भूपिंद्र शर्मा, चंडीगढ़ः भारत की अर्थव्यवस्था जिस रफ्तार से वैश्विक मंच पर अपनी पहचान मजबूत कर रही है, उसी के समानांतर देश के युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए रास्ते भी खुल रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में एक वर्चुअल रोजगार मेले को संबोधित करते हुए कहा कि भारत द्वारा विभिन्न देशों के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौते यानी एफटीए, युवाओं के लिए रोजगार और करियर के नए द्वार खोल रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत अब तक चालीस मुक्त व्यापार समझौते कर चुका है और ये समझौते न केवल व्यापार को बढ़ावा देते हैं, बल्कि देश के उद्यमियों के लिए नई साझेदारियों का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार, इन समझौतों से नए बाजारों तक पहुंच आसान हुई है, जिसका सीधा लाभ युवा पीढ़ी को करियर के नए विकल्पों के रूप में मिल रहा है।
बीसवें रोजगार मेले के दौरान प्रधानमंत्री ने पचास हजार से अधिक चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे, जो अब विभिन्न सरकारी विभागों और संगठनों में अपनी सेवाएं देंगे। यह आयोजन देश भर के पैंतालीस स्थानों पर एक साथ आयोजित किया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार रोजगार सृजन को केवल आंकड़ों तक सीमित न रखकर, इसे एक व्यापक और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया के रूप में देख रही है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि दुनिया भर में भारतीय प्रतिभा, कौशल और नवाचार को लेकर विश्वास बढ़ा है, और इसी भरोसे ने युवाओं से जुड़ी अपेक्षाओं को भी ऊंचा किया है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत के स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है, और यह उपलब्धि देश की युवा शक्ति का ही प्रतिबिंब है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्टार्टअप की यह कहानी अब केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि छोटे शहरों तक इसका विस्तार हो चुका है। आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि आज मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में से लगभग आधे टियर टू और टियर थ्री शहरों से आ रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि उद्यमिता की भावना अब देश के हर कोने तक पहुंच रही है।
प्रधानमंत्री ने हाल ही में संपन्न ब्रिक्स सम्मेलन का भी जिक्र किया और कहा कि भारत का प्रयास रहा है कि ब्रिक्स के तहत होने वाला सहयोग केवल सरकारों के स्तर तक सीमित न रहे, बल्कि इसमें उद्यमियों, किसानों, महिलाओं और युवाओं की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो। उनके अनुसार, जब तक समाज का हर वर्ग किसी भी अंतरराष्ट्रीय साझेदारी में सक्रिय भूमिका नहीं निभाएगा, तब तक उसका पूरा लाभ देश को नहीं मिल पाएगा।
रोजगार सृजन को लेकर सरकार की रणनीति केवल व्यापार समझौतों तक सीमित नहीं है। प्रधानमंत्री ने बताया कि कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति, स्किल इंडिया मिशन और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना जैसी पहलों पर भी तेजी से काम हो रहा है। इसके अलावा पीएम-सेतु योजना के तहत देश के करीब एक हजार सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों यानी आईटीआई का आधुनिकीकरण किया जा रहा है, जिसके लिए लगभग साठ हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है और इसमें उद्योग जगत की भी भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की कोशिश यही है कि युवाओं की शिक्षा और कौशल, बदलती अर्थव्यवस्था की जरूरतों के साथ कदमताल करते रहें।
रोजगार के अवसर तभी बढ़ते हैं जब अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़े, निवेश में इजाफा हो और नए उद्योग स्थापित हों। प्रधानमंत्री ने इसी संदर्भ में देश की आर्थिक वृद्धि दर का हवाला देते हुए कहा कि तेज आर्थिक विकास सीधे तौर पर रोजगार सृजन से जुड़ा हुआ है। साथ ही उन्होंने लगभग एक लाख करोड़ रुपये की एक रोजगार प्रोत्साहन योजना का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य लगभग दो करोड़ युवाओं को औपचारिक कार्यबल में शामिल करना है। यह योजना दर्शाती है कि सरकार न केवल नए रोजगार पैदा करने पर ध्यान दे रही है, बल्कि पहले से मौजूद अनौपचारिक रोजगार को भी औपचारिक ढांचे में लाने का प्रयास कर रही है।
प्रधानमंत्री ने युवा सरकारी कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे सरकारी सेवा में रहते हुए ऐसे निर्णय लें जो आत्मनिर्भर और विकसित भारत के संकल्प को निरंतर मजबूती प्रदान करें।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री के इस संबोधन से यह स्पष्ट संदेश निकलता है कि भारत सरकार रोजगार सृजन को बहुआयामी दृष्टिकोण से देख रही है। मुक्त व्यापार समझौते जहां नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच सुनिश्चित कर रहे हैं, वहीं घरेलू स्तर पर कौशल विकास, स्टार्टअप इकोसिस्टम और रोजगार प्रोत्साहन योजनाएं मिलकर युवाओं के लिए एक सशक्त आधार तैयार कर रही हैं। यदि यह रणनीति इसी गति से आगे बढ़ती रही, तो आने वाले वर्षों में भारत के युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसर और अधिक व्यापक होने की संभावना है, जो देश को विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के और करीब ले जाएगा।