खड़ी करने की भी उम्मीद है, ताकि बिक्री के बाद की सेवा देश के भीतर ही मिल सके।

प्रस्ताव का सबसे चर्चित हिस्सा वायुसेना के पास पहले से मौजूद 12 सी-130जे को नए मानक पर उन्नत करने की पेशकश है। अगर यह हो गया, तो वायुसेना के पास एक जैसी बनावट वाले 72 विमानों का बेड़ा होगा। इससे प्रशिक्षण, पुर्ज़ों की आपूर्ति और रखरखाव आसान और सस्ता हो सकता है।

लेकिन यहाँ एक अहम बारीकी ध्यान देने लायक है। मौजूदा विमानों का उन्नयन एक अलग अनुबंध पर निर्भर बताया जा रहा है और वह मौजूदा परिवहन विमान निविदा का स्वाभाविक हिस्सा नहीं है। यानी 72 विमानों का एकरूप बेड़ा तभी बनेगा, जब भारत सरकार दोनों फ़ैसले एक साथ ले। इसलिए यह तस्वीर जितनी चमकदार दिखती है, उतनी पक्की अभी नहीं है।

लॉकहीड को मैदान खाली नहीं मिलेगा। सबसे मज़बूत चुनौती ब्राज़ील की एम्ब्रेयर के सी-390 मिलेनियम से मानी जा रही है, जिसके साथ भारत में महिंद्रा जुड़ी है। इसके अलावा अदाणी, एचएएल और रिलायंस जैसे भारतीय समूहों के भी अपने वैश्विक साझेदारों के साथ मैदान में उतरने की उम्मीद है। हर बोलीदाता से स्थानीय निर्माण की कड़ी शर्तों पर खरा उतरने की अपेक्षा होगी।

तकनीकी तुलना भी दिलचस्प है। सी-130जे लगभग 19 टन तक का भार ले जाता है, यानी क्षमता में वह कुछ कम पड़ सकता है। लेकिन उसके पक्ष में सबसे बड़ा तर्क अनुभव का है। भारतीय वायुसेना इसे पहले से उड़ा रही है, पायलट और तकनीशियन इससे परिचित हैं, और कलपुर्ज़ों की शृंखला भी आंशिक रूप से देश में मौजूद है। दूसरी ओर नए विमान का दावा आधुनिक तकनीक और अधिक क्षमता का है। यानी मुकाबला पुराने भरोसे और नई संभावना के बीच है।

यह सौदा सिर्फ़ विमान खरीदने का मामला नहीं है। असली दाँव "मेक इन इंडिया" की साख पर है। अगर अड़तालीस विमान सचमुच भारत में बनते हैं, तो इसका मतलब होगा नई असेंबली लाइनें, हज़ारों कुशल रोज़गार और छोटे उद्यमों के लिए लंबे समय के ऑर्डर। साथ ही तैयार विमान आयात करने के बजाय स्वदेशी उत्पादन का आधार मज़बूत होगा।

फिर भी सावधानी ज़रूरी है। बड़ी कंपनियों के वादे तभी मायने रखते हैं, जब वे अनुबंध की शर्तों में बदलें। प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कितना होगा, निर्यात की छूट मिलेगी या नहीं, और कीमतें कितनी प्रतिस्पर्धी होंगी, इन सवालों के जवाब ही असली तस्वीर तय करेंगे। अभी तक जो सामने है, वह एक प्रस्ताव और इरादे की घोषणा है, किसी जीते हुए सौदे की मुहर नहीं।

दिसंबर की समय-सीमा नज़दीक आते ही हलचल तेज़ होगी। साझेदारियाँ बनेंगी, बिगड़ेंगी और कीमतों पर तीखी खींचतान दिखेगी। सरकार के सामने चुनौती यह होगी कि वह वायुसेना की तात्कालिक ज़रूरत, लागत और स्वदेशीकरण के लक्ष्य, इन तीनों के बीच संतुलन कैसे साधे।

