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पंजाब

Punjab Latest News 2026

April 19, 2026 05:46 AM

पंजाब के औद्योगिक विकास को गति देने और वैश्विक निवेश को आकर्षित करने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान आज से नीदरलैंड के दौरे पर*

 

- *मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान फूड प्रोसेसिंग से लेकर आई.टी. सेक्टर तक पंजाब की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए नीदरलैंड के प्रमुख सेक्टरों तक पहुंच बनाएंगे*

 

- *टिकाऊ नीतियों और त्वरित फैसलों के साथ वैश्विक निवेश के लिए पंजाब पसंदीदा स्थान के रूप में उभरेगा: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान*

 

चंडीगढ़, 18 अप्रैल 

राज्य के औद्योगिक और आर्थिक विकास को गति देने के लिए पंजाब सरकार द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों के तहत मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान फूड प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स, अलॉयज एंड स्टील्स, फार्मास्यूटिकल्स और सूचना प्रौद्योगिकी समेत प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने तथा निवेश आकर्षित करने के लिए आज नीदरलैंड के दौरे पर रवाना हो गए हैं।

 

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि हमारा विजन पूरी तरह स्पष्ट है, जो नीति स्थिरता, तेजी से फैसले लेने और निवेशकों के समय व भरोसे का सम्मान करने वाली शासन व्यवस्था प्रदान करके पंजाब को विश्व स्तर पर उद्योग के लिए प्राथमिकता वाला स्थान बनाने पर केंद्रित है।

 

यह दौरा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नीदरलैंड भारत के लिए सबसे बड़े विदेशी निवेशकों में से एक है और कई डच कंपनियां पहले से ही पंजाब में अपना कारोबार चला रही हैं। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने इससे पहले अक्टूबर-2023 में विविधा इंडस्ट्रियल पार्क, राजपुरा में डी ह्यूस फैक्टरी का शिलान्यास किया था। इसी प्रकार आलू की फसल के लिए इंडो-डच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पहले ही राज्य में सफलतापूर्वक काम कर रहा है, जो पंजाब और नीदरलैंड के बीच बढ़ते सहयोग को दर्शाता है।

 

इस दौरे के दौरान मुख्यमंत्री राज्य के औद्योगिक विकास को और गति देने के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी पर जोर देंगे। वे पंजाब की रणनीतिक स्थिति, एनसीआर और प्रमुख बंदरगाहों से निर्बाध संपर्क, मजबूत औद्योगिक क्लस्टर, गुणवत्तापूर्ण निर्बाध बिजली आपूर्ति, कुशल कार्यबल और प्रगतिशील नीति ढांचे को उजागर करके पंजाब को उत्तरी भारत के पसंदीदा निवेश स्थल के रूप में भी प्रस्तुत करेंगे।

 

मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाला प्रतिनिधिमंडल पंजाब सरकार द्वारा लागू किए गए प्रमुख प्रशासनिक और नियामक सुधारों को पेश करेगा, जिसमें 173 सरकार से कारोबार सेवाएं, ऑटो-डीम्ड मंजूरियां, पैन-आधारित व्यापारिक पहचान, पंजाब राइट टू बिजनेस एक्ट में संशोधन और फास्टट्रैक पंजाब सिंगल-विंडो सिस्टम शामिल हैं।

 

इस प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य श्रृंखलाबद्ध रोड शो, वन-टू-वन बिजनेस मीटिंग्स और बड़ी ग्लोबल कॉर्पोरेट कंपनियों व संस्थाओं के साथ चर्चाओं के माध्यम से पंजाब को यूरोपीय देशों के लिए निवेश के आकर्षक गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करना और पंजाब में नया निवेश लाना है।

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सूचना एवं लोक संपर्क विभाग, पंजाब

 

गैंगस्टरां ते वार का 88वां दिन: पंजाब पुलिस द्वारा 639 जगहों पर छापेमारी; 239 गिरफ्तार

 

- पुलिस टीमों ने 116 व्यक्तियों के विरुद्ध की एहतियातन कार्रवाई, 116 को पूछताछ के बाद रिहा किया

 

