भूपिंद्र शर्मा, चंडीगढ़ः स्लैब बदलने की उम्मीद छोड़ दीजिए। कल यानि 8 अक्टूबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में जब जी एस टी परिषद की 57वीं बैठक होगी, तो मुख्य मुद्दा आपकी पसंदीदा चीज़ का सस्ता होना नहीं होगा। मुद्दा कुछ शांत, लेकिन लाखों कारोबारियों के लिए कहीं ज़्यादा असरदार है: जी एस टी को निभाना आसान बनाने वाली पाँच-सूत्री योजना। केंद्र का संदेश साफ़ है कि दरें तय हो चुकी हैं, अब कागज़ी झंझट सुधारने की बारी है।
सरकार के भरोसे के पीछे आँकड़े हैं। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार अक्टूबर से जुलाई के बीच कर योग्य आपूर्ति सालाना आधार पर 25.8 प्रतिशत बढ़ी, जबकि कुल कर देनदारी 13.6 प्रतिशत बढ़ी। घरेलू कर योग्य आपूर्ति पर प्रभावी कर दर 14.55 प्रतिशत से घटकर 13.13 प्रतिशत रह गई। अधिकारी इसे दो-दर ढाँचे की सफलता का प्रमाण मानते हैं, इसीलिए व्यापक दर बदलाव की उम्मीद नहीं है। एजेंडे में केवल सीमित तर्कसंगतीकरण और स्पष्टीकरण के मुद्दे हैं।
प्रस्ताव के मुताबिक दरों में बदलाव पर साल में केवल एक बार विचार होगा और वह 1 अप्रैल से लागू होगा। जिसने भी अचानक दरें बदलने पर स्टॉक की कीमतें, अनुबंध और बिलिंग सॉफ़्टवेयर दोबारा तैयार किए हैं, वह इसका महत्व समझेगा। पूर्वानुमान अपने आप में एक सुधार है।
कारोबारियों के लिए यह शायद सबसे भावनात्मक मुद्दा है। अभी श्रृंखला में कहीं ऊपर कोई आपूर्तिकर्ता चूक जाए तो खरीदार का इनपुट टैक्स क्रेडिट छिन सकता है। प्रस्ताव कहता है कि जिस खरीदार के पास वैध चालान है, जिसने माल प्राप्त किया है और कर सहित पूरा भुगतान किया है, उसका क्रेडिट ऊपर की गड़बड़ी से अप्रभावित रहेगा। क्रेडिट की श्रृंखला से बाहर कुछ कारोबारी खर्च भीतर लाए जाएंगे, और जहाँ किसी सेवा को उसी कारोबार की श्रेणी में आगे बेचा जाता है, वहाँ दोहरा कराधान रोका जाएगा।
फ़िलहाल दावों के निपटारे में औसतन करीब 25 दिन लगते हैं। प्रस्तावित ढाँचे में 10 दिन के भीतर पावती और जोखिम जाँच के बाद पात्र रिफंड के 90 प्रतिशत का भुगतान शामिल है। सीमा शुल्क और बैंकिंग प्रणालियों से जानकारी अपने आप आएगी, यानी आवेदकों को वह साबित नहीं करना पड़ेगा जो सरकारी डेटा में पहले से मौजूद है। सेवाओं तथा संयंत्र और मशीनरी पर चुकाए गए कर के रिफंड की पात्रता भी बढ़ाई जाएगी।
परिषद पंजीकरण और संशोधन के और स्वचालन पर विचार करेगी। करीब 61 प्रतिशत पंजीकरण पहले से ही बिना अधिकारी के दखल के तीन कार्यदिवस में मंज़ूर हो जाते हैं, और लगभग 66 प्रतिशत संशोधन आवेदन स्वतः निपटाने का प्रस्ताव है। प्रक्रियात्मक चूक पर निलंबित पंजीकरण चूक सुधरते ही अपने आप बहाल हो सकेंगे, और कारोबार बंद होने पर पंजीकरण रद्द करने की प्रक्रिया सरल होगी।
