दिल्ली-एनसीआर एक बार फिर विषाक्त हवा से जूझ रहा है। राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 325 तक पहुंच गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। प्रदूषण का यह स्तर सांस संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों, बुजुर्गों और बच्चों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। एक बार फिर धुंध की मोटी चादर ने सुबह-शाम की दृश्यता पर असर डाला है, जबकि हवा की गति कम होने और तापमान गिरने से हालात और बिगड़ते दिख रहे हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, नवंबर से दिसंबर के शुरुआती पखवाड़े के दौरान हवा की गुणवत्ता में गिरावट एक सामान्य प्रवृत्ति रही है। पर इस साल हालात कुछ अधिक चिंताजनक इसलिए हैं क्योंकि दिल्ली में प्रदूषक कणों का जमाव तेजी से हो रहा है और विंड स्पीड काफी धीमी है। यही वजह है कि हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 कण लंबे समय तक तैरते रहते हैं, जिससे AQI में सुधार नहीं हो पा रहा।
केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से निर्माण कार्यों पर रोक, कचरा जलाने पर निगरानी, और प्रदूषण रोधी उपायों को सख्ती से लागू करने की कोशिशें जारी हैं। ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत कई क्षेत्रों में नियमों को सख्त किया गया है। बावजूद इसके, विशेषज्ञों का कहना है कि मौसमी परिस्थितियों और स्थानीय उत्सर्जन के संयुक्त प्रभाव के कारण राहत फिलहाल संभव नहीं दिख रही।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि प्रदूषण के मौजूदा स्तर पर लंबे समय तक रहना फेफड़ों की क्षमता को कमजोर कर सकता है, दिल के मरीजों के लिए खतरा बढ़ा सकता है और बच्चों में एलर्जी व अस्थमा बढ़ने का जोखिम पैदा कर सकता है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि संक्रमित मौसम में बिना जरूरत घर से बाहर निकलने से बचें, एन-95 मास्क का प्रयोग करें और घरों में एयर प्यूरिफायर का इस्तेमाल बढ़ाएं।
मौसम विभाग के अनुसार, हवा की गति में सुधार और पश्चिमी विक्षोभ की हलचल के बिना प्रदूषण स्तर में गिरावट की उम्मीद नहीं की जा सकती। अनुमान है कि दिसंबर के मध्य तक ही हवा का बहाव बढ़ेगा, जिससे धुंध कम होगी और हवा की गुणवत्ता में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है।
फिलहाल दिल्ली को जहरीली हवा के बीच सावधानी और संयम दोनों की जरूरत है—क्योंकि मौसमी राहत आने में अभी वक्त लग सकता है।