- लोग एंटी-गैंगस्टर हेल्पलाइन नंबर 93946-93946 के द्वारा गुप्त रूप से कर सकते हैं गैंगस्टरों की रिपोर्ट

 

- युद्ध नशेयां विरुद्ध के 413वें दिन 89 नशा तस्कर 74.5 किलोग्राम हेरोइन समेत गिरफ्तार

 

चंडीगढ़, 18 अप्रैलः

 

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देशों के तहत शुरू की गई निर्णायक मुहिम ‘गैंगस्टरां ते वार’ के 88वें दिन पंजाब पुलिस ने आज पूरे राज्य में गैंगस्टरों के साथियों के चिन्हित और मैप किए गए 639 ठिकानों पर छापेमारी की।

 

जिक्रयोग्य है कि ‘गैंगस्टरां ते वार’ - पंजाब को गैंगस्टर मुक्त राज्य बनाने के लिए निर्णायक जंग है, जिसकी शुरुआत 20 जनवरी, 2026 को पुलिस डायरेक्टर जनरल (डीजीपी) पंजाब गौरव यादव द्वारा की गई थी। एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) पंजाब के तालमेल के साथ सभी जिलों की पुलिस टीमों ने राज्य भर में विशेष कार्रवाइयां कर रही हैं।

 

उन्होंने बताया कि 88वें दिन, पुलिस टीमों ने चार हथियारों समेत 239 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया, जिससे मुहिम की शुरुआत से अब तक कुल गिरफ्तारियों की संख्या 22,144 हो गई है।

 

इसके अलावा 116 व्यक्तियों के विरुद्ध एहतियातन कार्रवाई की गई है, जबकि 116 व्यक्तियों को तफ्तीश और पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। पुलिस टीमों ने कार्रवाई के दौरान छह फरार अपराधियों को भी गिरफ्तार किया है।

 

लोग एंटी गैंगस्टर हेल्पलाइन नंबर 93946-93946 के द्वारा गुप्त रूप से चाहे गए अपराधियों और गैंगस्टरों से संबंधित जानकारी दे सकते हैं तथा अपराध और आपराधिक गतिविधियों की सूचना भी दे सकते हैं।

 

इस दौरान पुलिस टीमों ने नशों के विरुद्ध अपनी मुहिम युद्ध नशेयां विरुद्ध के 413वें दिन आज 89 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से 74.5 किलोग्राम हेरोइन, 3299 नशीली गोलियां/कैप्सूल और 13,080 रुपये की ड्रग मनी बरामद की है। इसके साथ सिर्फ 413 दिनों में गिरफ्तार किए गए कुल नशा तस्करों की संख्या 59,476 हो गई है। नशा छुड़ाऊ मुहिम के हिस्से के रूप में पंजाब पुलिस ने आज 28 व्यक्तियों को नशा छुड़ाऊ और पुनर्वास का इलाज करवाने के लिए राजी किया है।

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सूचना एवं लोक संपर्क विभाग, पंजाब

*पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा ए.आई. पर आयोजित दो-दिवसीय सम्मेलन में विद्यार्थियों को प्रौद्योगिकी के उपभोक्ताओं की बजाय सृजनकर्ता के रूप में तैयार करने पर जोर*

डेटा गोपनीयता से लेकर अकादमिक तक: बोर्ड द्वारा गूगलइंटेल और पीटीयू के सहयोग से स्कूलों में ए.आई. के उपयोग पर विभिन्न सत्र आयोजित
 
ए.आई. के सृजनकर्ता पैदा करने के लिए नैतिक उपयोग की अहम भूमिका : डॉ. अमरपाल

चंडीगढ़, 18 अप्रैल:

पंजाब की शिक्षा व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को शामिल करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाते हुए पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (पीएसईबी) द्वारा यहां सी.आई.आई. के नॉर्दर्न रीजन मुख्यालय में आयोजित दो-दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आज गूगल और इंटेल द्वारा व्यावहारिक वर्कशॉप के साथ समाप्त हो गया।

इस सम्मेलन ने क्लासरूम में एआई को शामिल करने के लिए एक उपयुक्त रोडमैप तैयार करने हेतु नीति निर्माताओं, शिक्षकों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों के लिए विचार-विमर्श का एक सार्थक मंच प्रदान किया। यह रोडमैप सीखने की गुणवत्ता में सुधार, पहुंच बढ़ाने और विद्यार्थियों को केवल उपभोक्ता न बनाकर प्रौद्योगिकी के निर्माता के रूप में तैयार करने पर केंद्रित होगा।

