स्थानीय प्रशासन और पुलिस के अनुसार, दुर्घटना सुबह करीब 7 बजे हुई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। राहगीरों और स्थानीय लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और पुलिस को सूचना दी। कुछ ही मिनटों में एंबुलेंस और रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुंच गईं। कई घायल यात्रियों को अस्पताल ले जाने के लिए बसों की खिड़कियां और दरवाज़े काटने पड़े, क्योंकि टक्कर के बाद बसों का ढांचा जाम हो गया था।
डॉक्टरों का कहना है कि कई घायलों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। प्रशासन ने अस्पतालों में विशेष मेडिकल टीमों की तैनाती की है और घायलों को जल्द से जल्द बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। हादसे के बाद हेल्पलाइन नंबर जारी कर परिवारों को सूचना दी जा रही है और पहचान प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि हादसा संभवतः तेज़ रफ्तार और ओवरटेक करने की कोशिश के कारण हुआ। हालांकि, पुलिस ने घटना की विस्तृत जांच शुरू कर दी है और दोनों बसों के ड्राइवरों की जिम्मेदारी व तकनीकी खराबी जैसी संभावनाओं का भी पता लगाया जा रहा है। सड़क पर लगे सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला जा रहा है, जिससे टक्कर का वास्तविक कारण स्पष्ट हो सके।
हादसे के बाद तमिलनाडु सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे की घोषणा की है और घायलों के इलाज का पूरा खर्च वहन करने का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य तेज़ करने के निर्देश दिए।
यह घटना एक बार फिर राज्य में सड़क सुरक्षा और बस सेवाओं की हालत पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती रफ्तार, लापरवाही और परिवहन व्यवस्थाओं में निगरानी की कमी बड़े हादसों को न्योता दे रही है। हादसे के बाद क्षेत्र में भारी जाम लग गया, जिसे साफ कराने में पुलिस को लंबा समय लगा।
तमिलनाडु में हुए इस भीषण बस हादसे ने पूरे क्षेत्र को सदमे में डाल दिया है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे भीड़ न जुटाएं और राहत कार्यों में बाधा न डालें।