छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता मिली है। जिले में सक्रिय 65 लाख रुपये के इनामी 37 नक्सलियों ने शनिवार को आत्मसमर्पण कर दिया। सरेंडर करने वालों में कई कुख्यात नक्सली शामिल हैं, जिन पर पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमलों का गंभीर आरोप रहा है। इसी समूह में वह कुख्यात नक्सली भीमा उर्फ भीमा मदावी भी शामिल है, जो दंतेवाड़ा और बीजापुर में हुए कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता है। भीमा पर 26 जवानों की शहादत के लिए जिम्मेदार होने का आरोप है।
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, इन नक्सलियों ने “लोन वर्राटू” अभियान के तहत आत्मसमर्पण किया। यह अभियान उन नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने का अवसर देता है, जो हिंसा और माओवादी विचारधारा से तंग आ चुके हैं। प्रशासन लंबे समय से ऐसे लोगों को समाज की मुख्य धारा में लाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है और उन्हें पुनर्वास और सुरक्षित भविष्य का भरोसा दे रहा है।
सरेंडर करने वाले नक्सलियों में डीएकेएमएस, सीएनएमएम, मिलिशिया और जनताना सरकार से जुड़े कई सक्रिय सदस्य शामिल हैं। इन लोगों पर पुलिस थानों पर हमले, आईईडी विस्फोट, जवानों की हत्या, सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने और ग्रामीणों को डराने-धमकाने के कई आरोप रहे हैं। कई नक्सलियों पर 1 लाख से लेकर 5 लाख रुपए तक के इनाम घोषित थे।
अधिकारियों का कहना है कि लगातार बढ़ते सुरक्षा दबाव, स्थानीय लोगों का विरोध और नक्सल संगठन के भीतर बढ़ती अनिश्चितता ने इन नेताओं को हथियार छोड़ने के लिए मजबूर किया। साथ ही विकास योजनाओं की पहुंच और ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा बलों की बढ़ती मौजूदगी के कारण नक्सली गतिविधियों में कमी आई है।
सरेंडर के बाद सभी नक्सलियों को पुनर्वास नीति के तहत आवश्यक सुविधाएँ, कौशल प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन लोगों का भविष्य अब हिंसा से दूर सुरक्षित नागरिक जीवन में है।
दंतेवाड़ा प्रशासन का कहना है कि यह आत्मसमर्पण माओवाद के खिलाफ जारी लड़ाई में एक बड़ी उपलब्धि है। इससे क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति और मजबूत होगी तथा नए विकास कार्यों को गति मिलेगी।
इस बड़े सरेंडर से सुरक्षा एजेंसियों का मनोबल बढ़ा है और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में और भी नक्सली मुख्यधारा में लौटेंगे।