Sunday, January 18, 2026
BREAKING
Weather: गुजरात में बाढ़ से हाहाकार, अब तक 30 लोगों की मौत; दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश की चेतावनी जारी दैनिक राशिफल 13 अगस्त, 2024 Hindenburg Research Report: विनोद अदाणी की तरह सेबी चीफ माधबी और उनके पति धवल बुच ने विदेशी फंड में पैसा लगाया Hindus in Bangladesh: मर जाएंगे, बांग्लादेश नहीं छोड़ेंगे... ढाका में हजारों हिंदुओं ने किया प्रदर्शन, हमलों के खिलाफ उठाई आवाज, रखी चार मांग Russia v/s Ukraine: पहली बार रूसी क्षेत्र में घुसी यूक्रेनी सेना!, क्रेमलिन में हाहाकार; दोनों पक्षों में हो रहा भीषण युद्ध Bangladesh Government Crisis:बांग्लादेश में शेख हसीना का तख्तापलट, सेना की कार्रवाई में 56 की मौत; पूरे देश में अराजकता का माहौल, शेख हसीना के लिए NSA डोभाल ने बनाया एग्जिट प्लान, बौखलाया पाकिस्तान! तीज त्यौहार हमारी सांस्कृतिक विरासत, इन्हें रखें सहेज कर- मुख्यमंत्री Himachal Weather: श्रीखंड में फटा बादल, यात्रा पर गए 300 लोग फंसे, प्रदेश में 114 सड़कें बंद, मौसम विभाग ने 7 अगस्त को भारी बारिश का जारी किया अलर्ट Shimla Flood: एक ही परिवार के 16 सदस्य लापता,Kedarnath Dham: दो शव मिले, 700 से अधिक यात्री केदारनाथ में फंसे Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने एससी एसटी की सब-कैटेगरी में आरक्षण को दी मंज़ूरी

संपादकीय

The rupee is faltering under pressure from the dollar, but a strong comeback is certain if the right policy measures are taken.: डॉलर के दबाव में डगमगाता रुपया, लेकिन सही नीतिगत कदम उठते ही मजबूत वापिसी भी तय !