पी.एस.ई.बी. के चेयरमैन डॉ. अमरपाल सिंह, आईएएस (सेवानिवृत्त) ने एआई के नैतिक उपयोग पर जोर दिया और कहा कि इसका उपयोग शिक्षार्थियों की रचनात्मकता और समस्या-समाधान कौशल को निखारने के लिए किया जा सकता है। आज के डिजिटल युग में, जहाँ एआई-आधारित उपकरण हमारे स्थायी साथी बन गए हैं, विद्यार्थियों से आग्रह किया गया कि वे ऐसे उपकरणों का चुनाव उसी तरह पूरी समझदारी और परख से करें, जैसे हम अपने मित्रों का चुनाव करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को एआई का उपयोग पूरी जिम्मेदारी से और एक स्पष्ट कानूनी एवं नैतिक ढांचे में रहकर करने के लिए प्रोत्साहित किया, जो मुख्य उद्देश्यों से समझौता किए बिना उनके लिए सीखने में लाभकारी साबित हो।

गूगल के नेतृत्व वाले सत्र में शिक्षा में एआई की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया, जिसमें संवेदनशीलता और जागरूकता-निर्माण पर जोर दिया गया। विचार-विमर्श के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि शिक्षकों से लेकर प्रशासकों तक, शिक्षा प्रणाली के प्रमुख हिस्सेदार पहले से ही एआई-आधारित दृष्टिकोण से जुड़ रहे हैं और इसे अपना रहे हैं, जो इस बदलाव के लिए हमारी मजबूत तैयारी को दर्शाता है।

सम्मेलन का एक मुख्य हिस्सा "कार्य स्थल पर एआई का उपयोग" विषय पर इंटेल की व्यावहारिक कार्यशाला थी, जिसमें 112 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सत्र के दौरान सरकारी ढांचे के भीतर एआई उपकरण स्थापित करने पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें डेटा गोपनीयता, जिम्मेदारी से उपयोग और संगठन-विशिष्ट या संवेदनशील जानकारी को अनजाने में साझा करने जैसी स्थितियों की रोकथाम के लिए सुरक्षा उपायों पर जोर दिया गया।

आईकेजी पीटीयू द्वारा "स्कूल लीडरों के लिए स्कूलों में एआई" विषय पर एक और कार्यशाला आयोजित की गई, जो विशेष रूप से प्रिंसिपलों और स्कूल प्रमुखों को ध्यान में रखकर तैयार की गई थी। यह संस्थागत नेतृत्व और शैक्षणिक प्रबंधन में एआई उपकरणों को एकीकृत करने पर केंद्रित थी। साथ ही, एआई-सक्षम वातावरण में शैक्षणिक अखंडता को बनाए रखने के लिए स्कूलों द्वारा एआई-आधारित सामग्री की पहचान की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

नीव एआई द्वारा आयोजित छात्र-केंद्रित कार्यशाला "एआई इन एजुकेशन" ने एआई-आधारित एप्लीकेशनों में व्यावहारिक कौशल का प्रशिक्षण दिया। इस सत्र के दौरान विद्यार्थियों को व्यावहारिक उपयोग के मामलों से अवगत कराने के साथ-साथ उनमें एआई की प्रारंभिक, बुनियादी समझ को बढ़ावा दिया गया। साथ ही, उन्हें उभरते हुए उपकरणों के जिम्मेदार उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित किया गया।

चेयरमैन ने बताया कि इसके साथ ही विद्यार्थियों को यह भी जानकारी दी गई कि एआई टूल कैसे विकसित किए जाते हैं, उनके पीछे की प्रक्रियाएँ क्या हैं, और ऐसी प्रौद्योगिकियों को बनाने के लिए आवश्यक विविध कौशल सेट कौन-से हैं। इस एक्सपोज़र ने विद्यार्थियों की समझ को और गहरा करने के साथ-साथ उन्हें एआई और अन्य उभरते क्षेत्रों में भविष्य के मार्गों का पता लगाने के लिए प्रेरित किया। इस कार्यशाला में पंजाब के विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया और उनकी जिज्ञासा, अनुकूलनशीलता तथा उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़ने की इच्छा ने आने वाले वर्षों में एआई-आधारित शिक्षा के क्षेत्र में असीम संभावनाओं को उजागर किया।

