माघ मेला 2026 के तहत पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर संगम नगरी में आस्था का अद्भुत सैलाब देखने को मिला। 4 जनवरी 2026 को तड़के ब्रह्ममुहूर्त से ही श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर पुण्य स्नान शुरू कर दिया। प्रशासन के अनुसार, दिनभर में 31 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए।
पौष पूर्णिमा से माघ मेले का औपचारिक शुभारंभ माना जाता है। इस दिन का विशेष धार्मिक महत्व है, जिसके चलते देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ साधु-संतों, कल्पवासियों और श्रद्धालुओं का विशाल जमावड़ा संगम तट पर उमड़ा। “हर हर गंगे” और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संगम क्षेत्र पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।
भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने चाक-चौबंद व्यवस्था की थी। सुरक्षा के लिए व्यापक पुलिस बल, पीएसी और एनडीआरएफ की टीमें तैनात रहीं। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी की गई। घाटों पर स्नान के लिए बैरिकेडिंग, सुचारु प्रवेश-निकास मार्ग और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
स्वास्थ्य सेवाओं के मोर्चे पर भी पुख्ता इंतजाम रहे। अस्थायी अस्पताल, एंबुलेंस और मेडिकल कैंप चौबीसों घंटे सक्रिय रहे। ठंड के मद्देनज़र अलाव, पेयजल और स्वच्छता सुविधाओं को प्राथमिकता दी गई। नगर निगम और मेला प्रशासन की टीमों ने सफाई व्यवस्था को लगातार दुरुस्त रखा, ताकि संगम क्षेत्र स्वच्छ और सुरक्षित बना रहे।
कल्पवासियों के शिविरों में धार्मिक प्रवचन, भजन-कीर्तन और यज्ञ-हवन का आयोजन हुआ। संत-महात्माओं ने स्नान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए धर्म, संयम और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया। श्रद्धालुओं ने दान-पुण्य किया और जरूरतमंदों को अन्न-वस्त्र दान कर पुण्य अर्जित किया।
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि आने वाले स्नान पर्वों—मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी और माघी पूर्णिमा—को लेकर भी विशेष तैयारियां की जा रही हैं। यातायात प्रबंधन, सुरक्षा और सुविधाओं को और मजबूत किया जाएगा, ताकि माघ मेला 2026 शांतिपूर्ण, सुरक्षित और श्रद्धालुओं के लिए यादगार बन सके।