रोटरी डिस्ट्रिक्ट की वार्षिक जिला कॉन्फ्रेंस ‘अभ्युदय’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष
राज्यपाल ने 1000 बालिकाओं को साइकिलें तथा दृष्टिबाधित बच्चों को मेटा ग्लासेस वितरित किए
स्वास्थ्य, सिविल सेवा और मीडिया क्षेत्र की विशिष्ट हस्तियों को एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मान
चंडीगढ़, 31 जनवरी- हरियाणा के राज्यपाल प्रोफेसर असीम कुमार घोष ने गुरुग्राम के सेक्टर-64 स्थित औरेना कन्वेंशन सेंटर में रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 द्वारा आयोजित वार्षिक जिला सम्मेलन ‘अभ्युदय’ में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए उन्होंने सेवा, एकता, सामाजिक उत्तरदायित्व और समावेशी विकास को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया।
राज्यपाल ने कहा कि रोटरी इंटरनेशनल का मूल मंत्र ‘यूनाइट फॉर गुड’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि समाज के प्रति समर्पण, करुणा और निस्वार्थ सेवा की सशक्त अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति इस बात से आंकी जाती है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक कितना पहुंच रहा है। यदि गरीब, वंचित और जरूरतमंद वर्ग पीछे रह जाते हैं, तो विकास अधूरा रह जाता है।
सम्मेलन के दौरान सामाजिक सरोकारों से जुड़ी महत्वपूर्ण पहलों के अंतर्गत राज्यपाल ने 1000 बालिकाओं को साइकिलें वितरित कीं। इससे बालिकाओं की स्कूल तक पहुंच सुगम होगी और उनकी शिक्षा निरंतर जारी रह सकेगी। इसके अतिरिक्त नेशनल एसोसिएशन ऑफ ब्लाइंड के बच्चों को लगभग 200 मेटा ग्लासेस प्रदान किए गए, जो आधुनिक तकनीक के माध्यम से उनकी पढ़ाई, पढ़ने-लिखने और दैनिक गतिविधियों में सहायता करेंगे।
राज्यपाल ने ‘लास्ट माइल डेवलपमेंट’ की अवधारणा पर विशेष बल देते हुए कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन और समान अवसरों को समाज के अंतिम छोर तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने रोटेरियनों से आह्वान किया कि वे अपनी नेतृत्व क्षमता, संसाधनों और सेवा भावना का उपयोग कर समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान में और अधिक सक्रिय भूमिका निभाएं।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डॉ. रविंद्र गुगलानी ने जानकारी देते हुए बताया कि डिस्ट्रिक्ट 3011 के अंतर्गत दिल्ली-एनसीआर, गुरुग्राम, हरियाणा, पलवल, रोहतक सहित अनेक क्षेत्रों में 135 से अधिक रोटरी क्लब कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त 235 से अधिक इंटरैक्ट क्लब स्कूल स्तर पर तथा 75 से 100 रोट्रैक्ट क्लब कॉलेज स्तर पर युवाओं को सामाजिक सेवा गतिविधियों से जोड़ रहे हैं। ये क्लब शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, मातृत्व एवं स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, सामुदायिक विकास और दिव्यांगजन सहायता जैसे क्षेत्रों में निरंतर प्रकल्प चला रहे हैं।
सम्मेलन स्थल पर विभिन्न क्लबों की उपलब्धियों, परियोजनाओं और सामाजिक प्रभाव को डिजिटल स्क्रीन, प्रदर्शनी और प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया, जिससे प्रतिभागियों को रोटरी के व्यापक सेवा कार्यों की जानकारी मिली।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली हस्तियों को ‘एक्सीलेंस अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया।
स्वास्थ्य क्षेत्र में डॉ. डी.एस. राणा चेयरमैन, सर गंगा राम हॉस्पिटल ट्रस्ट को निःस्वार्थ स्वास्थ्य सेवा में उल्लेखनीय नेतृत्व के लिए,
सिविल सेवा में टी.सी. गुप्ता, मुख्य आयुक्त, हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन को पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित प्रशासन के लिए,
तथा मीडिया क्षेत्र में अमिश देवगन मैनेजिंग एडिटर, न्यूज़18 इंडिया को जिम्मेदार और प्रभावशाली पत्रकारिता के लिए सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर राज्यपाल की धर्मपत्नी श्रीमती मित्रा घोष, एडीजे कुमुद गुगनानी, मोनिका गुगनानी, डिस्ट्रिक्ट सेक्रेटरी रोटेरियन संजीव वाधवा डिस्ट्रिक्ट एग्जीक्यूटिव सेक्रेटरी हनीश महेंद्रू, सोनल बंसल, इनरव्हील की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, रोटेरियन राधिका, रोटरी पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, विभिन्न क्लबों के सदस्य और बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित रहे।
भारतीय मिट्टी की खुशबू को बिखेरता है खो-खो खेल : नायब सिंह सैनी
मुख्यमंत्री ने खो-खो एसोसिएशन को 21 लाख रुपए देने की करी घोषणा
वर्ष 2036 के ओलंपिक तक देश को एक वैश्विक खेल महाशक्ति के रूप में स्थापित करने का प्रधानमंत्री का संकल्प
चंडीगढ़, 31 जनवरी-हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि खो-खो केवल एक खेल नहीं है, यह हमारी मिट्टी की खुशबू है। यह ऐसा खेल है जो हमें सिखाता है कि संसाधनों की कमी कभी भी प्रतिभा के मार्ग में बाधा नहीं बन सकती। इसमें न तो महंगे उपकरणों और न ही बड़े मैदानों की आवश्यकता होती है। इसमें फुर्ती, रणनीति, टीम वर्क, अनुशासन और तीव्र निर्णय क्षमता की आवश्यकता होती है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शनिवार को केशव पार्क में 35वीं सब जूनियर नैशनल खो-खो चैम्पियनशिप (लडक़े, लड़कियां) के उदघाटन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि के तौर पर सम्बोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधिवत रूप से खेलों के शुभारंभ की घोषणा की तथा एसोसिएशन को 21 लाख रुपए देने की घोषणा की और खिलाडिय़ों से मिलकर परिचय भी लिया।