डॉ. अमरपाल सिंह ने दो-दिवसीय सम्मेलन के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए एलिक्स इवेंट्स के प्रयासों की सराहना की।
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सूचना और लोक संपर्क विभाग, पंजाब

*कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत द्वारा रक्षा सेवा कल्याण विभाग के कार्यों की प्रगति का जायजा*

पंजाब सरकार पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों की भलाई के लिए प्रतिबद्ध

चंडीगढ़, 18 अप्रैल:

पंजाब के रक्षा सेवा कल्याण मंत्री श्री मोहिंदर भगत ने शुक्रवार शाम पंजाब सचिवालय में रक्षा सेवा कल्याण विभाग के कार्यों की प्रगति का जायजा लेने के लिए उच्च अधिकारियों के साथ एक विशेष बैठक की। इस अवसर पर रक्षा सेवा कल्याण विभाग के प्रधान सचिव सुमेर सिंह गुर्जर और निदेशक भूपिंदर सिंह ढिल्लों (सेवानिवृत्त) विशेष रूप से उपस्थित थे।

बैठक के दौरान अधिकारियों ने मंत्री को जानकारी दी कि पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों से संबंधित मामलों में काफी प्रगति हुई है। उन्होंने बताया कि विभिन्न युद्धों के दौरान शहीद हुए अधिकांश सैनिकों के परिवारों को पंजाब सरकार द्वारा पहले ही मुआवजा दे दिया गया है। इसके अलावा बाकी बचे मामलों और उनकी वर्तमान स्थिति पर भी विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि खाली पदों को भरने के लिए कार्रवाई भी तेजी से की जा रही है। इस मौके पर विभागीय बजट और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री श्री भगत ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों से संबंधित सभी मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए। उन्होंने कहा कि देश की रक्षा करते हुए अपनी जान न्योछावर करने वाले बहादुर सैनिकों के प्रति पंजाब सरकार पूर्ण श्रद्धा और सम्मान रखती है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों की भलाई के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और उनकी हर संभव सहायता के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
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सूचना एवं लोक संपर्क विभाग, पंजाब

*सरहद पार से नशा तस्करी करने वाले मॉड्यूल के दो व्यक्ति 64.6 किलो हेरोइन समेत अमृतसर से काबू*

पाकिस्तानी नशा तस्कर मूसा और पुर्तगाल आधारित हैंडलर से जुड़ा है यह गिरोह

गिरफ्तार किए गए दोषियों को उनके हैंडलरों द्वारा बड़ी रकम देने का वादा किया गया था : ए.आई.जी. एस.एस.ओ.सी. अमृतसर सुखमिंदर मान

चंडीगढ़ / अमृतसर, 18 अप्रैल:

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देशों पर पंजाब को नशा मुक्त राज्य बनाने के उद्देश्य से चल रही मुहिम के दौरान नार्को-आतंकवादी नेटवर्क को बड़ा झटका देते हुए काउंटर इंटेलीजेंस विंग की स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (एसएसओसी) अमृतसर यूनिट ने सरहद पार से नशा तस्करी करने वाले मॉड्यूल के दो मुलजिमों को 64.62 किलोग्राम हेरोइन समेत गिरफ्तार करके इस मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। यह जानकारी पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने आज यहां साझा की।

गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान अमृतसर के गांव अवान वासाऊ के निवासी सरवन सिंह उर्फ गुज्जर और अमृतसर के गांव दयाल रंगड़ के रहने वाले शमशेर सिंह उर्फ शेरा के रूप में हुई है। पुलिस टीम ने हेरोइन की बड़ी खेप बरामद करने के अलावा मुलजिमों की मारुति स्विफ्ट कार भी जब्त की है, जिसका वे नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए इस्तेमाल करते थे।

डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि इस मॉड्यूल के पाकिस्तानी तस्करों और पुर्तगाल आधारित हैंडलर से भी संबंध हैं।