अंततः जीत चाहे लॉकहीड की हो या एम्ब्रेयर की, कसौटी एक ही रहेगी: क्या यह सौदा भारत को सचमुच परिवहन विमान बनाने वाला देश बना पाएगा, या हम सिर्फ़ असेंबली तक सीमित रह जाएँगे? आने वाले महीने इस सवाल का जवाब देंगे, और तब तक भारतीय आसमान पर नज़रें टिकी रहेंगी।

 

Have something to say? Post your comment

और संपादकीय समाचार

100 मिलियन बैरल का बड़ा दांव! तेल की आग बुझाने उतरे दुनिया के सात दिग्गज, क्या अब सचमुच सस्ता होगा डीज़ल?

100 मिलियन बैरल का बड़ा दांव! तेल की आग बुझाने उतरे दुनिया के सात दिग्गज, क्या अब सचमुच सस्ता होगा डीज़ल?

क्या मोदी ही रोकेंगे यूक्रेन युद्ध? पुतिन के एक बयान से दुनिया में मची हलचल

क्या मोदी ही रोकेंगे यूक्रेन युद्ध? पुतिन के एक बयान से दुनिया में मची हलचल

सौ साल की यू पी एस सी: सेवा, सुशासन और जन-विश्वास का नया संकल्प

सौ साल की यू पी एस सी: सेवा, सुशासन और जन-विश्वास का नया संकल्प

बैलेट बनाम ईवीएम: खड़गे के एक दांव ने क्यों बढ़ा दी सियासी गलियारों की बेचैनी?

बैलेट बनाम ईवीएम: खड़गे के एक दांव ने क्यों बढ़ा दी सियासी गलियारों की बेचैनी?

व्यापार नहीं, आतंक है असली काँटा? जयशंकर के एक बयान से वॉशिंगटन में हलचल

व्यापार नहीं, आतंक है असली काँटा? जयशंकर के एक बयान से वॉशिंगटन में हलचल

पंजाब का चुनावी दंगल शुरू : आप ने महँगाई भत्ते से मुलाज़िमों को मनाया तो अब भाजपा हाई कमान अमित शाह की नशे के मुद्दे पर एंट्री, किसका दाँव पड़ेगा भारी?

पंजाब का चुनावी दंगल शुरू : आप ने महँगाई भत्ते से मुलाज़िमों को मनाया तो अब भाजपा हाई कमान अमित शाह की नशे के मुद्दे पर एंट्री, किसका दाँव पड़ेगा भारी?

वैकल्पिक ईंधन से रेलवे की उड़ान: हाइड्रोजन के बाद अब एलएनजी यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस से दौड़ेगी भारत की पहली ट्रेन

वैकल्पिक ईंधन से रेलवे की उड़ान: हाइड्रोजन के बाद अब एलएनजी यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस से दौड़ेगी भारत की पहली ट्रेन

महाराष्ट्र पर सूखे का साया: 265 तालुके संकट में, सरकार का 12-सूत्री राहत पैकेज बचा पाएगा किसानों की उम्मीदें?

महाराष्ट्र पर सूखे का साया: 265 तालुके संकट में, सरकार का 12-सूत्री राहत पैकेज बचा पाएगा किसानों की उम्मीदें?

शी जिनपिंग को मिला ट्रंप का शाही स्वागत, लेकिन ताइवान-टैरिफ पर टकराव अब भी बरकरार

शी जिनपिंग को मिला ट्रंप का शाही स्वागत, लेकिन ताइवान-टैरिफ पर टकराव अब भी बरकरार

चुनाव आयोग फिर तूफ़ान के केंद्र में: अवमानना याचिका, 48 घंटे का अल्टीमेटम और वह

चुनाव आयोग फिर तूफ़ान के केंद्र में: अवमानना याचिका, 48 घंटे का अल्टीमेटम और वह "दबी हुई असहमति" जिसने सबको चौंका दिया

By using our site, you agree to our Terms & Conditions and Disclaimer     Dismiss