इस मौके पर कैबिनेट मंत्री कृष्ण लाल पंवार और राज्यसभा के सासंद सुभाष बराला ने भी खिलाडिय़ों को सम्बोधित किया तथा आयोजकों को बेहतरीन आयोजन के लिए बधाई दी।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा में खेलों के लिए एक स्पष्ट और दूरदर्शी विजन तैयार किया। इसका उद्देश्य था हर बच्चे को खेल से जोड़ना, हर गांव में खेल का मैदान विकसित करना और हर उस युवा को अवसर देना, जिसमें खेल के प्रति जुनून और क्षमता है। इसी उद्देश्य से हम प्रदेश में वर्षभर विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को वर्ष 2036 के ओलंपिक के लिए तैयार करने और देश को एक वैश्विक खेल महाशक्ति के रूप में स्थापित करने का सपना देखा है। खेलो इंडिया, फिट इंडिया जैसे अभियान इसी सोच का परिणाम हैं। हरियाणा को खेलों की नर्सरी कहा जाता है, जहां से निकले खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि मुझे अत्यंत हर्ष और गौरव का अनुभव हो रहा है, यह वही धरती है जहां युगों पूर्व भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्म, कर्तव्य और अनुशासन का अमर संदेश दिया था। इसी धरती से खो-खो जैसे भारतीय पारंपरिक खेल के माध्यम से अनुशासन, समर्पण, टीम भावना और राष्ट्र एकता का संदेश पूरे देश में गूंज रहा है। यह केवल एक खेल प्रतियोगिता का शुभारंभ नहीं है, बल्कि भारत की खेल संस्कृति, युवा शक्ति और उज्ज्वल भविष्य का उत्सव है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में इस स्तर की प्रतियोगिता हरियाणा में आयोजित हुई थी और आज लगभग 12-13 वर्षों के बाद हम पुन: इस राष्ट्रीय खेल महाकुंभ के साक्षी बन रहे हैं। भारत के सभी राज्यों एवं अन्य खेल इकाइयों की 34 टीमें इस प्रतियोगिता में भाग ले रही हैं, जो यह दर्शाता है कि खो-खो जैसे पारंपरिक खेल के प्रति देशभर में कितना उत्साह है। यह प्रतियोगिता 5 दिवसीय है और इसका समापन आगामी 4 फरवरी को होगा।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक, गुजरात से लेकर पूर्वोत्तर भारत तक, लगभग 1080 बालक एवं बालिका खिलाड़ी यहां अपनी प्रतिभा, परिश्रम और आत्मविश्वास का प्रदर्शन करने आए हैं। इन खिलाडिय़ों के साथ-साथ 210 समर्पित कोच भी यहां मौजूद हैं, जिन्होंने इन बच्चों को तैयार करने में वर्षों की मेहनत लगाई है। आज यहां भले ही भाषाएं अलग हों, वेशभूषाएं अलग हों और संस्कृतियां अलग हों, लेकिन आप सभी की भावना एक है और वह खेल भावना है। यही खेलों की सबसे बड़ी ताकत है कि वे भेदभाव की दीवारों को तोडक़र हमें एक सूत्र में बांधते हैं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आज जब विश्व के कई देश हमारे पारंपरिक खेलों को अपनाने और उनसे सीखने की ओर अग्रसर हैं, तब यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी बनती है कि हम अपनी इस अनमोल विरासत को संरक्षित भी करें और वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित भी करें। हमारे प्रदेश के खिलाडिय़ों ने ओलंपिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल और विश्व चैंपियनशिप जैसे बड़े मंचों पर भारत का तिरंगा गर्व से लहराया है।
पहले दिन खो-खो के खेले गए कुल 40 मैच
हरियाणा स्पोर्ट्स खो-खो एसोसिएशन के प्रधान जवाहर सिंह यादव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि यह प्रतियोगिता 5 दिन तक चलेगी और इस प्रतियोगिता में पूरे भारत से टीमें आई है। पहले दिन प्रतियोगिता में कुल 40 मैच खेले जा रहे है ।
खो-खो फेडरेशन आफ इंडिया के महासचिव उपकार सिंह विर्क ने कहा कि खो-खो मिट्टी में खेला जाता था, लेकिन अब मिट्टी से लेकर अब यह खेल मैट पर खेला जाता है।
इस मौके पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मोहन लाल कौशिक, पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा, खो-खो फेडरेशन आफ इंडिया के प्रधान सुधांशु मित्तल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
गुरु रविदास जी के समानता, समरसता व सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर चलते हुए अंत्योदय के लिए वचनबद्ध है सरकार : नायब सिंह सैनी
कुरुक्षेत्र के उमरी में 5 एकड़ भूमि पर 124 करोड़ रुपए से किया जाएगा गुरु रविदास धाम का निर्माण, 90 करोड़ रुपए के कामों के टेंडर किए जारी
20 वर्षों से एक स्थान पर रहने वाले अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों को पॉलिसी बनाकर दिया जाएगा मालिकाना हक: मुख्यमंत्री
एससी कम्पोनेंट प्लान के पैसों को एससी समाज के लिए ही प्रयोग करने के लिए सत्र में प्रावधान लाकर किया जाएगा लागू
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने संत गुरु रविदास जी की 649 वीं जयंती के राज्य स्तरीय कार्यक्रम को किया सम्बोधित
चंडीगढ़,31 जनवरी - हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने घोषणा की हैं कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति के जो लोग 20 साल से एक स्थान पर निवास कर रहे है, उन्हें मालिकाना हक देने के लिए पॉलिसी बनाकर रियायत दी जाएगी। इसके अलावा एससी कम्पोनेंट प्लान के पैसों को एससी समाज के लिए ही प्रयोग करने के लिए सत्र में प्रावधान लाकर लागू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी शनिवार को कुरुक्षेत्र के उमरी में हरियाणा सरकार की संत महापुरुष सम्मान एवं विचार प्रचार प्रसार योजना के अंतर्गत आयोजित संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 649वीं जयंती पर राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस बीच कार्यक्रम संयोजक एवं प्रदेश के विकास एवं पंचायत मंत्री तथा खनन एवं भू-विज्ञान मंत्री श्री कृष्ण लाल पंवार द्वारा रखी गई मांगों पर बोलते हुए कहा कि औद्योगिक व व्यावसायिक प्रयोग के लिए एचएसआईआईडीसी में पॉलिसी बनाकर छूट का प्रावधान भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसूचित जाति की नौकरियों की क्लास ए व बी में पदोन्नति व क्रीमीलेयर के मापदंडों को 31 मार्च 2026 तक निर्धारित किया जाना है, इसके लिए सुझाव प्रस्तुत किए जाएं, उन सुझावों के आधार पर मांग को पूरा किए जाने की कोशिश की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने इससे पहले कार्यक्रम में पहुंचने पर संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन भी किया। वहीं, कार्यक्रम में मौजूद संत समाज से भी मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने आर्शीवाद लिया।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में संत शिरोमणि गुरु रविदास जी को नमन करते हुए कहा कि गुरु रविदास का व्यक्तित्व पूर्णिमा के चन्द्रमा की तरह शीतल एवं उज्ज्वल था। उनकी वाणी, उनके आदर्श और उनकी शिक्षाएं अजर-अमर हैं। वे केवल अपने युग के संत नहीं थे, बल्कि हर युग के लिए मानवता के मार्गदर्शक हैं। उन्होंने अपनी काव्य रचनाओं में सरल और व्यावहारिक भाषा का प्रयोग करके आमजन तक अपने विचार पहुंचाए। उन्होंने भक्ति आंदोलन से समाज सुधार करने का साहसिक और ऐतिहासिक काम किया, जिससे उस समय जाति-पाति, अंधविश्वास और ऊंच-नीच में उलझे समाज में एक नई जागृति आई। संत रविदास जी किसी एक जाति या सम्प्रदाय के गुरु नहीं थे। वे पूरी मानव जाति के पथ-प्रदर्शक थे।