निर्यातकों को सबसे ज़्यादा फ़ायदा हो सकता है। विदेशी ग्राहक को विदेश स्थित शाखा के ज़रिए बिल देने पर निर्यात का दर्जा नहीं जाएगा। विदेशी ग्राहकों को दी जाने वाली परीक्षण, मरम्मत, प्रमाणन और अनुसंधान सेवाएँ, माल भारत में रहने पर भी, निर्यात मानी जा सकती हैं। भुगतान प्राप्ति के नियम भारतीय रिज़र्व बैंक के मानदंडों के अनुरूप होंगे। ई-कॉमर्स मंचों पर लगभग हर दस में से नौ विक्रेता छोटे कारोबारी हैं। उन्हें अपने गृह राज्य में सत्यापन पूरा करके देशभर में बेचने की छूट देने का प्रस्ताव है। लेन-देन का कर-व्यवहार प्लेटफ़ॉर्म की अनुबंध-संरचना के बजाय अंतर्निहित सेवा के आधार पर तय होगा।
पैकेज में कई अपराधों को जी एस टी कानून के आपराधिक प्रावधानों से बाहर करने का प्रस्ताव है। देरी, अनजानी चूक और भुगतान में कमी के मामले कर वसूली, ब्याज और अनुपातिक जुर्माने से निपटाए जाएंगे, गिरफ़्तारी के डर से नहीं। अधिकारी इसे ऐसा प्रवर्तन बताते हैं जो हिरासत के बजाय धन के ज़रिए काम करता है। छोटे दुकानदार के लिए, जो नोटिस के नाम से घबराता है, यह बदलाव व्यावहारिक भी है और मनोवैज्ञानिक भी।
यह सब अभी कानून नहीं बना है। ये प्रस्ताव हैं, जिन्हें राज्यों से परामर्श के बाद विधि समिति और फिटमेंट समिति ने तैयार किया है, और इन्हें परिषद की मंज़ूरी चाहिए। परिषद में केंद्र के पास एक-तिहाई और राज्यों के पास दो-तिहाई मत हैं, इसलिए सहमति मायने रखती है। मंज़ूरी मिल भी जाए तो बदलाव 2027 तक चरणबद्ध ढंग से लागू होने की उम्मीद है। तेज़ रिफंड और स्वचालित पंजीकरण परिषद के प्रस्तावों जितना ही जी एस टी नेटवर्क की तकनीक पर निर्भर करेंगे। समय-सीमा के दिन पोर्टल अटक जाए तो स्वचालन के वादे का कोई मतलब नहीं रहता।
राज्य ब्योरे की बारीकी से जाँच भी करेंगे। खरीदारों को क्रेडिट की सुरक्षा मिलने से वसूली की रणनीति प्रभावित हो सकती है। अपराधों को आपराधिक कानून से बाहर करने पर उन लोगों की राय भी आएगी जो अभियोजन को कर-चोरी के विरुद्ध निवारक मानते हैं। भरोसे और सतर्कता के संतुलन पर बहस तय है।
2025 का बदलाव इसलिए बड़ा सुधार था कि उसने बिल पर चुकाई जाने वाली रकम बदली। 8 अक्टूबर का पैकेज अलग किस्म का सुधार है। उसका लक्ष्य यह बदलना है कि कारोबारी कितनी आसानी से नियमों का पालन कर सकते हैं, रिफंड ले सकते हैं, निर्यात कर सकते हैं और बेच सकते हैं। अगर परिषद इसे मंज़ूरी देती है और अमल सुचारू रहता है, तो असली लाभ कम कर दर नहीं होगा, बल्कि वे घंटे, वह चिंता और वह कार्यशील पूँजी होगी जो छोटे कारोबारियों को वापस मिलेगी। करदाता लंबे समय से ऐसे जी एस टी का इंतज़ार कर रहे हैं जिसे समझना डर से आसान हो। गुरुवार को परिषद दिखा सकती है कि यह इंतज़ार ख़त्म हो रहा है या नहीं।