उन्होंने कहा, “सरहद पार से तस्करी करने वाले इस गिरोह के पाकिस्तानी तस्कर मूसा, जिसका नाम 532 किलोग्राम हेरोइन रिकवरी मामले में सामने आया था, से भी संबंध हैं।” उल्लेखनीय है कि भारतीय कस्टम अधिकारियों ने 2019 में इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (आईसीपी) अटारी में 532 किलोग्राम हेरोइन की सबसे बड़ी बरामदगी की थी।

डीजीपी ने कहा कि इस मामले में पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए आगे-पीछे के संबंध स्थापित करने हेतु और जांच की जा रही है।

ऑपरेशन संबंधी विवरण साझा करते हुए ए.आई.जी. एस.एस.ओ.सी. अमृतसर सुखमिंदर सिंह मान ने बताया कि विश्वसनीय सूत्रों से पुख्ता जानकारी मिली थी कि संदिग्ध सरवन सिंह और शमशेर सिंह ने कुछ दिन पहले सरहद पार से ड्रोन के जरिए हेरोइन की खेप प्राप्त की है।

उन्होंने बताया कि जानकारी पर और छानबीन करने पर पता लगा कि अपने हैंडलरों के निर्देशों पर ये दोनों प्राप्त की गई खेप को किसी अन्य पक्ष तक पहुंचाने के लिए जा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि तेजी से कार्रवाई करते हुए एस.एस.ओ.सी. अमृतसर यूनिट टीम ने मुलजिमों को अमृतसर के महल बाईपास के पास काबू किया और उनके कब्जे से 64.62 किलोग्राम हेरोइन बरामद की।

ए.आई.जी. ने कहा कि गिरफ्तार किए गए मुलजिमों को उनके हैंडलरों द्वारा खेप डिलीवर करने के बदले बड़ी रकम देने का वादा किया गया था। उन्होंने कहा कि जांच जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां तथा बरामदगियां होने की संभावना है।

इस संबंध में एफ.आई.आर. नंबर 23 दिनांक 17.04.2026 को एन.डी.पी.एस. एक्ट की धाराएं 21, 25 और 29 तथा भारतीय वायुयान अधिनियम की धाराएं 25, 26, 27, 28 और 29 के तहत पुलिस स्टेशन एस.एस.ओ.सी. अमृतसर में केस दर्ज किया गया है।
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सूचना एवं लोक संपर्क विभाग, पंजाब

*आंगनवाड़ी वर्करों और हेल्परों की भलाई को पंजाब सरकार द्वारा विशेष प्राथमिकता : डॉ. बलजीत कौर*

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हर जायज मांग प्राथमिकता के आधार पर पूरी करने का भरोसा*

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बच्चों के स्वास्थ्यपोषण और माताओं की देखभाल में आंगनवाड़ी वर्करों की अहम भूमिका*

चंडीगढ़, 18 अप्रैल :

मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार जहां समाज के हर वर्ग की भलाई के लिए प्रतिबद्ध है, वहीं आंगनवाड़ी वर्करों और हेल्परों की भलाई को भी विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। पंजाब सरकार द्वारा आंगनवाड़ी वर्करों और हेल्परों की समस्याओं के समाधान और उनकी भलाई के लिए लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। यह बात सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कही।

आज पंजाब भवन, चंडीगढ़ में सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग की डायरेक्टर श्रीमती शेना अग्रवाल और डिप्टी डायरेक्टर श्रीमती सुमनदीप कौर की मौजूदगी में आंगनवाड़ी वर्करों और हेल्परों के साथ बैठक करते हुए कहा कि आंगनवाड़ी वर्कर और हेल्पर विभाग का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और वे जमीनी स्तर पर बच्चों, महिलाओं और परिवारों तक सरकारी योजनाओं को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आंगनवाड़ी वर्करों और हेल्परों की हर जायज मांग को गंभीरता से विचार करके पूरी की जाएगी।