उन्होंने कहा कि संत शिरोमणि रविदास जी की समानता व सामाजिक न्याय की परिकल्पना कितनी प्रगतिशील है। वे ऐसा राज्य चाहते थे, जहां सभी को भर पेट अन्न मिले और छोटे-बड़े का कोई भेद न हो। मानव होने के नाते सभी बराबर हों, सभी का जीवन खुशमय व समृद्ध हो और सभी को विकास के समान अवसर मिलें। उनके इसी संदेश को देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के महामंत्र में पिरोया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संत शिरोमणि रविदास जी जैसे संत-महात्माओं,ऋषि-मुनियों,पीर-पैगम्बरों और गुरुओं ने भूली-भटकी मानवता को जीवन का सच्चा रास्ता दिखाया है। ऐसी महान विभूतियों की शिक्षाएं पूरे मानव समाज की धरोहर हैं। उनकी विरासत को सम्भालने व सहेजने की जिम्मेदारी हम सबकी है। प्रदेश सरकार ‘संत-महापुरुष विचार सम्मान एवं प्रसार योजना’ के तहत संतों व महापुरुषों के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का काम कर रही हैं। इस योजना के तहत संत-महापुरुषों की जयंती को राज्य स्तर पर मनाया जाता है। यह राज्य स्तरीय समारोह भी इसी कड़ी में आयोजित किया गया है।
प्रदेश सरकार अंत्योदय के लिए वचनबद्ध हैं: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार गुरु रविदास जी के समानता, समरसता व सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का अनुकरण करते हुए अंत्योदय के लिए वचनबद्ध हैं। उन्होंने इस दौरान मंच से सबसे अनुरोध करते हुए कहा कि अपने बच्चों को शिक्षित करें तथा जात-पात, ऊंच-नीच और साम्प्रदायिकता के भेदभाव को खत्म करने तथा प्रदेश के विकास के लिए मिलकर काम करें। यहीं, संत शिरोमणि गुरु रविदास जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
उन्होंने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की शिक्षाएं और उनका संदेश आज भी हमारे लिए उतने ही उपयोगी हैं, जितने उनके समय में थे। हम उनसे अब भी मार्गदर्शन प्राप्त कर रहे हैं। इसी के अनुरूप सरकार ने हरियाणा में ऐसी नीतियां बनाई हैं, जिससे गरीब से गरीब व्यक्ति का उदार हो,समाज के हर वर्ग का उत्थान हो। सरकार ने अनुसूचित जातियों के कल्याण और अधिकारों के संरक्षण के लिए “हरियाणा राज्य अनुसूचित जाति आयोग” का गठन किया है। साथ ही अनुसूचित जातियों को प्रथम व द्वितीय श्रेणी के पदों में 20 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया है।
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि गरीब के सिर पर अपनी छत हो, यह सपना पूरा करने के लिए ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के तहत 1 लाख 56 हजार मकान दिए गए हैं। साथ ही ‘मुख्यमंत्री आवास योजना’ के तहत शहरों व गांवों में 27 हजार से अधिक गरीब परिवारों को प्लॉट दिए हैं। गांवों में पंचायती भूमि पर बने 500 वर्ग गज तक के मकानों पर काबिज लोगों को मालिकाना हक दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीमारी अमीरी और गरीबी देखकर नहीं आती। इसलिए प्रदेश सरकार ने ऐसी व्यवस्था की है कि धन के अभाव में कोई भी गरीब इलाज से वंचित नहीं रहेगा। ‘आयुष्मान भारत-चिरायु योजना’ के तहत 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज किया जाता है। अब तक 27 लाख लोगों का इलाज करवाया गया है।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा, गंभीर बीमारियों को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने किडनी के रोग से पीड़ित रोगियों के लिए सभी सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में मुफ्त डायलिसिस की सेवाएं शुरू की हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसूचित जाति के छात्रों को ‘डॉ. अम्बेडकर मेधावी छात्रवृत्ति योजना’ के तहत मैट्रिक के बाद उच्च शिक्षा के लिए कक्षा अनुसार 8 हजार रुपये से लेकर 12 हजार रुपये तक की वार्षिक छात्रवृत्ति दी जा रही है। साथ ही अनुसूचित जाति के उन छात्र व छात्राओं, जिनकी पारिवारिक आय 2 लाख 50 हजार रुपये वार्षिक है, को विभिन्न उच्च प्रतियोगी व प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी हेतु निजी संस्थाओं के माध्यम से दो बार तक मुफ्त कोचिंग दिलवाई जाती है। पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत अनुसूचित जाति के पोस्ट मैट्रिक कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्रों को 2 हजार 500 रुपये से लेकर 13 हजार 500 रुपये प्रति वर्ष तक शैक्षणिक भत्ता दिया जाता है। इसके अलावा सभी अनिवार्य नॉन रिफंडेबल फीसों का भुगतान भी किया जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत अनुसूचित जाति के नौवीं व दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले डे-स्कॉलर विद्यार्थियों को 3 हजार 500 रुपये तथा छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों को 7 हजार रुपये प्रतिवर्ष छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। इसके अलावा, सफाई तथा जोखिम वाले व्यवसायों में लगे लोगों के बच्चों को डे-स्कॉलर पहली से 10वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को 3 हजार 500 रुपये और छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों को 8 हजार रुपये छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। सरकार ने बहनों-बेटियों को आर्थिक व सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए ‘दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना’ शुरू की है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2100 रुपये दिये जाते हैं। अब तक तीन किस्तों में 8 लाख 63 हजार से अधिक बहन-बेटियों को 441 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं।
124 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा है धाम
कुरुक्षेत्र के उमरी में 5 एकड़ भूमि में 124 करोड़ रुपए से गुरु रविदास धाम का निर्माण किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने प्रथम चरण में 90 करोड़ रुपए के कामों के टेंडर जारी किए हैं।
गुरु रविदास जी संत होने के साथ ही एक समाज सुधारक और विचारक थे : मनोहर लाल
कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से जुड़े केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि गुरु रविदास जी संत तो थे ही, इसके साथ ही एक समाज सुधारक और विचारक भी रहे। संत रविदास का 15वीं शताब्दी में वाराणसी में जन्म हुआ था। अब वाराणसी में पूर्णिमा को मेले का आयोजन किया जाता है और दूर दराज से लोग वहां पर जाते हैं। यह समाज के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने बहुत शिक्षाएं दी है, शिक्षाएं प्रासंगिक है। वह समय का पालन करते थे और वचनों के पक्के थे। उनका कहना था कि जान जाए पर वचन ना जाए।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि जो नागरिक रविदास जी के संस्कारों व शिक्षाओं को मानते हैं, वो जाति से बाहर निकलें। रविदास के संस्कारों में दृढ़ता थी, वह जाति पाति में विश्वास नहीं रखते थे। उनकी शिक्षाओं में प्रचलित है। समाज के अंदर अच्छा व्यक्ति किसी भी जाति का हो सकता है। प्रत्येक व्यक्ति हमेशा संस्कारों और अपने अच्छे विचारों से जाना जाता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में संतों की शिक्षाओं पर चलते हुए बिना खर्ची पर्ची के नौकरियां दी गई।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने हर वर्ग के लिए योजनाएं तैयार की हैं और आगे भी प्रत्येक वर्ग के लिए योजनाओं को तैयार किया जाएगा। परिवार पहचान पत्र के तहत घर-घर तक सभी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना को लागू किया है।
समानता, मानवता और सामाजिक समरसता का संदेश आज भी प्रासंगिक: मंत्री कृष्ण लाल पंवार
कार्यक्रम के संयोजक एवं प्रदेश के विकास एवं पंचायत मंत्री तथा खनन एवं भू-विज्ञान मंत्री श्री कृष्ण लाल पंवार ने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास जी द्वारा समाज को समानता, मानवता और सामाजिक समरसता का जो संदेश दिया गया, वह आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने इस दौरान 5 एकड़ भूमि में बनाएं जा रहे संत गुरु रविदास जी धाम के निर्माण हेतु 90 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए जाने पर मुख्यमंत्री का आभार भी व्यक्त किया। श्री पंवार ने कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह समारोह गुरु रविदास जी की विचारधारा और उनके अनुयायियों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष समाज से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर एक मांग-पत्र भी पढ़कर सुनाया और विश्वास जताया कि प्रदेश सरकार संत गुरु रविदास जी के आदर्शों पर चलते हुए समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।
सामाजिक समरसता के संदेश को साकार करने की दिशा मे काम कर रही सरकार: मोहन लाल कौशिक
बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष श्री मोहन लाल कौशिक ने कहा कि प्रदेश सरकार समाज के सभी वर्गों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए समावेशी और जनहितकारी नीतियों के साथ निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की शिक्षाओं और सामाजिक समरसता के संदेश को साकार करने की दिशा में प्रदेश सरकार द्वारा गुरु रविदास जी धाम के निर्माण को लेकर शुरू किए गए कार्यों की सराहना की। श्री कौशिक ने कहा कि सरकार ने विकास, सुशासन और सामाजिक न्याय को प्राथमिकता देते हुए जो कार्य किए हैं, उन्हीं का परिणाम है कि प्रदेश की जनता ने लगातार तीसरी बार भारी बहुमत देकर भाजपा सरकार को सेवा करने का अवसर प्रदान किया है।
कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री श्री श्याम सिंह राणा, श्री कृष्ण बेदी, सांसद श्री नवीन जिंदल, सांसद श्री सुभाष बराला, चीफ व्हिप एवं विधायक श्री रामकुमार कश्यप, विधायक श्री भगवान दास कबीरपंथी, विधायक श्री पवन खरखौदा, विधायक श्री कृष्ण कुमार, विधायक श्री धनश्याम अरोड़ा, अनुसूचित समाज के प्रदेशाध्यक्ष सत्य प्रकाश, पूर्व मंत्री श्री कंवर पाल, पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा, पूर्व मंत्री बनवारी लाल, पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल, पूर्व सांसद ईश्वर सिंह भी सहित काफी गणमान्य भी मौजूद थे।
राज्य स्तरीय पशुधन प्रदर्शनी 6 से 8 फरवरी तक कुरुक्षेत्र में
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड मेला ग्राउंड में आयोजित होगी पशुधन प्रदर्शनी
चंडीगढ़, 31 जनवरी - कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड मेला ग्राउंड (कुरुक्षेत्र) में आगामी 6 फरवरी से 8 फरवरी तक तीन दिवसीय 41वीं राज्य स्तरीय पशुधन प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि इस राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में प्रदेश भर से उत्तम गुणवत्ता वाली नस्ल के लगभग 1500 पशु विभिन्न श्रेणियों में भाग लेंगे। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य उत्तम नस्ल के पशुओं का प्रदर्शन कर नस्ल सुधार के लिए पशुपालकों को प्रेरित करना तथा दूध उत्पादन में वृद्धि कर किसानों की आय बढ़ाना है।
प्रवक्ता ने बताया कि इस संबंध में विभाग के सभी अधिकारी आवश्यक दिशा - निर्देशों का पालन करेंगे और प्रदेश के पशुपालकों से संपर्क कर आयोजन को सफ़ल बनाएंगे। पशुपालकों से आग्रह किया जा रहा है ताकि वे अपने उत्तम नस्ल के पशुओं का विवरण संबंधित पशु चिकित्सक को समय रहते उपलब्ध कराएं तथा पशु प्रवेश याचिका पूर्ण करना सुनिश्चित करें।
प्रवक्ता ने बताया कि प्रदर्शनी में मुर्रा भैंस, देसी नस्ल की गाय जैसे हरियाणा, साहीवाल, गिर, थारपारकर, राठी व बेलाही, क्रॉस ब्रीड गाय, घोड़े व गधे, ऊंट, भेड़ (नाली नस्ल, हिसार डेल नस्ल), बकरी एवं गौशाला पशु भाग लेंगे। प्रदर्शनी के दौरान चयनित सर्वश्रेष्ठ पशुओं के नाम नकद पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मान किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पशु मालिकों को प्रदर्शनी में भाग लेने के लिए अपने साथ आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, कैंसिल चेक तथा परिवार पहचान पत्र (पीपीपी आईडी) अनिवार्य रूप से लाने होंगे।
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव के मंच पर छाई गोहाना की जलेबियों की मिठास
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन व मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित देशी-विदेशी मेहमानों ने चखा स्वाद
