गाजा में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। क्षेत्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों और राहत संगठनों की ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, संघर्ष में मृतकों की संख्या 70,000 के पार पहुंच गई है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि युद्धविराम लागू होने के बाद भी 350 से अधिक लोगों की जान गई, जो इस बात का संकेत है कि हिंसा और हमलों का सिलसिला पूरी तरह थमा नहीं है।
मानवीय संगठनों का कहना है कि युद्धविराम के बावजूद कई इलाकों में छिटपुट हमले हो रहे हैं, जिनमें आम नागरिक लगातार हताहत हो रहे हैं। ज़्यादातर मौतें उन क्षेत्रों में हुई हैं, जहां राहत वितरण, पुनर्स्थापन कार्य और लोगों के स्थानांतरण का काम चल रहा था। विस्फोटक अवशेषों, ढही इमारतों और अधूरे बचाव कार्यों के कारण भी कई लोग घायल या मारे जा रहे हैं।
गाजा के उत्तर और मध्य हिस्सों में स्थिति सबसे अधिक गंभीर बताई जा रही है। यहाँ बड़ी संख्या में लोग अब भी मलबे के बीच फंसे हैं और राहत टीमों को जगह-जगह खतरनाक परिस्थितियों में काम करना पड़ रहा है। कई इलाकों में संचार व्यवस्था प्रभावित है, जिससे वास्तविक आंकड़ों का पता चलने में देरी हो रही है। राहत एजेंसियों का कहना है कि अब भी हजारों लोग लापता हैं और मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।
युद्धविराम के बाद मिली सीमित राहत के बावजूद भोजन, पानी, दवाओं और इंधन की भारी कमी बरकरार है। अस्पतालों में गंभीर रूप से घायल लोगों की भीड़ लग गई है, जबकि अधिकांश मेडिकल सुविधाएँ या तो नष्ट हो चुकी हैं या अपनी क्षमता से कई गुना अधिक दबाव में काम कर रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कई मरीजों की मौत इसलिए भी हो रही है, क्योंकि समय पर इलाज या सर्जरी उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार संघर्ष विराम के पालन पर ज़ोर दे रहा है, लेकिन जमीन पर हालात अभी भी अस्थिर बने हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि यदि गाजा में व्यापक मानवीय सहायता तुरंत नहीं पहुंचाई गई, तो मौतों का यह सिलसिला और भयावह रूप ले सकता है। कई देशों ने राहत सामग्री भेजने की पेशकश की है, लेकिन सुरक्षा चुनौतियों के कारण वितरण में देरी हो रही है।
गाजा में जारी मानवीय संकट अब पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। हजारों परिवार बेघर हैं, बच्चे कुपोषण और बीमारियों की चपेट में हैं और महिलाएं–बुजुर्ग अत्यधिक दयनीय परिस्थितियों में जीवन बिता रहे हैं। राहत कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक स्थायी शांति नहीं होती, तब तक गाजा में मौतों और तबाही का यह दौर थमना मुश्किल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि संघर्ष विराम के बाद भी बढ़ती मौतें इस बात को दर्शाती हैं कि गाजा में पुनर्निर्माण और सुरक्षा की राह बेहद कठिन है। अंतरराष्ट्रीय दबाव और मानवीय प्रयासों के बावजूद, स्थानीय लोगों की पीड़ा अभी भी कम नहीं हुई है।