बैठक के दौरान आंगनवाड़ी वर्करों और हेल्परों द्वारा उठाई गई मांगों को कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बड़े ध्यान से सुना। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि आंगनवाड़ी वर्करों और हेल्परों की समस्याओं का शीघ्र और प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने आगे कहा कि जिन आंगनवाड़ी वर्करों और हेल्परों की मांगे सरकार के स्तर पर हल होनी हैं, उन्हें नई गठित सब-कमेटी के सामने विचार किया जाएगा और उनका समाधान भी प्राथमिकता के आधार पर निकाला जाएगा।

डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि आंगनवाड़ी वर्कर और हेल्पर बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ माताओं को जागरूक करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि गांवों और शहरों में घर-घर जाकर की जा रही यह सेवा समाज की मजबूत नींव तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

मंत्री ने आगे कहा कि पंजाब सरकार आंगनवाड़ी वर्करों और हेल्परों के मान-सम्मान को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और उनकी भलाई के लिए भविष्य में भी जरूरत अनुसार उचित फैसले किए जाएंगे।
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सूचना एवं लोक संपर्क विभाग, पंजाब

*विश्व लीवर दिवस 2026: ‘द लैंसेट’ ने विश्व स्तर पर लीवर बीमारियों में वृद्धि की चेतावनी दीपंजाब ने ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत तैयारी तेज कीस्क्रीनिंग का विस्तार*

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मेटाबोलिक डिस्फंक्शन-एसोसिएटेड स्टेटोहैपेटिक लीवर डिजीज’ के मामलों में विश्व स्तर पर वृद्धि और 2050 तक और तेजी से बढ़ने का अनुमानपंजाब ने कैशलेस ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के माध्यम से अपनी स्वास्थ्य प्रतिक्रिया को मजबूत किया

चंडीगढ़, 18 अप्रैल, 2026:

दुनिया भर में 19 अप्रैल को ‘सॉलिड हैबिट्स, स्ट्रॉन्ग लीवर’ (‘स्वस्थ आदतें, स्वस्थ लीवर’) थीम पर मनाए जाने वाले विश्व लीवर दिवस के अवसर पर, ‘द लैंसेट’ की एक चेतावनी ने लीवर बीमारियों में तेजी से हो रही विश्व स्तर की वृद्धि को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार ‘मेटाबोलिक डिस्फंक्शन-एसोसिएटेड स्टेटोहैपेटिक लीवर डिजीज’ (एमएएसएलडी) के मामलों में 2050 तक तेज वृद्धि होने की संभावना है।

इस चिंताजनक स्थिति के बीच, पंजाब इस चुनौती का डटकर सामना करने के लिए आगे बढ़ रहा है। राज्य ने विस्तृत स्क्रीनिंग और कैशलेस ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के माध्यम से अपनी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया है, जिससे वह आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी इस तेजी से बढ़ रही ‘मूक महामारी’ के खिलाफ भारत की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

दुनिया भर में लीवर संबंधी बीमारियां एक ‘मूक महामारी’ के रूप में उभर रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का अनुमान है कि लगभग हर तीन में से एक वयस्क व्यक्ति इससे प्रभावित है। यह ऐसी बीमारी है जिसके लक्षण अक्सर तब सामने आते हैं जब गंभीर नुकसान हो चुका होता है। ‘द लैंसेट’ का अध्ययन चेतावनी देता है कि मरीजों की संख्या 2023 में 1.3 अरब से बढ़कर 2050 तक 1.8 अरब हो सकती है, जो 42 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। भारत में भी इसी तरह का रुझान देखा जा रहा है, खासकर शहरी आबादी और उच्च-जोखिम समूहों में यह संख्या तेजी से बढ़ रही है।

पंजाब में डॉक्टरों के अनुसार हेपेटाइटिस-सी संक्रमण, शराब के सेवन और बदल रही खान-पान की आदतों के कारण स्थिति और गंभीर हो रही है। पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर एंड बिलियरी साइंसेज (PILBS) के डायरेक्टर डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कहा, “भारत में लीवर की गंभीर बीमारियों के मुख्य कारणों में शराब एक बड़ा कारण है और यह वायरल हेपेटाइटिस के साथ मिलकर हालत को और भी खराब कर देती है। फैटी लीवर डिजीज अब शराब और हेपेटाइटिस-सी के साथ एक मुख्य कारण के रूप में उभर रही है। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाना, तली हुई चीजें और ट्रांस-फैट्स का लंबे समय तक सेवन समस्या को बढ़ा रहा है।”