गोहाना की जलेबी लेकर मंच पर पहुंचे सहकारिता एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा
चंडीगढ़, 31 जनवरी - 39वें अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव - 2026 के भव्य शुभारंभ के अवसर पर सूरजकुंड की मुख्य चौपाल उस समय खास मिठास से भर गई, जब मंच पर गोहाना की विश्व प्रसिद्ध जलेबियों पर अनूठा संवाद देखने को मिला।
हरियाणा के सहकारिता एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा स्वयं गोहाना की ताजा जलेबियां लेकर मंच पर पहुंचे और भारत के महामहिम उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन, मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, इजिप्ट के एम्बेसडर कामिल जायद गलाल, डिप्टी एम्बेसडर दालिया तांतवे सहित देश-विदेश से आए विशिष्ट अतिथियों को जलेबी खिलाकर हरियाणा की लोक-संस्कृति और स्वाद की पहचान से रूबरू कराया। जलेबी का स्वाद चखते ही मंच पर मुस्कान और आत्मीयता का माहौल बन गया। उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने जलेबी की तारीफ करते हुए कहा, यह सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि हरियाणा की सांस्कृतिक पहचान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।
वहीं मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने हंसते हुए कहा, गोहाना की जलेबी का स्वाद आज भी वही है, जो इसे पूरे देश में खास बनाता है। डॉ. अरविंद शर्मा ने मंच से संवाद करते हुए कहा कि गोहाना की जलेबी हरियाणा की पहचान बन चुकी है और यह स्थानीय कारीगरों, व्यापारियों और पारंपरिक हुनर की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने कहा, सूरजकुंड शिल्प मेला ‘लोकल टू ग्लोबल - आत्मनिर्भर भारत’ की सोच को साकार करता है।
उल्लेखनीय है कि इस वर्ष सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव का थीम लोकल टू ग्लोबल - आत्मनिर्भर भारत की पहचान रखा गया है, जिसमें देश-विदेश के शिल्पकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। गोहाना की जलेबियों की मिठास ने इस थीम को मंच पर जीवंत रूप में प्रस्तुत कर दिया।
हरियाणवी विरासत प्रदर्शनी देखकर अभिभूत हुए उप-राष्ट्रपति
विरासत प्रदर्शनी में उप-राष्ट्रपति का पगड़ी बांध कर किया गया स्वागत
मुख्यमंत्री ने उप-राष्ट्रपति को भेंट किया हरियाणवी लोक कला का प्रतीक सांझी स्मृति चिह्न
चंडीगढ़, 31 जनवरी - 39वें अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड क्राफ्ट मेला 2026 में 'अपणा घर विरासत' सांस्कृतिक प्रदर्शनी का उद्घाटन भारत के उप - राष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने किया। इस अवसर पर उनके साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, सहकारिता राज्य मंत्री तथा सांसद श्री कृष्ण पाल गुर्जर व हरियाणा के सहकारिता एवं पर्यटन मंत्री डा. अरविंद शर्मा, हरियाणा भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष श्री मोहन लाल बड़ौली भी मौजूद रहे।
अपणा घर विरासत सांस्कृतिक प्रदर्शनी में उप-राष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन व मेहमानों का स्वागत लोक पारंपरिक तरीके से पगड़ी पहनाकर किया गया।
विरासत सांस्कृतिक प्रदर्शनी में पहुंचे सभी मेहमानों ने हरियाणवी लोकजीवन में पुराने समय में प्रयोग किए जाने वाली वस्तुओं जैसे न्यौल, कांटे, घंटियां, ताले, इंढ़ी, लुगदी से बने बोहिये, बीजणे, ताखड़ी, चंगेरी, डायल, जुऐ, ओरणे, हरियाणवी लोक परिधान खारे एवं घाघरे का अवलोकन किया। इस अवसर उप-राष्ट्रपति ने हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी को इस प्रदर्शनी के लिए विशेष रूप से बधाई दी। उन्होंने कहा कि युवाओं को जोडऩे के लिए यह प्रदर्शनी एक सार्थक पहल है। इस अवसर पर विरासत दि हेरिटेज विलेज के संरक्षक डॉ. महासिंह पूनिया ने सभी मेहमानों को इन विषय-वस्तुओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
अपणा घर की प्रदर्शनी में जहां एक ओर लोक पारंपरिक विषय - वस्तुओं को प्रदर्शित किया गया है वहीं पर दूसरी ओर हरियाणवी लोक जीवन में प्रयोग की जाने वाली सैकड़ों वर्ष पुरानी विषय - वस्तु पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेंगी। यह जानकारी विरासत दि हेरिटेज विलेज के संरक्षक डॉ. महासिंह पूनिया ने दी।
उन्होंने बताया कि पर्यटन विभाग हरियाणा की ओर से आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय मेले में हरियाणा की लोक सांस्कृतिक विरासत के साक्षात् रूप में दर्शन करने का अवसर मिल रहा है। डॉ. महासिंह पूनिया ने बताया कि हरियाणा की पगड़ी का स्टॉल भी युवा पीढ़ी के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र हैं, जिसमें पगड़ी बंधाओ, फोटो खिंचवायो इवेंट का आयोजन किया गया है। इसके साथ ही हरियाणवी संस्कृति के विविध स्वरूप जिसमें चौपाल, खेती-बाड़ी के प्राचीन औजार, तीन सौ साल पुराने ताले, तेल रखने के लिए प्रयोग किए जाने वाला कूपा पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है।
कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने झज्जर स्थित बागवानी अनुसंधान केंद्र रईया का दौरा किया
कृषि मंत्री ने बागवानी विशेषज्ञों को क्षेत्र की मांग के अनुसार नई सब्जियों और फलों की किस्म तैयार करने के निर्देश दिए
बागवानी से किसानों की आय कई गुना बढ़ेगी : कृषि मंत्री
चंडीगढ़, 31 जनवरी - हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के अंतर्गत झज्जर के रईया स्थित बागवानी अनुसंधान केंद्र का दौरा किया। साथ ही उन्होंने किसानों के कल्याण के लिए केंद्र में चल रही गतिविधियों की जानकारी ली। इस अवसर पर बोलते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की नीति निरंतर किसानों की आय बढ़ाने की रही है। रईया केंद्र में पहुंचने पर ग्राम पंचायत ने सरपंच की अगुवाई में कृषि मंत्री का पगड़ी बांधकर स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि पूर्व कृषि मंत्री श्री ओम प्रकाश धनखड़ ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की नीतियों को आगे बढ़ाते हुए इस क्षेत्र को बागवानी केंद्र रईया और मुनीमपुर में बीज एवं फूल उत्कृष्टता केंद्र बनाकर क्षेत्र के किसानों को बड़ी सौगात दी थी। पीढी दर पीढी जोत घटती जा रही है , ऐसे में परंपरागत खेती की बजाय किसानों को बागवानी की खेती कर अपनी आय बढ़ानी होगी। ये केंद्र किसानों के लिए बड़े लाभकारी सिद्ध होंगे।
