कांग्रेस पार्टी ने आगामी पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। 4 जनवरी 2026 को पार्टी संगठन में हुए अहम फेरबदल और रणनीतिक बैठकों के बाद यह साफ हो गया है कि कांग्रेस इस बार चुनावी मैदान में कोई कसर छोड़ने के मूड में नहीं है। इसी क्रम में प्रियंका गांधी वाड्रा को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसे पार्टी के चुनावी अभियान के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व ने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और चुनावी संदेश को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाने के लिए यह फैसला लिया है। प्रियंका गांधी को पांचों राज्यों में चुनावी समन्वय, प्रचार रणनीति और संगठनात्मक मजबूती की जिम्मेदारी दी गई है। उनका फोकस खास तौर पर युवाओं, महिलाओं और शहरी मतदाताओं को साधने पर रहेगा।
पार्टी के भीतर यह माना जा रहा है कि प्रियंका गांधी की सक्रिय भूमिका से कांग्रेस को उन क्षेत्रों में मजबूती मिलेगी, जहां हाल के वर्षों में पार्टी कमजोर पड़ी है। उत्तर भारत में उनकी राजनीतिक पकड़ और जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हो सकता है। इसी वजह से उन्हें चुनावी रणनीति का अहम चेहरा बनाया गया है।
कांग्रेस अध्यक्ष और शीर्ष नेतृत्व ने साफ संकेत दिए हैं कि इस बार चुनाव संगठन बनाम सत्ता की लड़ाई के रूप में लड़े जाएंगे। इसके तहत बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने, सोशल मीडिया और डिजिटल प्रचार को धार देने तथा स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की रणनीति अपनाई जा रही है। प्रियंका गांधी को इन सभी पहलुओं में समन्वय की भूमिका दी गई है।
पांच राज्यों के चुनावों को 2026 की राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है। इन राज्यों में कांग्रेस के प्रदर्शन को आगामी राजनीतिक दिशा का संकेतक माना जाएगा। ऐसे में पार्टी नेतृत्व किसी भी तरह का जोखिम लेने के पक्ष में नहीं है। उम्मीदवार चयन से लेकर प्रचार अभियान तक हर कदम सोच-समझकर उठाया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रियंका गांधी की जिम्मेदारी बढ़ने से कांग्रेस के चुनावी अभियान में नई ऊर्जा आएगी। हालांकि, चुनौती यह होगी कि संगठनात्मक एकजुटता और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन कैसे सुनिश्चित किया जाए। कुल मिलाकर, कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि पांच राज्यों के चुनावों में वह पूरी ताकत के साथ उतरने जा रही है और प्रियंका गांधी की नई भूमिका इस रणनीति का केंद्रबिंदु होगी।