डॉक्टर एक चिंताजनक बदलाव भी देख रहे हैं कि कम उम्र के मरीजों में लीवर की बीमारियां तेजी से सामने आ रही हैं। इसका मुख्य कारण शराब का बढ़ता सेवन और हेपेटाइटिस-सी का फैलाव है, जो राज्य में बदल रही जीवनशैली और व्यवहारिक रुझानों को दर्शाता है।

स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में उन्होंने बताया, “पंजाब ने अपनी रेफरल प्रणाली को मजबूत किया है, जिससे लीवर बीमारियों की पहले की तुलना में जल्दी पहचान हो रही है। गांवों में स्क्रीनिंग और विशेषज्ञ सेवाओं तक पहुंच भी सुधरी है, हालांकि फैटी लीवर की ‘मूक’ प्रकृति के कारण देर से पहचान की समस्या अभी भी मौजूद है।”

वित्तीय और पहुंच से जुड़ी बाधाओं को दूर करने के लिए राज्य ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत कवरेज का विस्तार किया है, जो सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में प्रति परिवार प्रति वर्ष 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज प्रदान करती है। डॉ. सिंह बताते हैं कि मरीज के भर्ती होने पर, ज्यादातर टेस्ट और दवाइयां इस योजना के तहत कवर होती हैं, जिससे मरीज का जेब से होने वाला खर्च कम होता है। इस योजना में जांच, अस्पताल में दाखिला और विशेषज्ञ सेवाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना ने कई मरीजों को बेहतर इलाज प्राप्त करने में मदद की है और यह कई लोगों की जिंदगी बचाने में निर्णायक साबित हुई है।

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने भी कहा, “यह योजना जेब से होने वाले खर्च को घटाती है, इसके साथ ही रोग की पहचान और इलाज में होने वाली देरी को रोकती है।”

जन स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत विस्तृत स्क्रीनिंग से, शुरुआती पहचान में सुधार होने और बीमारी की प्रगति को धीमा करने की उम्मीद है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लीवर डिजीज के शुरुआती चरण को जीवनशैली में बदलाव जैसे बेहतर खुराक, नियमित शारीरिक गतिविधियां और शराब के सेवन में कमी करके अक्सर ठीक किया जा सकता है।

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सूचना एवं लोक संपर्क विभाग, पंजाब

*पटियाला के ड्राइवर की मां ने कैंसर को हराया मुख्यमंत्री सेहत योजना बनी मुश्किल समय की सहारा*

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योजना के तहत कवर किया गया लाख रुपये से अधिक का इलाज**

चंडीगढ़/पटियाला, 18 अप्रैल :

पटियाला के रहने वाले गुरपिंदर जीत सिंह की जिंदगी पांच महीने पहले अचानक ऐसे मोड़ पर आ खड़ी हुई, जहां हर रास्ता मुश्किल नजर आने लगा था। उनकी 65 वर्षीय माता बलजीत कौर ने गंभीर बीमारी के कारण धीरे-धीरे खाना-पीना छोड़ दिया था। मजबूर और बेबस बेटे के लिए यह सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि रोज टूटती जा रही उम्मीदों का दर्द था।

गुरपिंदर जीत के अनुसार पहले निजी डॉक्टरों के पास दौड़-भाग की गई, फिर मां को राजिंद्रा अस्पताल, पटियाला रेफर कर दिया गया। दवाइयां चलीं, टेस्ट हुए, लेकिन हालत सुधरने की बजाय और गंभीर हो गई। जब रिपोर्ट आई तो जैसे आसमान ही ढह पड़ा—मां को बच्चेदानी का कैंसर था।

गुरपिंदर के लिए यह बहुत मुश्किल घड़ी थी, यह उस मां की जिंदगी का सवाल था जिसने उसे जन्म दिया और पाला-पोसा। आज वह जिंदगी और मौत से जूझ रही थी। बिना देरी किए वह मां को संगरूर के टाटा कैंसर अस्पताल ले गया। इलाज शुरू हुआ, लेकिन पहले ही झटके में 60 हजार रुपये से अधिक खर्च हो गए। एक ड्राइवर की सीमित आय के सामने यह राशि पहाड़ जैसी थी।