डॉ. धर्मपाल चौधरी, निदेशक अनुसंधान ने विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सुरेश कुमार मल्होत्रा के नेतृत्व में केंद्र में किए जा रहे अनुसंधान कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्र में जीरा, अजवाइन, सौंफ जैसी बीज मसाला फसलें और अंजीर, कमलम जैसे नए फलों और मसालों की खेती शुरू की गई है, जो इस क्षेत्र के लिए नई हैं। कृषि मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने भिवानी का उदाहरण देते कहा कि इस क्षेत्र में खजूर की खेती आरंभ की जाए, जिससे किसानों को लाभ हो सके।
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले को मिलेगा डिजिटल विस्तार, अब साल भर ऑनलाइन बिकेंगे हस्तशिल्प उत्पाद: डॉ. श्रीवत्स कृष्ण
चंडीगढ़, 31 जनवरी- भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीवत्स कृष्ण ने कहा कि प्रधानमंत्री के विज़न के अनुरूप शिल्पकारों के हुनर को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए सूरजकुंड मेले का एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा। इसके माध्यम से कारीगर अब केवल मेले के दौरान ही नहीं, बल्कि पूरे वर्ष अपना हस्तनिर्मित सामान विश्वभर में बेच सकेंगे।
पर्यटन मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीवत्स कृष्ण शनिवार को सूरजकुंड मेला परिसर के कन्वेंशन हॉल में आयोजित एक पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर निदेशक पार्थ गुप्ता, सूचना जनसंपर्क एवं भाषा विभाग की अतिरिक्त निदेशक वर्षा खांगवाल मौजूद रहें।
सूरजकुंड मेला पारंपरिक शिल्पकारों के लिए ग्लोबल लॉन्च पैड
उन्होंने कहा कि सूरजकुंड मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि हमारे पारंपरिक शिल्पकारों के लिए एक ग्लोबल लॉन्च पैड है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के आने से हमारे ग्रामीण कारीगरों की पहुंच सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक होगी। उन्होंने पर्यटकों से आह्वान किया कि वे 'वोकल फॉर लोकल' के संदेश को सार्थक करें और शिल्पकारों द्वारा बनाए गए उत्पादों की खरीदारी अवश्य करें। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देशानुसार, मेला अथॉरिटी का लक्ष्य मेले को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना और केवल हस्तनिर्मित उत्पादों को ही बढ़ावा देना है।
मेले की अवधि को दो सप्ताह से बढ़ाकर चार सप्ताह करने का विचार
डॉ. श्रीवत्स कृष्ण ने कहा कि शिल्पकारों और पर्यटकों के उत्साह को देखते हुए मेले की अवधि को वर्तमान दो सप्ताह से बढ़ाकर चार सप्ताह करने पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही केंद्रीय पर्यटन मंत्री के निर्देशानुसार, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिल्पकारों को मेले में विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। ताकि
उनके हुनर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया जा सकें।
बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान : डॉ अमित अग्रवाल
आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने एक सवाल के जवाब में कहा कि इस वर्ष मेले के बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान दिया गया है। कच्ची हटों को पक्का किया गया है और सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरे लगाए गए है। इसके साथ ही मेले में साज सजावट सहित सभी प्रबंध सुनिश्चित किए गए है। उन्होंने बताया कि थीम राज्य' और 'थीम देश' के चयन की प्रक्रिया जुलाई से ही शुरू हो जाती है, जिसे रोटेशन के आधार पर तय किया जाता है।
उन्होंने कहा कि पर्यटक मेले की टिकट काउंटर के साथ-साथ ऑनलाइन भी खरीद सकेंगे। डीएमआरसी द्वारा ऑनलाइन टिकट की बिक्री शुरू कर दी गई है। पर्यटकों के लिए कैश, यूपीआई और ऑनलाइन माध्यमों से भुगतान की सुविधा उपलब्ध रहेगी। ताकि आमजन को किसी प्रकार की परेशानी ना हो। उन्होंने कहा कि मेले के समापन के बाद एक समीक्षा बैठक की जाएगी ताकि भविष्य में कमियों को दूर कर इसे और बेहतर बनाया जा सके।
सूरजकुंड में 39वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले का भव्य आगाज
मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने किया मेले का उद्घाटन
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सूरजकुंड मेला आगमन पर उपराष्ट्रपति का किया स्वागत
'वसुधैव कुटुंबकम’ के शाश्वत भारतीय दर्शन को साकार करता सूरजकुंड शिल्प मेला - श्री सी. पी. राधाकृष्णन
उपराष्ट्रपति ने कहा, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से सशक्त हो रहा कारीगर समुदाय
चंडीगढ़, 31 जनवरी - हरियाणा के सूरजकुंड में शनिवार को 39वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला-2026 का भव्य आगाज हुआ, जो 15 फरवरी तक चलेगा। भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी.राधाकृष्णन ने बतौर मुख्य अतिथि मेले का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर, मेले में सहयोगी देश मिस्र के प्रतिनिधि, हरियाणा के राजस्व एवं शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल, हरियाणा के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर, खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम उपस्थित रहे।
मेले के शुभारंभ अवसर पर उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने मेला परिसर में हरियाणा के अपना घर पवेलियन का दौरा किया, जहां हरियाणवी पगड़ी पहनाकर उनका पारंपरिक स्वागत-सत्कार किया गया। उपराष्ट्रपति ने मेले के थीम स्टेट मेघालय के स्टॉलों का अवलोकन करते हुए शिल्पकारों से संवाद किया तथा उनके हुनर की सराहना की। इसके साथ ही उन्होंने मेले में सहभागी विभिन्न देशों और राज्यों की सांस्कृतिक विधाओं का अवलोकन कर कलाकारों एवं शिल्पकारों का उत्साहवर्धन किया।
मेला परिसर की मुख्य चौपाल के मंच से उपराष्ट्रपति श्री राधाकृष्णन ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने मेले में आने वाले आगंतुकों की सुविधा हेतु मेला साथी ऐप का शुभारंभ भी किया। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी तथा विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा द्वारा उन्हें पांचजन्य शंख और महाभारत के दृश्य को दर्शाती एक आकर्षक पेंटिंग भेंट की गई।