November 26, 2025 08:43 PM

भुपेंद्र शर्मा, मुख्य संपादक , सिटी दर्पण, चंडीगढ़ 

जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 4.3 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एशिया की प्रमुख मुद्राओं में भारत की स्थिति को लेकर गंभीर चिंताओं का संकेत है, जहां रुपया इस वर्ष सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करंसी बनकर उभरा है। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था भू-राजनीतिक तनावों, तेल बाज़ार की उथल-पुथल और बड़े आर्थिक देशों के मौद्रिक फैसलों से झूझ रही है। मगर सवाल यह है कि रुपये में इतनी तेज़ गिरावट क्यों आई, और इसका भारत की अर्थव्यवस्था पर आगे क्या असर पड़ सकता है? रुपये की कमजोरी के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारक जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण है अमेरिका की कड़ी मौद्रिक नीति। फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों को उच्च स्तर पर बनाए रखने से डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ और उभरती अर्थव्यवस्थाओं से पूंजी का बहिर्वाह तेज़ हो गया। जब निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की तलाश में होते हैं, तो वे डॉलर की ओर रुख करते हैं, जिससे विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बढ़ता है। भारतीय रुपया भी इसी प्रक्रिया का शिकार बना।इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय व्यापार संतुलन भी रुपये पर भारी पड़ता दिख रहा है। भारत का व्यापार घाटा इस वर्ष कई महीनों में रिकॉर्ड स्तर के आसपास रहा। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों ने भारत के आयात बिल में अतिरिक्त दबाव डाल दिया। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है, इसलिए जब तेल महंगा होता है तो विदेशी मुद्रा की मांग बढ़ती है और घरेलू मुद्रा कमजोर होती जाती है।विदेशी मुद्रा विश्लेषकों का कहना है कि रुपये की मौजूदा स्थिति अस्थायी दबावों के साथ-साथ संरचनात्मक चुनौतियों का भी नतीजा है। बाज़ार विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर भारत और अमेरिका के बीच लंबित व्यापार समझौता जल्द पूरा नहीं होता है, तो रुपये पर और दबाव बढ़ सकता है। कई विश्लेषकों ने यह चेतावनी भी दी है कि रुपया अगले कुछ महीनों में 1 डॉलर = 90 रुपये के स्तर तक फिसल सकता है। यह अनुमान भले ही अभी आशंकाओं पर आधारित हो, मगर इसे नज़रअंदाज़ करना भी संभव नहीं, क्योंकि बाज़ार मनोविज्ञान अक्सर अपेक्षाओं के आधार पर ही प्रतिक्रिया देता है।भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का रुकना भी चिंता का विषय है। दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में शुल्क, आयात मानकों और सेवाओं को लेकर असहमति है। यह समझौता भारत के निर्यातकों के लिए बड़ा राहत पैकेज साबित हो सकता है, साथ ही विदेशी निवेशकों के भरोसे को भी मजबूत कर सकता है। अगर यह वार्ता आगे बढ़ती है, तो विदेशी विनिमय बाज़ार को सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। मगर देरी से अनिश्चितता बढ़ती है, और यही अनिश्चितता रुपये की कमजोरी का मुख्य कारण बन रही है।देश की मौद्रिक नीति भी इस समीकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारतीय रिज़र्व बैंक ने मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने के लिए ब्याज दरों को स्थिर रखने का निर्णय लिया, लेकिन इससे विदेशी निवेश आकर्षित नहीं हो पा रहा है। जब अमेरिका ऊंची ब्याज दरों पर कायम रहता है और भारत दर वृद्धि नहीं करता, तो ब्याज दरों का अंतर बढ़ जाता है, जिससे डॉलर निवेश अधिक आकर्षक बनता है। इस परिस्थिति में निवेशकों का झुकाव स्वाभाविक रूप से अमेरिकी बाज़ारों की ओर रहता है।रुपये की गिरावट से आम भारतीय पर भी असर पड़ता है। आयातित वस्तुएं महंगी हो जाती हैं, जिसमें ईंधन से लेकर इलेक्ट्रॉनिक सामान और दवाइयां तक शामिल हैं। भारत जैसे देश में जहां उपभोक्ता वस्तुओं का बड़ा हिस्सा आयातित है, यह गिरावट महंगाई को फिर से उकसा सकती है। हालांकि खाद्य मुद्रास्फीति में कुछ नियंत्रण दिखाई दे रहा है, मगर ईंधन और रसायन जैसे सेक्टर रुपये की गिरावट से सीधे प्रभावित होते हैं, और इसका असर धीरे-धीरे उपभोक्ता तक पहुंचता है।इस परिस्थिति में, नीति-निर्माताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। भारत को विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए नीतिगत स्पष्टता और बाहरी निवेशकों को स्थिर वातावरण उपलब्ध कराना होगा। इसके साथ ही, निर्यात क्षमता बढ़ाना और आयात बिल नियंत्रित करना भी अनिवार्य है। कच्चे तेल के विकल्पों और नवीकरणीय ऊर्जा पर अधिक ध्यान देकर भारत मुद्रा दबाव को कम कर सकता है।यह भी सच है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मूलभूत स्थिति अब भी मजबूत है—जी डी पी वृद्धि दर एशिया में सबसे तेज़ है, विदेशी मुद्रा भंडार स्थिर है और बैंकिंग क्षेत्र सुधरा है। लेकिन वैश्विक आर्थिक दबावों के दौर में सिर्फ बुनियादी मजबूती काफी नहीं होती। मुद्रा बाज़ार संवेदनशील होता है और छोटे संकेत भी बड़े उतार-चढ़ाव का कारण बन जाते हैं। अंततः, रुपये की गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने खड़ी चुनौतियों का एक दर्पण है। यह भारत के लिए चेतावनी भी है और अवसर भी। अगर सरकार व्यापार नीतियों में ठोस सुधार करती है, समझौतों को आगे बढ़ाती है, और ऊर्जा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करती है, तो रुपया फिर से स्थिरता की ओर लौट सकता है। मगर अगर इन मुद्दों पर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो विशेषज्ञों की 90 रुपये प्रति डॉलर की आशंका हकीकत का रूप ले सकती है—और इसका प्रभाव पूरे भारतीय आर्थिक ढांचे पर महसूस किया जाएगा।

 

Have something to say? Post your comment

और संपादकीय समाचार

Youthful enthusiasm vs. political inertia: A clash between the new generation of the BJP and the aging Congress leadership: युवा जोश बनाम सियासी जड़ता: भाजपा की नई पीढ़ी और कांग्रेस के बुजुर्ग नेतृत्व की टक्कर

