Thursday, September 10, 2026
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संपादकीय

ब्रिक्स समिट 2026: पीएम मोदी की मेज़बानी में दिल्ली में जुटेंगे दुनिया भर के नेता

September 10, 2026 06:44 PM

 भूपिंद्र शर्मा, चंडीगढ़ः भारत एक बार फिर वैश्विक कूटनीति के केंद्र में आ खड़ा हुआ है। नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर 2026 को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है, जिसकी मेज़बानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। यह सम्मेलन भारत मंडपम, प्रगति मैदान में आयोजित किया जा रहा है और पांच वर्षों बाद भारत को ब्रिक्स की अध्यक्षता करने और इस स्तर के बड़े आयोजन की मेज़बानी करने का अवसर मिला है। भारत ने इस वर्ष की अपनी अध्यक्षता एक जनवरी से संभाली थी और तब से लेकर अब तक पच्चीस से अधिक शहरों में तीन सौ पचास से भी ज़्यादा बैठकों और उच्चस्तरीय आयोजनों का आयोजन किया जा चुका है। दिलचस्प बात यह भी है कि इस वर्ष ब्रिक्स की स्थापना के बीस वर्ष भी पूरे हो रहे हैं, जिससे यह आयोजन प्रतीकात्मक रूप से भी विशेष महत्व रखता है।

इस बार का सम्मेलन "बिल्डिंग फॉर रेज़िलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी" यानी लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के निर्माण की थीम पर केंद्रित है, जिसके साथ भारत ने "ह्यूमैनिटी फर्स्ट" यानी मानवता को सर्वोपरि रखने के सिद्धांत को भी जोड़ा है। यह दृष्टिकोण दर्शाता है कि भारत इस मंच का उपयोग केवल आर्थिक और भू-राजनीतिक मुद्दों तक सीमित न रखकर वैश्विक दक्षिण की व्यापक चिंताओं को भी सामने लाना चाहता है।

सम्मेलन में शामिल होने वाले नेताओं की सूची इस आयोजन की वैश्विक अहमियत को स्पष्ट करती है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की उपस्थिति पहले ही तय मानी जा रही है, और उनका यह दौरा दिसंबर 2025 में हुई भारत-रूस द्विपक्षीय शिखर वार्ता के कुछ ही महीनों बाद हो रहा है। चीन की ओर से राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की खबरें भी सामने आई हैं, हालांकि उनके अंतिम कार्यक्रम और प्रधानमंत्री मोदी के साथ संभावित द्विपक्षीय मुलाकात को लेकर पूरी स्पष्टता अभी बाकी है। बताया जा रहा है कि चीन की ओर से चार सौ के करीब अधिकारियों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल दिल्ली पहुंचेगा, जो इस आयोजन को लेकर बीजिंग की गंभीरता को दर्शाता है। चीन के विदेश मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि वह ब्रिक्स सहयोग को अत्यंत महत्व देता है और भारत की मौजूदा अध्यक्षता के तहत इस सम्मेलन की सफलता में पूरा सहयोग देगा।

इनके अलावा ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको के भी सम्मेलन में शामिल होने की पुष्टि हुई है। कज़ाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव भी इस आयोजन का हिस्सा बनेंगे। साझेदार देशों की ओर से मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नविराकुल और इथियोपिया के प्रधानमंत्री आबी अहमद के भी आने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के भी इस सम्मेलन में हिस्सा लेने की संभावना है, हालांकि इसकी औपचारिक पुष्टि अभी लंबित है।

गौरतलब है कि ब्रिक्स समूह अब अपने मूल स्वरूप से कहीं आगे बढ़ चुका है। वर्ष 2006 में ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन द्वारा शुरू किए गए इस मंच में 2010 में दक्षिण अफ्रीका शामिल हुआ, जिसके बाद यह ब्रिक से ब्रिक्स बना। इसके बाद 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात इसमें जुड़े, और बाद में इंडोनेशिया भी पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल हुआ। इस तरह अब यह समूह ग्यारह पूर्ण सदस्य देशों का एक विस्तृत संगठन बन चुका है, जो एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व और लातिन अमेरिका तक फैला हुआ है। यह विस्तार भारत को वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं को सामने रखने और आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने का एक बड़ा मंच प्रदान करता है।

सम्मेलन का कार्यक्रम दो हिस्सों में बांटा गया है। शनिवार, 12 सितंबर को मुख्य नेताओं की बैठक होगी, जिसमें ग्यारह पूर्ण सदस्य देश शामिल होंगे, जबकि रविवार, 13 सितंबर को साझेदार और आमंत्रित देशों के साथ विस्तारित सत्र आयोजित किया जाएगा। इस दौरान व्यापार, निवेश, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, आपूर्ति शृंखलाओं की मज़बूती, बहुपक्षवाद और वैश्विक शासन में सुधार जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है। मौजूदा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और मध्य पूर्व तथा यूरोप में जारी तनावों की पृष्ठभूमि में यह सम्मेलन और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि इसमें शामिल कई देश इन घटनाक्रमों से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रभावित हैं।

सुरक्षा की दृष्टि से भी यह आयोजन एक बड़ी चुनौती है। विदेशी नेताओं और उनके प्रतिनिधिमंडलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों सहित करीब तीस हज़ार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। इतने बड़े स्तर पर सुरक्षा प्रबंध यह दर्शाते हैं कि भारत इस सम्मेलन की सफलता को लेकर कितना गंभीर है, क्योंकि यह न केवल कूटनीतिक बल्कि प्रतिष्ठा से जुड़ा विषय भी है।

कुल मिलाकर, यह शिखर सम्मेलन भारत के लिए एक ऐसा अवसर है जहां वह अपनी बढ़ती वैश्विक भूमिका को रेखांकित कर सकता है। एक ऐसे समय में जब दुनिया कई मोर्चों पर विभाजित नज़र आती है, नई दिल्ली में जुटने वाले विविध नेताओं का यह समूह बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की दिशा में भारत की बढ़ती भूमिका का एक सशक्त संकेत देता है।

 

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