‘वसुधैव कुटुंबकम’ के शाश्वत भारतीय दर्शन को साकार करता सूरजकुंड शिल्प मेला - उपराष्ट्रपति
उद्घाटन करने उपरांत उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने अपने संबोधन में कहा कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला दशकों से भारत की सांस्कृतिक आत्मा, कलात्मक उत्कृष्टता और सभ्यतागत निरंतरता का जीवंत प्रतीक रहा है। यह उत्सव ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के उस शाश्वत भारतीय दर्शन को साकार करता है, जिसमें पूरी दुनिया को एक परिवार माना गया है। यह मेला निर्माण करने वाले हाथों, नवाचार से भरे मस्तिष्कों और हमारी पहचान गढ़ने वाली परंपराओं को एक साझा मंच पर एकत्र करता है। पिछले लगभग चार दशकों से यह आयोजन हमारे कारीगरों, बुनकरों, मूर्तिकारों, चित्रकारों और लोक कलाकारों को वैश्विक पहचान दिला रहा है, जिनमें से अनेक पीढ़ियों से चली आ रही कलाओं को जीवित रखे हुए हैं। इस वर्ष आत्मनिर्भर भारत पर केंद्रित दृष्टिकोण ने मेले के महत्व को और भी गहन बना दिया है, क्योंकि हमारे कारीगर सदियों पुराने ज्ञान के संरक्षक हैं और उन्हें सशक्त बनाना एक समावेशी, सशक्त और टिकाऊ अर्थव्यवस्था की नींव है।
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से सशक्त हो रहा कारीगर समुदाय
उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक हस्तशिल्प क्षेत्र को राष्ट्रीय पुनर्जागरण के केंद्र में रखा गया है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना जैसे परिवर्तनकारी प्रयासों ने कारीगरों और शिल्पकारों को कौशल विकास, वित्तीय सहायता और बाज़ार से जुड़ाव प्रदान कर पूरे इकोसिस्टम को सशक्त बनाया है।
उपराष्ट्रपति ने इस वर्ष के सहभागी राज्य उत्तर प्रदेश और मेघालय का उल्लेख करते हुए कहा कि ये ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करते हैं, जहाँ विविधता हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। साथ ही, भागीदार देश मिस्र का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि मिस्र की प्राचीन सभ्यता, सांस्कृतिक गहराई और कलात्मक परंपराएं भारत की ऐतिहासिक यात्रा से गहरे स्तर पर मेल खाती हैं। ऐसी साझेदारियां देशों के बीच सांस्कृतिक कूटनीति को सुदृढ़ करने के साथ-साथ लोगों के बीच संबंधों को भी मजबूत बनाती हैं।
सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ व्यावसायिक सफलता का सशक्त उदाहरण है सूरजकुंड मेला
उपराष्ट्रपति ने कहा कि बड़े पैमाने पर उत्पादन के इस युग में सूरजकुंड मेला हमें हाथ से बनी वस्तुओं, मानवीय स्पर्श और प्रामाणिक शिल्प के अमूल्य महत्व की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष लगभग 15 लाख लोगों ने मेले का भ्रमण किया, जो यह दर्शाता है कि यह मेला आमजन से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मेले में कारीगरों के उत्पादों की बिक्री प्रतिदिन बढ़ती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सूरजकुंड मेला न केवल सांस्कृतिक रूप से, बल्कि व्यावसायिक दृष्टि से भी अत्यंत सफल और प्रभावशाली आयोजन है। उपराष्ट्रपति ने इस दौरान कारीगरों, आयोजकों व दर्शकों से इस विरासत को समझने, अपनाने और आगे बढ़ाने का आह्वान भी किया।
कार्यक्रम में बल्लभगढ़ से विधायक एवं पूर्व मंत्री मूलचंद शर्मा, बड़खल से विधायक धनेश अदलखा, फरीदाबाद एनआईटी से विद्यायक सतीश फागना, सोहना से विधायक तेजपाल तंवर, राई से विधायक कृष्णा गहलावत, नलवा से विधायक रणधीर पनिहार, फरीदाबाद की मेयर प्रवीण जोशी, मोहन लाल कौशिक, भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीवत्स कृष्णा, विरासत एवं पर्यटन विभाग हरियाणा के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल, निदेशक श्री पार्थ गुप्ता की गरिमामयी उपस्थिति रही।
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने किया 39वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले का उद्घाटन
‘लोकल टू ग्लोबल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत की पहचान’ को साकार करने का सशक्त मंच है सूरजकुंड शिल्प मेला – मुख्यमंत्री
सूरजकुंड शिल्प मेला भारत की आत्मा और कारीगरों के सम्मान का प्रतीक - नायब सिंह सैनी
शिल्पकारों की कला से दिखी 'अतुल्य भारत' की झलक
लोकल को ग्लोबल बनाकर आत्मनिर्भर भारत को दें नई पहचान - मुख्यमंत्री
चंडीगढ़, 31 जनवरी — हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि 39वां सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आत्मनिर्भरता की भावना से जोड़ रहा है। यह मेला ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को सशक्त आधार प्रदान करते हुए स्थानीय शिल्प, कला और कारीगरों को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने का प्रभावी माध्यम बन रहा है। इस वर्ष ‘लोकल टू ग्लोबल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत की पहचान’ थीम पर आधारित यह मेला प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के उस विजन को धरातल पर उतारने का प्रयास है, जिसमें हर कारीगर के हुनर को सम्मान और बाजार दोनों मिलें।
मुख्यमंत्री शनिवार को उप राष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन द्वारा फरीदाबाद में 39वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले के उद्घाटन करने उपरांत उपस्थित जन को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर, हरियाणा के शहरी स्थानीय निकाय मंत्री श्री विपुल गोयल, विरासत व पर्यटन मंत्री डॉ. अरविन्द शर्मा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले राज्य मंत्री श्री राजेश नगर, खेल राज्य मंत्री श्री गौरव गौतम, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष श्री मोहन लाल कौशिक भी उपस्थित थे।
श्री नायब सिंह सैनी ने उप-राष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन का विशेष रूप से स्वागत करते हुए कहा कि इस मेले में आने से देश-विदेश के शिल्पकारों को नई प्रेरणा मिली है। उन्होंने कहा कि आज हम कला और शिल्प के उस महाकुंभ के साक्षी बनने जा रहे हैं, जिसकी न केवल भारत में, बल्कि पूरे विश्व में विशेष पहचान है।