गुरपिंदर के मन में एक ही सवाल था—“मां को कैसे बचाऊं?” कर्ज लेने की नौबत भी आ गई थी। तभी, जैसे अंधेरे में एक रोशनी की किरण उसके सामने आई। अस्पताल में उसे मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के बारे में पता लगा।

बिना और देरी किए गुरपिंदर ने वहीं रजिस्ट्रेशन करवा लिया। कुछ समय बाद ही उसके मोबाइल पर मैसेज आ गया और स्मार्ट कार्ड बन गया। इसके बाद जो हुआ, वह उसके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। लाखों रुपये का इलाज—जिसमें महंगे टेस्ट, बार-बार कीमोथेरेपी, दवाइयां, ऑपरेशन, आईसीयू, वेंटिलेटर और अस्पताल में रहने-खाने तक का खर्च शामिल था—सारा खर्च सरकार ने उठाया।

गुरपिंदर की आंखें भर आती हैं जब वह कहता है, “मां तो मां होती है… उसे हर हाल में बचाना था। पैसे नहीं थे, लेकिन रब ने इस योजना के रूप में रास्ता दिखा दिया।” डॉक्टरों के लिए भी यह केस बहुत चुनौतीपूर्ण था। कैंसर बच्चेदानी से आगे बढ़कर लीवर और फेफड़ों तक फैल गया था। पहले तीन बार कीमोथेरेपी दी गई, लेकिन शरीर कमजोर होने के कारण साइड इफेक्ट सामने आए। फिर धीरे-धीरे डोज कम करके नौ बार और कीमोथेरेपी दी गई।

इलाज के बाद ट्यूमर एक जगह सिमट गया और डॉक्टरों ने लगभग आठ घंटे लंबा ऑपरेशन करके उसे निकाल दिया। 35 से 40 टांकों के साथ मां ने दर्द सहते हुए भी जिंदगी की डोर थामे रखी। मां ऑपरेशन के बाद दो-तीन दिनों के लिए आईसीयू में और वेंटिलेटर पर रहीं, फिर उन्हें वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।

गुरपिंदर हर वक्त मां के पास बैठा रहता—कभी दवाई देता, कभी सिर सहलाता। आठ दिन अस्पताल में बिताने के बाद जब मां की हालत सुधरने लगी, तो जैसे उनकी दुनिया वापस आ गई। 24 नवंबर 2025 से शुरू हुआ यह सफर अभी भी जारी है। अगले इलाज और जांच के लिए वे मुल्लांपुर स्थित अस्पताल में फॉलोअप के लिए जाएंगे। कुछ दवाइयां जो अस्पताल में उपलब्ध नहीं थीं, उनका खर्च गुरपिंदर ने खुद उठाया, लेकिन बाकी सारा इलाज योजना के तहत मुफ्त हुआ।

अस्पताल में गायनेकोलॉजी की डॉ. शिवाली ने सर्जरी के डॉक्टरों के साथ मिलकर ऑपरेशन किया। टाटा मेमोरियल के डॉक्टरों के अनुसार, इस सर्जरी पर दवाइयों को मिलाकर कम से कम 8 से 10 लाख रुपये का खर्च हुआ है।

दो बच्चों के पिता और एक साधारण ड्राइवर गुरपिंदर के लिए यह राहत शब्दों से परे है। वह कहता है, “अब सुकून है कि मां बिना इलाज के नहीं मरेगी… सरकार ने हमें उम्मीद दी है।”

यह सिर्फ इलाज की कहानी नहीं, बल्कि एक बेटे के संघर्ष, मां के लिए प्यार और एक ऐसी योजना की कहानी है, जिसने मुश्किल वक्त में सहारा बनकर एक परिवार को टूटने से बचा लिया। यह सफर इस परिवार के लिए गंभीर बीमारी की कठोर हकीकत को बयान करता है, साथ ही यह भी दर्शाता है कि सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं और प्रभावशाली सरकारी मदद कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यह यकीनी बनाता है कि आर्थिक तंगी किसी भी व्यक्ति के जीवन बचाने वाले इलाज के रास्ते में रुकावट न बने।

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