बीएमसी चुनाव 2026 को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में सियासी तापमान तेज हो गया है। 4 जनवरी 2026 को उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बयान ने मुंबई महानगरपालिका चुनाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “मुंबई का मेयर हिंदू-मराठी होगा,” और इसके साथ ही महायुति ने निकाय चुनाव के लिए पूरी ताकत झोंकने का संकेत दे दिया है।
फडणवीस के इस एलान को बीएमसी चुनाव से पहले महायुति की आक्रामक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। शिवसेना (शिंदे गुट), भाजपा और एनसीपी (अजित पवार गुट) से मिलकर बनी महायुति ने संकेत दिए हैं कि इस बार चुनावी मुकाबला सिर्फ नगर प्रशासन का नहीं, बल्कि मुंबई की राजनीतिक और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा होगा। महायुति नेताओं का कहना है कि मुंबई की जनता विकास, सुरक्षा और सुशासन के मुद्दों पर वोट देगी।
एक जनसभा को संबोधित करते हुए फडणवीस ने कहा कि मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है और इसके नेतृत्व में मराठी अस्मिता और हिंदुत्व दोनों का संतुलन झलकना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि महायुति ने पिछले कुछ वर्षों में बुनियादी ढांचे, परिवहन और शहरी विकास के क्षेत्र में ठोस काम किया है, जिसका लाभ बीएमसी चुनाव में मिलेगा। उनके मुताबिक, जनता अब “स्थिर और मजबूत नेतृत्व” चाहती है।
बीएमसी देश की सबसे अमीर नगर निकाय मानी जाती है और इसका बजट कई राज्यों से भी अधिक है। ऐसे में इसके मेयर पद को लेकर सियासी दलों के बीच मुकाबला हमेशा तीखा रहा है। इस बार भी चुनाव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। फडणवीस के बयान के बाद विपक्षी दलों ने इसे ध्रुवीकरण की राजनीति करार दिया है, जबकि महायुति इसे जनभावनाओं से जुड़ा मुद्दा बता रही है।
महायुति ने चुनावी तैयारियों के तहत वार्ड स्तर पर संगठन को मजबूत करने, बूथ प्रबंधन और डिजिटल प्रचार पर जोर देना शुरू कर दिया है। गठबंधन नेताओं का कहना है कि मुंबई के हर वर्ग तक पहुंचने के लिए स्थानीय मुद्दों—जैसे सफाई, पानी, ट्रैफिक और आवास—को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही, मराठी मतदाताओं के साथ-साथ शहरी मध्यम वर्ग और युवाओं को साधने की रणनीति बनाई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीएमसी चुनाव 2026 महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। फडणवीस का बयान जहां समर्थकों में उत्साह भर रहा है, वहीं विपक्ष के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, मुंबई की सियासत में बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।