मुख्यमंत्री ने विदेशी मेहमानों का हरियाणा की धरा पर स्वागत करते हुए कहा कि सूरजकुंड शिल्प मेला हमारी प्राचीनता और आधुनिकता का संगम है। आज हम यहां उस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं, जो पिछले 38 वर्षों से भारतीय लोक कला और संस्कृति को जीवित रखे हुए है।
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर का अर्थ केवल आर्थिक स्वतंत्रता नहीं है। इसमें अपनी संस्कृति पर गर्व करना, अपनी विरासत को सहेजना और उसे दुनिया के सामने शान से प्रस्तुत करना भी शामिल हैं। सूरजकुंड मेला इसी 'आत्मनिर्भरता' का जीता-जागता उदाहरण है। यहां मिट्टी के बर्तनों से लेकर हाथ से बुने हुए कपड़े तक, हर एक वस्तु में भारत की आत्मा बसती है। इस मेले के असली नायक हमारे शिल्पकार हैं।
शिल्पकारों की कला से दिखी 'अतुल्य भारत' की झलक
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार भी देश के हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से शिल्पकार अपनी कला का प्रदर्शन करने आए हैं। चाहे वह पूर्वोत्तर भारत की बांस की कारीगरी हो, दक्षिण की सिल्क साड़ियां हों, पश्चिम की रंग-बिरंगी कढ़ाई हो या उत्तर भारत की लकड़ी की नक्काशी हो, पूरा 'अतुल्य भारत' आज यहां सूरजकुंड में सिमट आया है। उन्होंने कहा कि इस बार सहयोगी और भागीदार राज्य के रूप में उत्तर प्रदेश और मेघालय की विशेष उपस्थिति है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय पटल पर मित्र देश मिस्र की भागीदारी इस मेले को सही मायने में अंतर्राष्ट्रीय बनाती है। यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान ही है, जो देशों के बीच की दूरियों को मिटाता है और दिलों को जोड़ता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। पर्यटन विकास का एक ऐसा इंजन है जो रोजगार के सबसे अधिक अवसर पैदा करता है। सूरजकुंड मेला इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। अगले 15 दिनों तक, यानी 15 फरवरी तक, यहां लाखों पर्यटकों के आने से न केवल शिल्पकारों को बाजार मिलेगा, बल्कि स्थानीय टैक्सी चालकों, होटल व्यवसायियों और छोटे दुकानदारों को भी रोजगार मिलेगा। जब यहां आए पर्यटक कोई वस्तु खरीदते हैं, तो वे केवल एक उत्पाद नहीं खरीदते, बल्कि एक शिल्पकार की कला का सम्मान करते हैं और 'वोकल फॉर लोकल' के मंत्र को सिद्ध करते हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में शिल्पकला को बढ़ावा देने के लिए इसी तरह के मंच प्रदान किए जाते हैं। इस शिल्प मेले के अलावा जिला स्तर पर सरस मेले लगाए जाते हैं, जिनमें शिल्पकारों और बुनकरों को अपनी शिल्पों का प्रदर्शन करने का अवसर मिलता है। यहीं पर हर साल दीपावली मेले का आयोजन भी किया जाता है। हर साल अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव और कुरुक्षेत्र में भी हर वर्ष अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के अवसर पर भी भव्य सरस मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें देशभर के शिल्पकार शामिल होते हैं। सरकार ने माटी कला को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में 'माटी कला बोर्ड' का गठन किया है। श्री विश्वकर्मा कौशल विकास विश्वविद्यालय में भी परंपरागत शिल्पों में प्रशिक्षण दिया जाता है।
शिल्पकार कला को और अधिक निखारने के लिए आधुनिक तकनीक का करें प्रयोग
मुख्यमंत्री ने शिल्पकारों से अनुरोध करते हुए कहा कि वे अपनी कला को और अधिक निखारने के लिए आधुनिक तकनीक का भी प्रयोग करें। यह आधुनिक तकनीक का ही कमाल है कि दूर-दराज में बैठा एक शिल्पी आज ऑनलाइन बिक्री प्लेटफार्म से अपने उत्पादों को दुनिया के किसी भी कोने में बेच सकता है। इसी तरह से शिल्पकार हस्त उत्पादों की डिजाइनिंग में भी आधुनिक तकनीक का प्रयोग करें।
उन्होंने कहा कि सभ्यताएं समागम और सहयोग से ही समृद्ध होती हैं। इसलिए, इस दिशा में दुनिया के दूसरे सभी देशों की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस मेले का आगे और भी विस्तार हो जिससे ज्यादा से ज्यादा संख्या में देश साथ आएं। देश और विदेशों से आए कलाकार और पर्यटक हरियाणा के अतिथि सत्कार की एक सुखद अनुभूति लेकर जाएंगे। यह अनुभूति उन्हें बार-बार हरियाणा आने के लिए प्रेरित करेगी।
39वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला में 50 से अधिक देशों के 700 से ज्यादा विदेशी प्रतिनिधि और डेलीगेट्स ले रहे हिस्सा - डॉ. अरविंद शर्मा
हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि 39वां सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला निरंतर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1987 से शुरू हुआ यह मेला आज देश-विदेश में भारतीय सांस्कृतिक विरासत, शिल्प और कला की एक सशक्त पहचान बन चुका है। सूरजकुंड मेला ‘लोकल टू ग्लोबल’ विजन का सशक्त मंच बनकर स्वदेशी उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प में हरियाणा का विशेष योगदान सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी निरंतर इसी दिशा में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष जहां 44 देशों ने मेले में भागीदारी की थी, वहीं इस वर्ष 50 से अधिक देशों के 700 से ज्यादा विदेशी प्रतिनिधि और डेलीगेट्स हिस्सा ले रहे हैं। इस वर्ष का पार्टनर नेशन मिस्र (इजिप्ट) है, जो सांस्कृतिक आदान-प्रदान को और सुदृढ़ करेगा। यह मेला कलाकारों और शिल्पकारों को न केवल अपनी कला प्रदर्शित करने का मंच देता है, बल्कि उन्हें अधिक राजस्व अर्जित करने और अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने का अवसर भी प्रदान करता है।
उन्होंने बताया कि हरियाणा में ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर है, जिनमें 7000 वर्ष पुरानी सभ्यता वाली राखीगढ़ी विश्व स्तर पर प्रदेश की पहचान को सुदृढ़ करती है।
इस अवसर पर विधायक श्री दिनेश अदलखा, श्री सतीश फ़ागना, श्री तेजपाल तंवर, श्री मूलचंद शर्मा, श्री रणधीर पणिहार, श्रीमती कृष्णा गहलोत, विरासत एवं पर्यटन विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ अमित अग्रवाल, निदेशक श्री पार्थ गुप्ता, फरीदाबाद के उपायुक्त श्री आयुष सिन्हा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।