Youthful enthusiasm vs. political inertia: A clash between the new generation of the BJP and the aging Congress leadership: युवा जोश बनाम सियासी जड़ता: भाजपा की नई पीढ़ी और कांग्रेस के बुजुर्ग नेतृत्व की टक्कर

The world is watching Delhi's toxic air: Foreign advisories and the Beijing model have raised concerns.: दिल्ली की जहरीली हवा पर दुनिया की नजर: विदेशी एडवाइजरी और बीजिंग मॉडल ने बढ़ाई चिंता

The world is watching Delhi's toxic air: Foreign advisories and the Beijing model have raised concerns.: दिल्ली की जहरीली हवा पर दुनिया की नजर: विदेशी एडवाइजरी और बीजिंग मॉडल ने बढ़ाई चिंता

UNESCO grants global recognition to Diwali! The Prime Minister says,

UNESCO grants global recognition to Diwali! The Prime Minister says, "It is not just a festival, it is the soul of our civilization."ਛ यूनेस्को ने दीपावली को दी वैश्विक मान्यता! प्रधानमंत्री बोले— “यह सिर्फ त्योहार नहीं, हमारी सभ्यता की आत्मा है”

Will India become a $1.2 trillion bio-economy superpower by 2047? Experts suggest: भारत 2047 तक बनेगा 1.2 ट्रिलियन डॉलर की बायो-इकोनॉमी का महाशक्ति? विशेषज्ञों ने संकेत दिए

Will India become a $1.2 trillion bio-economy superpower by 2047? Experts suggest: भारत 2047 तक बनेगा 1.2 ट्रिलियन डॉलर की बायो-इकोनॉमी का महाशक्ति? विशेषज्ञों ने संकेत दिए

The Indigo crisis has exposed the weaknesses of government aviation policies, and the government will have to take concrete steps for the future.: इंडिगो संकट ने उजागर की सरकारी एविएशन नीतियों की कमजोरियां, भविष्य के लिए सरकार को उठाने होंगे ठोस कदम

The Indigo crisis has exposed the weaknesses of government aviation policies, and the government will have to take concrete steps for the future.: इंडिगो संकट ने उजागर की सरकारी एविएशन नीतियों की कमजोरियां, भविष्य के लिए सरकार को उठाने होंगे ठोस कदम

The Quran doesn't mandate female circumcision, so why does the Supreme Court's

The Quran doesn't mandate female circumcision, so why does the Supreme Court's "tough questioning" shake the system?: कुरान में नहीं आदेश, फिर क्यों जारी है महिला खतना? सुप्रीम कोर्ट की ‘कड़ी पूछताछ’ से हिला सिस्टम

Modi's message resonated across the world: 'New India bows to no one': पूरे विश्व में गूंजा मोदी का संदेश: ‘नया भारत किसी के सामने झुकता नहीं’

Modi's message resonated across the world: 'New India bows to no one': पूरे विश्व में गूंजा मोदी का संदेश: ‘नया भारत किसी के सामने झुकता नहीं’

Delhi's air poses a growing threat – doctors say the situation is such that it's best to leave the city!: दिल्ली की हवा से बढ़ा खतरा—डॉक्टर्स बोले, हालात ऐसे हैं कि शहर छोड़ना ही बेहतर !

Delhi's air poses a growing threat – doctors say the situation is such that it's best to leave the city!: दिल्ली की हवा से बढ़ा खतरा—डॉक्टर्स बोले, हालात ऐसे हैं कि शहर छोड़ना ही बेहतर !

Delhi has become the toxic air capital of the country, Chandigarh and Haryana are also in danger – PM Modi expressed serious concern!: दिल्ली बनी देश की जहरीली हवा की राजधानी, चंडीगढ़-हरियाणा भी खतरे में—पी एम मोदी ने जताई कड़ी चिंता !

Delhi has become the toxic air capital of the country, Chandigarh and Haryana are also in danger – PM Modi expressed serious concern!: दिल्ली बनी देश की जहरीली हवा की राजधानी, चंडीगढ़-हरियाणा भी खतरे में—पी एम मोदी ने जताई कड़ी चिंता !

बिहार में एनडीए भी परिवारवाद की गिरफ्त में ! 29 ‘विरासत वाले’ विधायक बन गए सियासत का नया सच

बिहार में एनडीए भी परिवारवाद की गिरफ्त में ! 29 ‘विरासत वाले’ विधायक बन गए सियासत का नया सच

By using our site, you agree to our Terms & Conditions and Disclaimer     Dismiss