नेशनल हेराल्ड केस में एक बड़ा मोड़ सामने आया है। जानकारी के अनुसार, सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ 58 दिन पहले एक नई FIR दर्ज की गई थी, जिसमें कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा का नाम भी शामिल है। हैरानी की बात यह है कि पार्टी के भीतर ज्यादातर नेताओं को इस कार्रवाई की जानकारी तक नहीं थी। मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और कांग्रेस इसे केंद्र की एजेंसियों द्वारा की गई एकतरफा कार्रवाई बता रही है।
सूत्रों के अनुसार, यह FIR कथित वित्तीय अनियमितताओं, फंड के दुरुपयोग और यंग इंडियन से जुड़े लेनदेन पर आधारित है। शिकायतकर्ता ने कई दस्तावेज पेश किए हैं, जिनमें फंड ट्रांसफर और संपत्ति से संबंधित कुछ पुराने रिकॉर्ड शामिल बताए जा रहे हैं। आरोप है कि कंपनी संरचना और आर्थिक गतिविधियों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिससे कर नियमों और पारदर्शिता के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ।
FIR दर्ज होने के बाद भी जांच एजेंसियों ने इसे सार्वजनिक नहीं किया था, जिससे पूरे मामले पर रहस्य बना रहा। अब जब इसकी जानकारी सामने आई है, तो कांग्रेस नेतृत्व में असहजता देखी जा रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि उन्हें इस नई कार्रवाई की जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए मिली है। कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक बदले की कार्रवाई’ करार देते हुए सरकार पर एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है।
वहीं, सरकारी स्रोतों का कहना है कि FIR तय प्रक्रिया के तहत दर्ज की गई है और जांच साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी। उनका कहना है कि केस से जुड़े दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड कई महीनों से समीक्षा में थे, जिसके बाद यह कदम उठाया गया।
इस पूरी स्थिति पर सैम पित्रोदा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राहुल गांधी पहले भी नेशनल हेराल्ड मामले को “झूठे आरोपों पर आधारित” बताते रहे हैं, जबकि पार्टी इसे विपक्षी आवाज को दबाने की कोशिश कहती रही है।
अब नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसियां इस FIR के आधार पर आगे क्या कदम उठाती हैं। इससे स्पष्ट है कि नेशनल हेराल्ड केस एक बार फिर राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लौट आया है और आने वाले दिनों में यह मामला देश की सियासत को और गर्म कर सकता है।